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बुलंद हौसले से जीत ली उमाशंकर ने कोरोना से जंग
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लखीमपुर खीरी/ मैगलगंज। कोरोना संक्रमण की जानकारी होने के बाद भी मैगलगंज निवासी उमाशंकर पांडे ने हिम्मत नहीं हारी। मन में कोरोना का खौफ जरूर रहा, लेकिन फिर भी एक सैनिक की तरह कोरोना संक्रमण से लड़ते रहे। अंतत: मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की मेहनत, घरवालों की दुआओं और बुलंद हौसलों के चलते उमाशंकर पांडे 23 दिन में कोरोना को मात देने में सफल रहे। शुक्रवार को उन्हें मेडिकल कॉलेज से छुट्टी भी मिल गई और वह घर लौट आए।
अमर उजाला से वार्ता के दौरान बैटरी कारोबारी उमाशंकर पांडे ने बताया कि आठ मार्च को तुर्की से वापसी हुई। कुछ दिनों तक ठीक ठाक रहने के बाद 13-14 मार्च को अचानक जुकाम-बुखार हो गया। कभी-कभी पेट में दर्द भी होने लगता था। कस्बे में दवा ली, लेकिन फायदा न होने पर सीतापुर के एक निजी अस्पताल से दवा ली। मगर, फायदा नहीं हुआ। उमाशंकर पांडे ने बताया कि इस दौरान कोरोना को लेकर मन में भय पैदा हो गया। इस पर 18 मार्च को मेडिकल कॉलेज में दिखाया। जहां भर्ती कर स्वैब जांच हुई, जिसमें कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। यह सुनकर उनके साथ घर वाले भी खौफजदा हो गए, लेकिन डॉक्टरों की टीम हिम्मत बंधाती रही। न कुछ खाने को मन होता और न ही कुछ पीने का। घर वालों की चिंता अलग से रहती। यह तो ऊपर वाले की मेहरबानी रही कि परिवार सकुशल रहा। उमाशंकर पांडे का कहना है कि हर दिन डॉक्टर हिम्मत बंधाते कि कोरोना से जंग जीतने के लिए खाना, फल आदि सबका सेवन करते रहो। इससे शरीर मजबूत होगा, तभी कोरोना हारेगा। दवाओं के साथ पौष्टिक आहार लेना शुरू किया। अंतत: डॉक्टरों की मेहनत और उनके बंधाई हिम्मत से कोरोना को हराने में कामयाबी मिली।
निगेटिव के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट से टूट गई हिम्मत
उमाशंकर पांडे ने बताया 31 मार्च को जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। इस पर मन मजबूत हुआ कि अब घर जाने को मिलेगा, लेकिन दूसरे दिन जांच रिपोर्ट फिर पॉजिटिव हुई। इसे सुनकर हिम्मत जवाब दे गई। अब तो बस घर की चिंता सताने लगी थी। मगर, डॉक्टरों ने हौसला बनाए रखने को कहा। बाद में डॉक्टरों की मेहनत घर परिवार और मिलने वालों की दुआओं से दो जांच रिपोर्ट निगेटिव आईं, इस पर मेडिकल कॉलेज से घर आने की इजाजत मिल गई।
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14 दिन तक घर में रहना होगा क्वारंटीन
मेडिकल कॉलेज स्टाफ ने उमाशंकर पांडे को डिस्चार्ज तो कर दिया, लेकिन 14 दिन तक घर पर क्वारंटीन रहने को कहा है। इसका वह पालन कर रहे हैं। उमाशंकर घर के एक कमरे में रह रहे हैं वहीं पर उनको खाना पीना दिया जा रहा है।
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अमर उजाला से वार्ता के दौरान बैटरी कारोबारी उमाशंकर पांडे ने बताया कि आठ मार्च को तुर्की से वापसी हुई। कुछ दिनों तक ठीक ठाक रहने के बाद 13-14 मार्च को अचानक जुकाम-बुखार हो गया। कभी-कभी पेट में दर्द भी होने लगता था। कस्बे में दवा ली, लेकिन फायदा न होने पर सीतापुर के एक निजी अस्पताल से दवा ली। मगर, फायदा नहीं हुआ। उमाशंकर पांडे ने बताया कि इस दौरान कोरोना को लेकर मन में भय पैदा हो गया। इस पर 18 मार्च को मेडिकल कॉलेज में दिखाया। जहां भर्ती कर स्वैब जांच हुई, जिसमें कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। यह सुनकर उनके साथ घर वाले भी खौफजदा हो गए, लेकिन डॉक्टरों की टीम हिम्मत बंधाती रही। न कुछ खाने को मन होता और न ही कुछ पीने का। घर वालों की चिंता अलग से रहती। यह तो ऊपर वाले की मेहरबानी रही कि परिवार सकुशल रहा। उमाशंकर पांडे का कहना है कि हर दिन डॉक्टर हिम्मत बंधाते कि कोरोना से जंग जीतने के लिए खाना, फल आदि सबका सेवन करते रहो। इससे शरीर मजबूत होगा, तभी कोरोना हारेगा। दवाओं के साथ पौष्टिक आहार लेना शुरू किया। अंतत: डॉक्टरों की मेहनत और उनके बंधाई हिम्मत से कोरोना को हराने में कामयाबी मिली।
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निगेटिव के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट से टूट गई हिम्मत
उमाशंकर पांडे ने बताया 31 मार्च को जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। इस पर मन मजबूत हुआ कि अब घर जाने को मिलेगा, लेकिन दूसरे दिन जांच रिपोर्ट फिर पॉजिटिव हुई। इसे सुनकर हिम्मत जवाब दे गई। अब तो बस घर की चिंता सताने लगी थी। मगर, डॉक्टरों ने हौसला बनाए रखने को कहा। बाद में डॉक्टरों की मेहनत घर परिवार और मिलने वालों की दुआओं से दो जांच रिपोर्ट निगेटिव आईं, इस पर मेडिकल कॉलेज से घर आने की इजाजत मिल गई।
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14 दिन तक घर में रहना होगा क्वारंटीन
मेडिकल कॉलेज स्टाफ ने उमाशंकर पांडे को डिस्चार्ज तो कर दिया, लेकिन 14 दिन तक घर पर क्वारंटीन रहने को कहा है। इसका वह पालन कर रहे हैं। उमाशंकर घर के एक कमरे में रह रहे हैं वहीं पर उनको खाना पीना दिया जा रहा है।