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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विशेष: कोरोना की दुश्वारियां दिमाग पर भी डाल रहीं असर.. रहें सावधान
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Corona in Khiri
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लखीमपुर खीरी। कोरोना वायरस ने विश्वभर में डर व चिंता का माहौल बना दिया है। इसका असर लोगों के दिमाग पर भी हो रहा है। इसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना कुछ ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें यह बीमारी कोरोना ने दी है। उधर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी संकट की इस घड़ी में लोगों से सावधानी बरतकर मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान रखने को कहा है। लापरवाही डर, चिंता के साथ अवसाद परेशानी का कारण बन सकते हैं।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि कोरोना पर किए गए तमाम अध्ययन बताते हैं कि कोरोना वायरस से पीड़ित के साथ उसका इलाज करने वाले डॉक्टर के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के अनुसार कोरोना आने के बाद देश में मानसिक रोगियों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। इसका मुख्य कारण लॉकडाउन में लोगों का व्यापार, नौकरी, कमाई, बचत से लेकर मूलभूत संसाधन खोना है। इनकी वजह से लोग मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं।
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हर पांचवां व्यक्ति मानसिक रोग का शिकार
मनोचिकित्सक बताते हैं कि इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार हर पांच में से एक भारतीय किसी न किसी प्रकार के मानसिक रोग का शिकार है। चिंता की बात यह है कि यदि कोरोना के बाद मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती है तो इनका इलाज होने में दिक्कत होगी, क्योंकि दुनिया भर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में से सिर्फ एक प्रतिशत ही हेल्थ वर्कर्स मानसिक रोग के इलाज से जुड़े हैं। जबकि भारत में इसका आंकड़ा और भी कम है। कोरोना के कारण तमाम लोग होम क्वारंटीन या फिर अकेले रहने को मजबूर हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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क्वारंटीन का दिमाग पर असर
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक बताते हैं कि मेडिकल जर्नल लैंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्वारंटीन किए गए लोगों में संक्रमण का डर, चिड़चिड़ापन, उदासी के साथ सामान की कमी आदि को लेकर तनाव जैसी दिक्कत सामने आती हैं। वहीं भावनात्मक अस्थिरता, अवसाद, तनाव, उदासी, चिंता, घबराहट होना, नींद न आना, गुस्सा भी शामिल है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज।
-बार बार तथ्य और आंकड़े जांचना।
- नींद न आना, सोचते रहना कि कुछ बुरा हो सकता है।
- बीते दिनों को बार बार याद करना।
-लगभग हर चीज को लेकर ग्लानि होना।
- भूख सताना और एक साथ बहुत सा भोजन करना।
.....
बचाव
- तनाव, भ्रम, डर व गुस्सा महसूस करना सामान्य है। जिन पर भरोसा हो उनसे बातचीत करते रहें। दोस्तों और परिवार के संपर्क में रहें।
- हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाएं। अच्छी डाइट और पर्याप्त नींद लें। व्यायाम जरूर करें।
- स्मोकिंग, शराब या अन्य ड्रग्स का कदापि सहारा न लें।
- भावनात्मक उथल पुथल महसूस होने पर मनोचिकित्सक एवं काउंसलर से संपर्क करें।
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जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि कोरोना पर किए गए तमाम अध्ययन बताते हैं कि कोरोना वायरस से पीड़ित के साथ उसका इलाज करने वाले डॉक्टर के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के अनुसार कोरोना आने के बाद देश में मानसिक रोगियों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। इसका मुख्य कारण लॉकडाउन में लोगों का व्यापार, नौकरी, कमाई, बचत से लेकर मूलभूत संसाधन खोना है। इनकी वजह से लोग मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं।
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हर पांचवां व्यक्ति मानसिक रोग का शिकार
मनोचिकित्सक बताते हैं कि इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार हर पांच में से एक भारतीय किसी न किसी प्रकार के मानसिक रोग का शिकार है। चिंता की बात यह है कि यदि कोरोना के बाद मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती है तो इनका इलाज होने में दिक्कत होगी, क्योंकि दुनिया भर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में से सिर्फ एक प्रतिशत ही हेल्थ वर्कर्स मानसिक रोग के इलाज से जुड़े हैं। जबकि भारत में इसका आंकड़ा और भी कम है। कोरोना के कारण तमाम लोग होम क्वारंटीन या फिर अकेले रहने को मजबूर हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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क्वारंटीन का दिमाग पर असर
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक बताते हैं कि मेडिकल जर्नल लैंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्वारंटीन किए गए लोगों में संक्रमण का डर, चिड़चिड़ापन, उदासी के साथ सामान की कमी आदि को लेकर तनाव जैसी दिक्कत सामने आती हैं। वहीं भावनात्मक अस्थिरता, अवसाद, तनाव, उदासी, चिंता, घबराहट होना, नींद न आना, गुस्सा भी शामिल है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज।
-बार बार तथ्य और आंकड़े जांचना।
- नींद न आना, सोचते रहना कि कुछ बुरा हो सकता है।
- बीते दिनों को बार बार याद करना।
-लगभग हर चीज को लेकर ग्लानि होना।
- भूख सताना और एक साथ बहुत सा भोजन करना।
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बचाव
- तनाव, भ्रम, डर व गुस्सा महसूस करना सामान्य है। जिन पर भरोसा हो उनसे बातचीत करते रहें। दोस्तों और परिवार के संपर्क में रहें।
- हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाएं। अच्छी डाइट और पर्याप्त नींद लें। व्यायाम जरूर करें।
- स्मोकिंग, शराब या अन्य ड्रग्स का कदापि सहारा न लें।
- भावनात्मक उथल पुथल महसूस होने पर मनोचिकित्सक एवं काउंसलर से संपर्क करें।