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Lakhimpur Kheri News: सिसैयापुरवा से कटान पीड़ितों का किनारा, मिलपुरवा में ही जमाए हैं अस्थायी डेरा
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नरहर गाँव मे भरा बाढ़ का पानी
महेवागंज/ सुंदरवल। शारदा नदी में अपना घर और जमीन गवां चुके अधिकांश पीड़ित अब भी खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि सभी 80 बाढ़ कटान पीड़ितों को रहने के लिए जगह मुहैया करा दी गई है।
22 लोगों ने अपनी जगह लेकर रजिस्ट्री करा ली हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को श्रीनगर और सरवा ग्राम पंचायत में बसने के लिए जगह दी गई है। 60 लोगों को श्रीनगर के मौलापुरवा जबकि 22 लोगों को सरवा ग्राम पंचायत के सिसैयापुरवा में जमीन आवंटित की गई। तेंदुआ मार्ग पर 11 पीड़ितों को बसाया गया। विस्थापित बचे लोगों को सिसैयापुरवा में तीन डिस्मिल जगह दी गई। दूरी की वजह से वहां कोई रहने ही नहीं गया।
अहिराना गांव के विस्थापित रमेश कुमार ने बताया कि सिसैयापुरवा में जमीन आवंटित की गई है। खेत से सिसैयापुरवा की दूरी करीब 10 किलोमीटर है। इतनी दूर आना-जाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए वहां कोई रहने नहीं गया है। मिलपुरवा तटबंध पर ही झोंपड़ी और तिरपाल डालकर रह रहे हैं। नदी के शांत होने की राह देख रहे ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही जरिया है। फ़सल की देखरेख के लिए सिसैया पुरवा आने जाने में ही दिन गुजर जाएगा।
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एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह ने बताया किश्रीनगर और सरवा ग्राम पंचायत में कटान पीड़ितों को बसने के लिए जगह दी गई है। जमीन न होने से सभी को एक जगह बसाना मुश्किल है। 22 संपन्न लोगों ने खुद जमीन खरीदकर रजिस्ट्री कराई है।
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22 लोगों ने अपनी जगह लेकर रजिस्ट्री करा ली हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को श्रीनगर और सरवा ग्राम पंचायत में बसने के लिए जगह दी गई है। 60 लोगों को श्रीनगर के मौलापुरवा जबकि 22 लोगों को सरवा ग्राम पंचायत के सिसैयापुरवा में जमीन आवंटित की गई। तेंदुआ मार्ग पर 11 पीड़ितों को बसाया गया। विस्थापित बचे लोगों को सिसैयापुरवा में तीन डिस्मिल जगह दी गई। दूरी की वजह से वहां कोई रहने ही नहीं गया।
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अहिराना गांव के विस्थापित रमेश कुमार ने बताया कि सिसैयापुरवा में जमीन आवंटित की गई है। खेत से सिसैयापुरवा की दूरी करीब 10 किलोमीटर है। इतनी दूर आना-जाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए वहां कोई रहने नहीं गया है। मिलपुरवा तटबंध पर ही झोंपड़ी और तिरपाल डालकर रह रहे हैं। नदी के शांत होने की राह देख रहे ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही जरिया है। फ़सल की देखरेख के लिए सिसैया पुरवा आने जाने में ही दिन गुजर जाएगा।
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एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह ने बताया किश्रीनगर और सरवा ग्राम पंचायत में कटान पीड़ितों को बसने के लिए जगह दी गई है। जमीन न होने से सभी को एक जगह बसाना मुश्किल है। 22 संपन्न लोगों ने खुद जमीन खरीदकर रजिस्ट्री कराई है।

नरहर गाँव मे भरा बाढ़ का पानी