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चकबंदी में धांधली: ग्राम समाज की जमीनों को खुर्दबुर्द कर रहे लेखपाल
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लखीमपुर खीरी। जनपद की 49 ग्राम पंचायतों में चकबंदी कराई जा रही हैै, जिसमें कई किसानों की अच्छी जमीनें चली गई हैं। चकबंदी लेखपालों ने मनमाने तरीके से किसानों के खेत काट दिए हैं। कम मालियत (सस्ती) वाली जमीन के स्वामियों को ज्यादा मालियत वाली जमीनें नाप दी गईं हैं। ताजा मामला बरतेर का सामने आया है, जहां पर ग्राम समाज की जमीन को दूसरे लोगों के नाम चकों में नाप कराई जा रही है। चकबंदी लेखपाल के खिलाफ प्रधान समेत ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत करके कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम पंचायत बरतेर में 2017 से चकबंदी चल रही है। यहां कुल 1408 गाटे हैं, जिनमें तीन प्रतिशत की कटौती की जा रही है। प्रधान कमलेश कुमार समेत ग्रामीणों का आरोप है कि चक आवंटन, पैमाइश से लेकर चकों के मूल्यांकन में धांधलेबाजी की गई है। ग्राम समाज की जमीन को अवैध तरीके से भूस्वामियों के चकों में लेखपाल द्वारा नाप दिया गया है। आरोप है कि प्रस्तावित चकों के बारे में रुखबंदी लेकर चकदारों की राय नहीं ली गई, बल्कि चकों का निर्माण गुपचुप तरीके से शहर के एक होटल में किया गया है। गाटों का विनमय अनुपात समीवर्ती गाटों के समतुल्य निर्धारित नहीं किया गया। चक मूल्यांकन की सूची सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित नहीं की गई और न ही प्रधान को उपलब्ध कराई गई। ग्रामीणों के आरोप यह भी है कि चक निर्माण में सड़क किनारे अवैध तरीके से उड़ान के चक बना दिए गए और मूल जोत के किसानों को वहां से हटा दिया गया। जबकि सड़क के किनारे ग्राम सभा की जमीन व्यापारिक महत्व की है, वहां पर भी चहेतों के अवैध रूप से चक आवंटित कर दिए गए हैं।
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1750 किसान लड़ रहे मुकदमा
चकबंदी लेखपाल/अधिकारियों की कारगुजारियों के चलते गांवों में विवाद की स्थिति बनी है। करीब 1750 किसान बंदोबस्त न्यायालयों में अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस उम्मीद में कि जल्द फैसला हो जाएगा, लेकिन अदालतों से नई तारीख ही मिल रही है। दशकों से मुकदमा लड़ते-लड़ते गरीब किसान हांफ रहे हैं।
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चकबंदी लेखपाल मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। चक आवंटन से लेकर पैमाइश में धांधली की गई है। शिकायत करने पर सुनवाई नहीं हो रही।
-रामकुमार निवासी बरतेर
गाटा संख्या 639 और 545 उड़ान के हैं, जो सड़क के किनारे कामर्शियल प्लाटों पर दिए गए हैं। जबकि गाटों की मूल जोत भी नहीं है। ऐसे ही ग्राम समाज की जमीन को भी खुद बुर्द किया जा रहा हैै।
-कमलेश कुमार, प्रधान, बरतेर
बरतेर का मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। यदि शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। जटिल प्रकरणों में मुकदमा के जरिए सुनवाई की जा रही है। किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
-ओपी अंजोर, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी
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ग्राम पंचायत बरतेर में 2017 से चकबंदी चल रही है। यहां कुल 1408 गाटे हैं, जिनमें तीन प्रतिशत की कटौती की जा रही है। प्रधान कमलेश कुमार समेत ग्रामीणों का आरोप है कि चक आवंटन, पैमाइश से लेकर चकों के मूल्यांकन में धांधलेबाजी की गई है। ग्राम समाज की जमीन को अवैध तरीके से भूस्वामियों के चकों में लेखपाल द्वारा नाप दिया गया है। आरोप है कि प्रस्तावित चकों के बारे में रुखबंदी लेकर चकदारों की राय नहीं ली गई, बल्कि चकों का निर्माण गुपचुप तरीके से शहर के एक होटल में किया गया है। गाटों का विनमय अनुपात समीवर्ती गाटों के समतुल्य निर्धारित नहीं किया गया। चक मूल्यांकन की सूची सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित नहीं की गई और न ही प्रधान को उपलब्ध कराई गई। ग्रामीणों के आरोप यह भी है कि चक निर्माण में सड़क किनारे अवैध तरीके से उड़ान के चक बना दिए गए और मूल जोत के किसानों को वहां से हटा दिया गया। जबकि सड़क के किनारे ग्राम सभा की जमीन व्यापारिक महत्व की है, वहां पर भी चहेतों के अवैध रूप से चक आवंटित कर दिए गए हैं।
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1750 किसान लड़ रहे मुकदमा
चकबंदी लेखपाल/अधिकारियों की कारगुजारियों के चलते गांवों में विवाद की स्थिति बनी है। करीब 1750 किसान बंदोबस्त न्यायालयों में अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस उम्मीद में कि जल्द फैसला हो जाएगा, लेकिन अदालतों से नई तारीख ही मिल रही है। दशकों से मुकदमा लड़ते-लड़ते गरीब किसान हांफ रहे हैं।
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चकबंदी लेखपाल मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। चक आवंटन से लेकर पैमाइश में धांधली की गई है। शिकायत करने पर सुनवाई नहीं हो रही।
-रामकुमार निवासी बरतेर
गाटा संख्या 639 और 545 उड़ान के हैं, जो सड़क के किनारे कामर्शियल प्लाटों पर दिए गए हैं। जबकि गाटों की मूल जोत भी नहीं है। ऐसे ही ग्राम समाज की जमीन को भी खुद बुर्द किया जा रहा हैै।
-कमलेश कुमार, प्रधान, बरतेर
बरतेर का मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। यदि शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। जटिल प्रकरणों में मुकदमा के जरिए सुनवाई की जा रही है। किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
-ओपी अंजोर, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी