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सिस्टम बेखबर..दुधवा-चंदनचौकी मार्ग पर दो साल से टूटी है पुलिया
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दुधवा-चंदनचौकी मार्ग पर टूटी पुलिया से निकलता बाइक सवार। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। दुधवा-चंदनचौकी मार्ग पर दो साल पहले पुलिया टूटी थी, लेकिन अब तक इसका निर्माण नहीं कराया जा सका है। टूटी पुलिया पर मिट्टी भरी बोरियां डालकर किसी तरह आवागमन बहाल किया गया है, लेकिन बारिश में मिट्टी बहने से यहां आवागमन खतरनाक हो गया है। इससे चंदनचौकी समेत करीब 25 ग्राम सभाओं का संपर्क पलिया समेत मुख्यालय से कट सकता है तो वहीं हादसे होने की आशंका बढ़ गई है, जबकि चंदनचौकी में हाल में ही थारू शिल्प ग्राम की स्थापना भी कराई जा चुकी है।
पीडब्ल्यूडी विभाग के निर्माण खंड तीन के अधिशाषी अभियंता ने पुलिया निर्माण न हो पाने के लिए दुधवा नेशनल पार्क के डीडी (उपनिदेशक) को जिम्मेदार बताया है, जो निर्माण कार्य शुरू कराने में अड़ंगा लगा चुके हैं। टेंडर के बाद काम शुरू नहीं हो पाने से बजट को सरेंडर करना पड़ा है, जबकि डीएम ने भी रिजर्व फॉरेस्ट बनने से पहले से बनी सड़क-पुलिया के मरम्मत कार्य को बाधित करने पर सवाल उठाते हुए डीडी दुधवा को पत्र भी लिखे थे।
इंडो-नेपाल बार्डर पर दुधवा नेशनल पार्क के सीमा क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (थारू) बाहुल्य करीब 25 ग्राम सभाएं हैं। इनमें पहुंचने के लिए दुधवा-चंदनचौकी मार्ग प्रमुख है। इसके अलावा चंदनचौकी में ही एकीकृत जनजाति विकास परियोजना का मुख्यालय और कोतवाली स्थित है। हाल में ही पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से थारू शिल्प ग्राम की भी स्थापना कराई जा चुकी है। दुधवा-चंदनचौकी मार्ग का स्वामित्व पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड तीन के पास है। निर्माण खंड ने नई पुलिया (दो बाई छह मीटर साइज) बनाने के लिए डेढ़ वर्ष पहले करीब 80 लाख का स्टीमेट स्वीकृत कराकर टेंडर कराया था, जिसके बाद में डीडी दुधवा मनोज सोनकर ने परमीशन न लिए जाने की बात कहकर पुलिया के निर्माण कार्य को रोक दिया था। इसके बाद से काम शुरू नहीं कराया जा सका है।
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इन गांवों के लोग हो रहे प्रभावित
दुधवा-चंदनचौकी मार्ग पर पुलिया टूट जाने से चंदनचौकी समेत करीब 25 गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं। प्रभावित गांवों में मसानखंभ, सौनहा, ध्यानपुर, बंदरभरारी, धुस्किया, पचपेड़ा, परसिया, मंगलपुरवा आदि गांव शामिल हैं।
दो साल से पुलिया निर्माण कार्य शुरू कराने के प्रयास किए गए, लेकिन डीडी दुधवा ने काम शुरू नहीं होने दिया। पार्क क्षेत्र में नए निर्माण कार्य पर रोक है, लेकिन पुराने क्षतिग्रस्त कार्य की मरम्मत करने से रोका जा रहा है। दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
-योगेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड तीन
पुलिया निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं लगाई गई है। इसकी विभाग से परमीशन मांगी जाती है, जो अभी हाल में मांगी गई है। इसलिए अभी विधिक प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही परमीशन दे दी जाएगी।
- मनोज सोनकर, डीडी, दुधवा नेशनल पार्क
डीडी दुधवा के द्वारा पुलिया निर्माण में बेवजह अड़ंगा लगाया जा रहा है, जिससे थारू गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले भी डीडी अपनी विवादित कार्यशैली के चलते सुर्खियों में रहे हैं। जंगल क्षेत्र में बसे थारूओं के उत्पीड़न से भी बाज नहीं आते हैं। इसकी शिकायत शासन में की थी।
-रोमी साहनी, विधायक, पलिया
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पीडब्ल्यूडी विभाग के निर्माण खंड तीन के अधिशाषी अभियंता ने पुलिया निर्माण न हो पाने के लिए दुधवा नेशनल पार्क के डीडी (उपनिदेशक) को जिम्मेदार बताया है, जो निर्माण कार्य शुरू कराने में अड़ंगा लगा चुके हैं। टेंडर के बाद काम शुरू नहीं हो पाने से बजट को सरेंडर करना पड़ा है, जबकि डीएम ने भी रिजर्व फॉरेस्ट बनने से पहले से बनी सड़क-पुलिया के मरम्मत कार्य को बाधित करने पर सवाल उठाते हुए डीडी दुधवा को पत्र भी लिखे थे।
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इंडो-नेपाल बार्डर पर दुधवा नेशनल पार्क के सीमा क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (थारू) बाहुल्य करीब 25 ग्राम सभाएं हैं। इनमें पहुंचने के लिए दुधवा-चंदनचौकी मार्ग प्रमुख है। इसके अलावा चंदनचौकी में ही एकीकृत जनजाति विकास परियोजना का मुख्यालय और कोतवाली स्थित है। हाल में ही पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से थारू शिल्प ग्राम की भी स्थापना कराई जा चुकी है। दुधवा-चंदनचौकी मार्ग का स्वामित्व पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड तीन के पास है। निर्माण खंड ने नई पुलिया (दो बाई छह मीटर साइज) बनाने के लिए डेढ़ वर्ष पहले करीब 80 लाख का स्टीमेट स्वीकृत कराकर टेंडर कराया था, जिसके बाद में डीडी दुधवा मनोज सोनकर ने परमीशन न लिए जाने की बात कहकर पुलिया के निर्माण कार्य को रोक दिया था। इसके बाद से काम शुरू नहीं कराया जा सका है।
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इन गांवों के लोग हो रहे प्रभावित
दुधवा-चंदनचौकी मार्ग पर पुलिया टूट जाने से चंदनचौकी समेत करीब 25 गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं। प्रभावित गांवों में मसानखंभ, सौनहा, ध्यानपुर, बंदरभरारी, धुस्किया, पचपेड़ा, परसिया, मंगलपुरवा आदि गांव शामिल हैं।
दो साल से पुलिया निर्माण कार्य शुरू कराने के प्रयास किए गए, लेकिन डीडी दुधवा ने काम शुरू नहीं होने दिया। पार्क क्षेत्र में नए निर्माण कार्य पर रोक है, लेकिन पुराने क्षतिग्रस्त कार्य की मरम्मत करने से रोका जा रहा है। दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
-योगेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड तीन
पुलिया निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं लगाई गई है। इसकी विभाग से परमीशन मांगी जाती है, जो अभी हाल में मांगी गई है। इसलिए अभी विधिक प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही परमीशन दे दी जाएगी।
- मनोज सोनकर, डीडी, दुधवा नेशनल पार्क
डीडी दुधवा के द्वारा पुलिया निर्माण में बेवजह अड़ंगा लगाया जा रहा है, जिससे थारू गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले भी डीडी अपनी विवादित कार्यशैली के चलते सुर्खियों में रहे हैं। जंगल क्षेत्र में बसे थारूओं के उत्पीड़न से भी बाज नहीं आते हैं। इसकी शिकायत शासन में की थी।
-रोमी साहनी, विधायक, पलिया