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क्वारंटीन किए गए कामगारों को खाने की व्यवस्था कराएंगे प्रधान
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लखीमपुर खीरी। गांवों में बनाए जा रहे क्वारंटीन सेंटरों पर रखे गए मजदूरों, कामगारों को खाना खिलाने में आ रही समस्या को दूर करते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने प्रधानों को खाना खिलाने की जिम्मेदारी सौंपी है। विद्यालयों में बने क्वारंटीन सेंटरों में रसोइयां खाना बनाएंगे। प्रधानों को खाते से पांच हजार रुपये खर्च करने की अनुमति दी है। 27 मार्च से चार दिनों में दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से करीब पांच हजार से अधिक मजदूर, कामगार वापस विभिन्न गांवों में लौटे हैं, जबकि इससे पहले भी कुछ लोग गांवों में आ चुके थे।
लॉकडाउन के चलते 27 मार्च से अब तक दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से मजदूरों, कामगारों का गांवों की ओर पलायन तेजी से हुआ है। चार दिनों में पांच हजार से अधिक मजदूर, कामगार पहुंचे हैं। इनकी निगरानी के लिए गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं, जिस पर मेडिकल जांच के साथ क्वारंटीन में रखे गए कामगारों को खाना खिलाया जाएगा। यदि कोई कामगार अपने घर से खाना मंगाता है, तो उसे सुविधा मिल सकती है। इन्हें खाना खिलाने के लिए प्रधानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो विद्यालयों के रसोइयों से खाना बनवाएंगे। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया है कि क्वारंटीन सेंटर में ठहराए गए लोगों को अपने घर बिल्कुल नहीं जाना है, जिससे संक्रमण के खतरे से परिवार वालों को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि एसडीएम और बीडीओ इन सेंटरों की मॉनिटरिंग करके प्रतिदिन कंट्रोल रूम को सूचना देंगे। खाने की कोई दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि प्रधानों को पांच हजार रुपये तक खर्च करने की अनुमति दी है।
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लॉकडाउन के चलते 27 मार्च से अब तक दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से मजदूरों, कामगारों का गांवों की ओर पलायन तेजी से हुआ है। चार दिनों में पांच हजार से अधिक मजदूर, कामगार पहुंचे हैं। इनकी निगरानी के लिए गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं, जिस पर मेडिकल जांच के साथ क्वारंटीन में रखे गए कामगारों को खाना खिलाया जाएगा। यदि कोई कामगार अपने घर से खाना मंगाता है, तो उसे सुविधा मिल सकती है। इन्हें खाना खिलाने के लिए प्रधानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो विद्यालयों के रसोइयों से खाना बनवाएंगे। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया है कि क्वारंटीन सेंटर में ठहराए गए लोगों को अपने घर बिल्कुल नहीं जाना है, जिससे संक्रमण के खतरे से परिवार वालों को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि एसडीएम और बीडीओ इन सेंटरों की मॉनिटरिंग करके प्रतिदिन कंट्रोल रूम को सूचना देंगे। खाने की कोई दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि प्रधानों को पांच हजार रुपये तक खर्च करने की अनुमति दी है।
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