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अब मोहाना नदी ने शुरू किया कटान, ग्रामीणों में अफरातफरी

Fri, 21 Aug 2020 07:04 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2020 07:04 PM IST
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पलिया (लखीमपुर खीरी) में शारदा नदी पुल के नीचे तीव्र गति से बह रहा पानी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
तिकुनिया (लखीमपुर खीरी)। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर मोहाना नदी ने जबरदस्त कटान शुरू कर दिया है। नदी कटान करते हुए ग्राम गंगानगर तक पहुंच गई है यहां कई लोगों के घर कटान की जद में आ गए हैं।
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नदी के लगातार कटान करने से ग्रामीणों में अफरातफरी है। गुरमीत कौर का घर, करमजीत सिंह के घर में संचालित डाकखाना भी कटान की जद में आ गया है। नदी ने रननगर और इंद्रनगर में काफी तबाही मचाई है। प्रशासन ने ग्रामीणों को राशन किट दी हैं जो नाकाफी साबित हुई हैं। डीएम शैलेंद्र सिंह ने 14 अगस्त को बाढ़-कटान पीड़ित गांव गंगानगर, इंद्रनगर और रननगर का दौरा कर सिंचाई विभाग को कटान रोकने के लिए उपाय करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक सिंचाई विभाग ने यहां पर कटान रोकने का कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं किया है। इधर, भाजपा नेता आशीष मिश्रा ने एसडीएम ओपी गुप्ता और तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार पांडे के साथ मोहाना नदी के कटान को देखा। ग्राम प्रधान मनोज सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत रननगर में मोहाना नदी के कटान से काफी तबाही हुई है।
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जलस्तर फिर बढ़ा, शारदा खतरे के निशान से 68 सेमी ऊपर पहुंची
पलियाकलां शारदा नदी का जलस्तर गुरुवार को फिर बढ़ गया। नदी का खतरे के निशान से 68 सेमी ऊपर पहुंच गई है। जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की एक बार फिर से धड़कनें बढ़ गईं हैं। नदी ने कटान भी तेज कर दिया है। खेतिहर इलाके में नदी तेजी से कटान कर रही है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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शारदा नदी का जलस्तर बीते लगभग एक सप्ताह से खतरे के निशान से नीचे नहीं गया है। जलस्तर लगातार खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। जो कटान का सबसे बड़ा कारण है। नदी तेजी से खेतिहर इलाके में कटान कर रही है और किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल को अपनी चपेट में ले चुकी है। गुरुवार को दोपहर तीन बजे तक नदी खतरे के निशान 154.100 सेमी से 68 सेमी ऊपर 154.780 सेमी पर थी। उधर नदी का पानी इमलिया फार्म तथा बोझवा ठोकर नंबर एक के पास काफी बढ़ गया है। बरुआ कलां व जंगल नंबर सात में भी नदी तेजी से कटान कर रही है।
शारदा और घाघरा उफान पर, 50 गांवों में जलभराव, प्रशासन ने बांटीं राहत किट
धौरहरा शारदा और घाघरा नदियों के उफान के चलते तहसील क्षेत्र के रमियाबेहड़, धौरहरा और ईसानगर के करीब 50 गांवों में जलभराव है। इससे लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जल पा रहे, वही रैनी गांव के 44 घर शारदा में समा चुके हैं। लोग दाने-दाने को मोहताज हैं। यहां प्रशासन ने अब तक राहत किट के अलावा कोई भी सहायता नहीं दी है, इसके अलावा पोखरा, रामनगर बगहा, गुलरिया तालुके अमेठी, गोड़ियनपुरवा में नदी खेत काट रही है। इन किसानों को कोई सहायता राशि नहीं दी गई, न ही बाढ़ खंड विभाग इन्हें बचाने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को तहसीलदार अनिल यादव, लेखपाल शशांक ने राजस्व टीम के साथ सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए मिलिक गौढ़ी के सात सौ परिवारों को राहत किट बांटी।
बाढ़ में बही सड़क तो लकड़ी का पुल बनाकर निकल रहे ग्रामीण
धौरहरा शारदा नदी के तेज बहाव में गांव के संपर्क मार्ग की सड़क बह गई है। लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने ध्यान नही दिया। इस पर ग्रामीणों ने स्वयं अपने प्रयासों से बल्ली-पटरे लगाकर लकड़ी का पुल बनाया है।
निघासन में शारदा की चपेट में आए 32 गांव
निघासन के 32 गांव मोहाना और शारदा नदी के चपेट में आ गए हैं। तहसीलदार ने शारदा नदी के कहर से जूझ रहे ग्रंट नंबर बारह के चार मजरों के लोगों को राहत पहुंचाई। गांव में अधिक पानी होने के कारण उन्होंने राहत शिविर श्रीनगर के पास लगाया। तहसील प्रशासन ने साढ़े पांच सौ लोगों को राहत किट बांटीं।
तहसीलदार डॉ. धर्मेंद्र पांडे ने बताया कि ग्रंट नंबर बारह गांव के साथ ही इसके चार मजरे ढुढैला, गोधापुरवा, मझरी और रंडौहा शारदा की बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां के लोगों को राहत सामग्री किट देने गुरुवार को वह नायब तहसीलदार अरुण सोनकर, राजस्व निरीक्षक शंकरलाल राना, लेखपाल श्यामनंदन मिश्र और पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे। गांव में गहरा पानी भरा होने से गांवों तक पहुंच पाना संभव नहीं था। ऐेसे में लोगों को राहत किट बांटने के लिए फूलबेहड़ के पास श्रीनगर गांव में बुलाकर वितरण किया गया। किट बांटने के पहले तहसीलदार ने रपटा पुल के पास खड़ी सभी नावों को चेक किया। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशों के मुताबिक बाढ़ राहत कार्य में लगाई गई नावें क्षतिग्रस्त नहीं होनी चाहिए। उनमें क्षमता से ज्यादा सवारियां नहीं बिठाई जाएं और नाव से किसी जानवर को पार करते समय उस पर नाविक के अलावा अन्य कोई सवारी नहीं बिठाई जाए।

130 गांवों में बाढ़ की तबाही, 719 हेक्टेयर जमीन कटान से नदियों में समाई, 2354 हेक्टेयर फसलों को नुकसान
लखीमपुर खीरी जनपद में पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर तहसील क्षेत्रों में शारदा और घाघरा नदियों से आई बाढ़ से 130 गांवों में जलभराव हो गया है। इससे 71531 की आबादी प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा किसानों और उनकी फसलों को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा करीब 50 ग्रामीणों के घर भी नदी में समा चुके हैं। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक तहसीलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर इस वर्ष अब तक बाढ़-कटान से 2354 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों को क्षति पहुंची है। इससे किसानों को 785.5 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा 785 हेक्टेयर जमीन कटान में नदियों की भेंट चढ़ गई है। इससे भी कई किसानों को तगड़ा झटका लगा है। क्योंकि कई किसान पलक झपकते ही जमींदार से भूमिहीन हो गए हैं। डीएम ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 821 नावें संचालित की जा रही हैं। 640 परिवारों को राशन किट बांटी जा चुकी हैं।
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