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1000 बालकों पर बढ़ीं 23 बालिकाओं की संख्या
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर गांव में रैली निकालतीं छात्राएं। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। बालिकाओं की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए जिले में किए जा रहे प्रयासों की हकीकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर न तो स्वास्थ्य विभाग ने ही जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया और न ही जिला प्रशासन ने। एक गांव में सिर्फ एक रैली हुई।
बढ़ती आबादी के बीच लिंगानुपात की खाई दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ही नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियां भी बालक, बालिकाओं के बीच अंतर बढ़ाने में काफी हैं। जिस तरह से बेटे-बेटियों को लेकर समाज में विसंगतियां पैदा हो रही हैं। इससे बालिकाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होना मुमकिन नहीं है। 2001 की जनगणना में एक हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 871 थी तो वहीं 2011 में बालिकाओं की संख्या बढ़कर 894 हो गई।
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कन्याओं की कमी का कारण लिंगभेद
समाजशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. निशी सिंह का मानना है कि समाज में व्याप्त लिंगभेद के कारण लगातार लैंगिक अनुपात बिगड़ता जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ऐसा उस देश में हो रहा है जहां आदि काल से लोग शक्ति के रूप में नारी की पूजा करते आए हैं। समाज को बालिकाओं को लेकर अपनी मनोदशा बदलनी होगी, अन्यथा भविष्य में इसके भयावह परिणाम होंगे।
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एक रैली तक सीमित रहा बालिका दिवस
लखीमपुर खीरी। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस रविवार को एक गांव में रैली तक सीमित रहा। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने बताया कि महिला कल्याण विभाग के लोगों ने ग्राम पंचायत निजामपुर रामदास में कोविड-19 के नियमों का पालन कर प्राथमिक विद्यालय में बैठक की और बाद में जागरूकता रैली निकाली। इस मौके पर महिला शक्ति केंद्र की आर्य मित्रा बिष्ट ने बालिका दिवस का उद्देश्यों और बेटियों के अधिकारों के संरक्षण आदि के संबंध में जानकारी दी। जिला समन्वयक निक्की गुप्ता ने महिला शक्ति केंद्र योजना व मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की जानकारी दी। स्कूल की मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम में अध्यापिका निशात अफरोज, प्रधान प्रतिनिधि सियाराम, नूर बानो, रामदेवी, शिक्षामित्र भाग्यवती, नर्स रिनी सिंह मौजूद रहे। संवाद
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बढ़ती आबादी के बीच लिंगानुपात की खाई दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ही नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियां भी बालक, बालिकाओं के बीच अंतर बढ़ाने में काफी हैं। जिस तरह से बेटे-बेटियों को लेकर समाज में विसंगतियां पैदा हो रही हैं। इससे बालिकाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होना मुमकिन नहीं है। 2001 की जनगणना में एक हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 871 थी तो वहीं 2011 में बालिकाओं की संख्या बढ़कर 894 हो गई।
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कन्याओं की कमी का कारण लिंगभेद
समाजशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. निशी सिंह का मानना है कि समाज में व्याप्त लिंगभेद के कारण लगातार लैंगिक अनुपात बिगड़ता जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ऐसा उस देश में हो रहा है जहां आदि काल से लोग शक्ति के रूप में नारी की पूजा करते आए हैं। समाज को बालिकाओं को लेकर अपनी मनोदशा बदलनी होगी, अन्यथा भविष्य में इसके भयावह परिणाम होंगे।
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एक रैली तक सीमित रहा बालिका दिवस
लखीमपुर खीरी। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस रविवार को एक गांव में रैली तक सीमित रहा। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने बताया कि महिला कल्याण विभाग के लोगों ने ग्राम पंचायत निजामपुर रामदास में कोविड-19 के नियमों का पालन कर प्राथमिक विद्यालय में बैठक की और बाद में जागरूकता रैली निकाली। इस मौके पर महिला शक्ति केंद्र की आर्य मित्रा बिष्ट ने बालिका दिवस का उद्देश्यों और बेटियों के अधिकारों के संरक्षण आदि के संबंध में जानकारी दी। जिला समन्वयक निक्की गुप्ता ने महिला शक्ति केंद्र योजना व मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की जानकारी दी। स्कूल की मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम में अध्यापिका निशात अफरोज, प्रधान प्रतिनिधि सियाराम, नूर बानो, रामदेवी, शिक्षामित्र भाग्यवती, नर्स रिनी सिंह मौजूद रहे। संवाद