{"_id":"6a36d20ff35095eadf0ac51b","slug":"construction-of-cow-shelters-completed-handover-process-stalled-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1036-178025-2026-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: गोशालाओं का निर्माण पूरा, हैंडओवर की प्रक्रिया अटकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: गोशालाओं का निर्माण पूरा, हैंडओवर की प्रक्रिया अटकी
Sat, 20 Jun 2026 11:16 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 20 Jun 2026 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के उद्देश्य से निर्मित जनपद में दो वृहद गोशालाओं का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद अब तक उनका संचालन शुरू नहीं हो सका है।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इन गोशालाओं को संबंधित संस्थाओं के सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया अधर में लटकी है। इससे पशु संरक्षण की योजना का लाभ फिलहाल धरातल पर नहीं उतर पा रहा है।
विकासखंड ईसानगर के समैसा गांव और मितौली तहसील के औरंगाबाद ग्राम पंचायत में 400-400 पशुओं की क्षमता वाली दो गोशालाओं का निर्माण कराया गया है।
दोनों परियोजनाओं पर करीब 3.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यानी प्रति गोशाला का निर्माण 1.60 करोड़ खर्च हुए हैं। निर्माण कार्य पूरा हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इन गोशालाओं का हैंडओवर नहीं किया गया है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, ईसानगर स्थित गोशाला का निर्माण वर्ष 2024-25 में कराया गया था, जबकि औरंगाबाद की गोशाला भी लंबे समय से तैयार खड़ी है।
इसके बावजूद दोनों परिसरों में पशुओं को रखने की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। इससे एक ओर जहां बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं, वहीं किसानों को फसलों के नुकसान की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।
हैंडओवर प्रक्रिया में तकनीकी औपचारिकताओं, विभागीय स्वीकृतियों या आवश्यक सुविधाओं के अधूरे होने जैसी वजहें बाधा बन रही हैं। हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से अभी तक स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि आखिर किस कारण दोनों गोशालाओं को संचालित नहीं किया जा सका है। सीवीओ डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि दोनों गोशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। हैंडओवर प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है।
विज्ञापन
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इन गोशालाओं को संबंधित संस्थाओं के सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया अधर में लटकी है। इससे पशु संरक्षण की योजना का लाभ फिलहाल धरातल पर नहीं उतर पा रहा है।
विज्ञापन
विकासखंड ईसानगर के समैसा गांव और मितौली तहसील के औरंगाबाद ग्राम पंचायत में 400-400 पशुओं की क्षमता वाली दो गोशालाओं का निर्माण कराया गया है।
दोनों परियोजनाओं पर करीब 3.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यानी प्रति गोशाला का निर्माण 1.60 करोड़ खर्च हुए हैं। निर्माण कार्य पूरा हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इन गोशालाओं का हैंडओवर नहीं किया गया है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, ईसानगर स्थित गोशाला का निर्माण वर्ष 2024-25 में कराया गया था, जबकि औरंगाबाद की गोशाला भी लंबे समय से तैयार खड़ी है।
इसके बावजूद दोनों परिसरों में पशुओं को रखने की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। इससे एक ओर जहां बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं, वहीं किसानों को फसलों के नुकसान की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।
हैंडओवर प्रक्रिया में तकनीकी औपचारिकताओं, विभागीय स्वीकृतियों या आवश्यक सुविधाओं के अधूरे होने जैसी वजहें बाधा बन रही हैं। हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से अभी तक स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि आखिर किस कारण दोनों गोशालाओं को संचालित नहीं किया जा सका है। सीवीओ डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि दोनों गोशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। हैंडओवर प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है।