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कंप्यूटर ने हिंदी लिखावट का कर दिया कबाड़ा
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अभ्यास न होने से गायब होती जा रही है लिखावट की सुंदरता
अपने ही घर में चलन से बाहर हो चुके हैं हिंदी के अंक
लखीमपुर खीरी। कंप्यूटर ने हिंदी लिखावट की प्राचीन परंपरा को काफी नुकसान पहुंचाया है। कंप्यूटर पर उंगलियां चलाते-चलाते कागज पर कलम चलाने की प्रवृत्ति विलुप्त होती जा रही है। अभ्यास न होने से लिखावट की सुंदरता भी गायब होती जा रही है। कभी विद्यार्थी अपनी लिखावट को खूबसूरत बनाने के प्रयास में रहते थे। हिंदी से जुड़े शिक्षकों और अन्य लेखकों का भी कहना है कि हिंदी विकास में नए नए आयाम खोजे जा सकते हैं। सभी को बोलने, लिखने-पढ़ने और अभिव्यक्ति करने में हिंदी को अपनाना चाहिये।
राजकीय इंटर कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी कहते हैं कि विद्यार्थियों में मोबाइल कंप्यूटर के प्रयोग से नई पीढ़ी केवल उंगलियों और अंगूठे के प्रयोग तक ही सीमित होती जा रही है। यह एक चिंता का विषय है कि विद्यार्थियों मेें लेखन क्षमताएं क्षीण हो रही हैं। हिंदी लेखन समृद्घि से केवल एक ही विषय में नहीं, बल्कि सभी विषयों में गुणात्मक अंक अर्जित करने में सफलता हासिल हो सकती है।
हिंदी अंक चलन से हो गए बाहर
जिस देश में शून्य का अविष्कार हुआ, गणित और अंक ज्योतिष आदि का विकास हुआ वहीं से हिंदी के अंक चलन से लगभग गायब हो गए हैं। लोग बातचीत में तो एक, दो, तीन, चार बोलते तो हैं, लेकिन लिखने में वे हिंदी की जगह अंग्रेजी के अंक का ही इस्तेमाल करते हैं। यदि यही हाल रहा तो आने वाले कुछ ही दिनों में बच्चे हिंदी के अंक पहचानना ही भूल जाएंगे। हिंदी के अंकों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
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साहित्य के साथ-साथ तकनीकी के क्षेत्र में हिंदी को आगे बढ़ाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, जिसे जीवित रखने के हम सबकों अपना ज्यादा से ज्यादा योगदान देना चाहिये। भाषा जो अधिक बोली जाती थी, वही लंबे समय तक जीवित रहती हैै।
- सिराज अली कवि/ शायर, मोहम्मदी
विश्व में जो हिंदी दे सकती है, वह कोई अन्य भाषा नहीं दे सकती। हिंदी सभी की भाषा नहीं प्राण है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि स्कूल से लेकर महाविद्यालय व सरकारी से लेकर निजी कार्यालयों में हिंदी अनिवार्य हो।
- डॉ. हरिओम अवस्थी, प्राचार्य, मोहम्मदी महाविद्यालय
हिंदी साहित्य संसार का सर्वश्रेष्ठ साहित्य है। इसके ज्ञान के बिना समाज का विकास अधूरा रहता है। सभी को हिंदी के विकास हेतु दैनिक जीवन हिंदी को इस्तेमाल में लाना चाहिये। हमारी आन, बान, शान और पहचान हिंदी है।
- राम लखन वर्मा, प्रवक्ता, राधाकृष्ण विद्या मंदिर इंटर कालेज मोहम्मदी
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अपने ही घर में चलन से बाहर हो चुके हैं हिंदी के अंक
लखीमपुर खीरी। कंप्यूटर ने हिंदी लिखावट की प्राचीन परंपरा को काफी नुकसान पहुंचाया है। कंप्यूटर पर उंगलियां चलाते-चलाते कागज पर कलम चलाने की प्रवृत्ति विलुप्त होती जा रही है। अभ्यास न होने से लिखावट की सुंदरता भी गायब होती जा रही है। कभी विद्यार्थी अपनी लिखावट को खूबसूरत बनाने के प्रयास में रहते थे। हिंदी से जुड़े शिक्षकों और अन्य लेखकों का भी कहना है कि हिंदी विकास में नए नए आयाम खोजे जा सकते हैं। सभी को बोलने, लिखने-पढ़ने और अभिव्यक्ति करने में हिंदी को अपनाना चाहिये।
राजकीय इंटर कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी कहते हैं कि विद्यार्थियों में मोबाइल कंप्यूटर के प्रयोग से नई पीढ़ी केवल उंगलियों और अंगूठे के प्रयोग तक ही सीमित होती जा रही है। यह एक चिंता का विषय है कि विद्यार्थियों मेें लेखन क्षमताएं क्षीण हो रही हैं। हिंदी लेखन समृद्घि से केवल एक ही विषय में नहीं, बल्कि सभी विषयों में गुणात्मक अंक अर्जित करने में सफलता हासिल हो सकती है।
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हिंदी अंक चलन से हो गए बाहर
जिस देश में शून्य का अविष्कार हुआ, गणित और अंक ज्योतिष आदि का विकास हुआ वहीं से हिंदी के अंक चलन से लगभग गायब हो गए हैं। लोग बातचीत में तो एक, दो, तीन, चार बोलते तो हैं, लेकिन लिखने में वे हिंदी की जगह अंग्रेजी के अंक का ही इस्तेमाल करते हैं। यदि यही हाल रहा तो आने वाले कुछ ही दिनों में बच्चे हिंदी के अंक पहचानना ही भूल जाएंगे। हिंदी के अंकों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
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साहित्य के साथ-साथ तकनीकी के क्षेत्र में हिंदी को आगे बढ़ाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, जिसे जीवित रखने के हम सबकों अपना ज्यादा से ज्यादा योगदान देना चाहिये। भाषा जो अधिक बोली जाती थी, वही लंबे समय तक जीवित रहती हैै।
- सिराज अली कवि/ शायर, मोहम्मदी
विश्व में जो हिंदी दे सकती है, वह कोई अन्य भाषा नहीं दे सकती। हिंदी सभी की भाषा नहीं प्राण है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि स्कूल से लेकर महाविद्यालय व सरकारी से लेकर निजी कार्यालयों में हिंदी अनिवार्य हो।
- डॉ. हरिओम अवस्थी, प्राचार्य, मोहम्मदी महाविद्यालय
हिंदी साहित्य संसार का सर्वश्रेष्ठ साहित्य है। इसके ज्ञान के बिना समाज का विकास अधूरा रहता है। सभी को हिंदी के विकास हेतु दैनिक जीवन हिंदी को इस्तेमाल में लाना चाहिये। हमारी आन, बान, शान और पहचान हिंदी है।
- राम लखन वर्मा, प्रवक्ता, राधाकृष्ण विद्या मंदिर इंटर कालेज मोहम्मदी