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लॉकडाउन में किसानों और गरीबों के बिगड़ेंगे हालात
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लखीमपुर खीरी। कोरोना की जंग में पूरा भारत 14 अप्रैल 2020 तक लॉकडाउन कर दिया गया है, जिससे किसानों और गरीबों (दिहाड़ी मजदूरों) की परेशानी बढ़ने लगी है। लॉकडाउन की स्थिति में किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान मिलने में अब और देरी होगी, जबकि मार्च में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सरसों, मसूर, मटर, गेहूं समेत अन्य फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में गन्ना मूल्य भुगतान से ही इनकी रोजी-रोटी चलनी है। चीनी मिलें किसानों को भुगतान समय से नहीं कर रही हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसानों का चीनी मिलों पर 18 अरब 29 करोड़ 14 लाख रुपये गन्ना मूल्य बकाया हो चुका है। वहीं गांवों में निर्माण कार्य बंद होने से दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया है।
बजाज ग्रुप की गोला मिल पर किसानों का चार अरब 82 करोड़ 58 लाख रुपये गन्ना मूल्य बकाया है, जबकि कुल देय मूल्य के सापेक्ष मिल ने 8.66 प्रतिशत ही भुुगतान किया है। इसी ग्रुप की पलिया मिल पर तीन अरब 76 करोड़ 47 लाख रुपये बकाया हैं, जबकि कुल देय मूल्य के सापेक्ष अब तक मात्र 2.14 प्रतिशत ही भुगतान किया है। इसी तरह बजाज की ही खंभारखेड़ा मिल पर तीन अरब 34 करोड़ 24 लाख रुपये बकाया हैं, जबकि कुल गन्ना मूल्य के सापेक्ष 6.65 प्रतिशत ही भुगतान किया गया है। ऐसे ही एडवंट्ज ग्रुप की ऐरा मिल पर भी तीन अरब पांच करोड़ 85 लाख रुपये बकाया है, जबकि कुल बकाया मूल्य के सापेक्ष अब तक मात्र 2.39 प्रतिशत ही भुगतान किया गया है। इन चारों मिलों की भुगतान में हीला-हवाली से गन्ना किसान खासे परेशान हैं, जिन्हें लॉकडाउन के दौरान पैसे की सख्त जरूरत है। वहीं प्रशासन और गन्ना विभाग मिल प्रबंधन की मनमानी के आगे लाचार बना हुआ है। इसके अलावा अजबापुर मिल पर 39.62 करोड़, कुंभी मिल पर 67.82 करोड़, गुलरिया मिल पर 68.40 करोड़, बेलरायां मिल पर 66.19 करोड़ और संपूर्णानगर मिल पर 87.73 करोड़ रुपये बकाया है।
लॉकडाउन के दौरान चीनी मिलों में लेबर की समस्या आ रही है। इससे चीनी बाहर नहीं जा पा रही है। हालांकि शासन ने आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर रोक नहीं लगाई है। गन्ना किसानों को जल्द भुगतान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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बजाज ग्रुप की गोला मिल पर किसानों का चार अरब 82 करोड़ 58 लाख रुपये गन्ना मूल्य बकाया है, जबकि कुल देय मूल्य के सापेक्ष मिल ने 8.66 प्रतिशत ही भुुगतान किया है। इसी ग्रुप की पलिया मिल पर तीन अरब 76 करोड़ 47 लाख रुपये बकाया हैं, जबकि कुल देय मूल्य के सापेक्ष अब तक मात्र 2.14 प्रतिशत ही भुगतान किया है। इसी तरह बजाज की ही खंभारखेड़ा मिल पर तीन अरब 34 करोड़ 24 लाख रुपये बकाया हैं, जबकि कुल गन्ना मूल्य के सापेक्ष 6.65 प्रतिशत ही भुगतान किया गया है। ऐसे ही एडवंट्ज ग्रुप की ऐरा मिल पर भी तीन अरब पांच करोड़ 85 लाख रुपये बकाया है, जबकि कुल बकाया मूल्य के सापेक्ष अब तक मात्र 2.39 प्रतिशत ही भुगतान किया गया है। इन चारों मिलों की भुगतान में हीला-हवाली से गन्ना किसान खासे परेशान हैं, जिन्हें लॉकडाउन के दौरान पैसे की सख्त जरूरत है। वहीं प्रशासन और गन्ना विभाग मिल प्रबंधन की मनमानी के आगे लाचार बना हुआ है। इसके अलावा अजबापुर मिल पर 39.62 करोड़, कुंभी मिल पर 67.82 करोड़, गुलरिया मिल पर 68.40 करोड़, बेलरायां मिल पर 66.19 करोड़ और संपूर्णानगर मिल पर 87.73 करोड़ रुपये बकाया है।
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लॉकडाउन के दौरान चीनी मिलों में लेबर की समस्या आ रही है। इससे चीनी बाहर नहीं जा पा रही है। हालांकि शासन ने आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर रोक नहीं लगाई है। गन्ना किसानों को जल्द भुगतान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी