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शौचालयों पर करोड़ों खर्च फिर भी खेतों में शौच को जाने पर मजबूर हैं महिलाएं
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निघासन क्षेत्र में शौचालय में भरी भूसे की बोरियां। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। शौचालयों के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी महिलाएं और ग्रामीण खेत पर शौच को जाने पर मजबूर हैं। नतीजतन ईसानगर जैसी घटनाएं सामने आती हैं। आलम यह है कि कई ग्राम पंचायतों में गोलमाल के चलते कई पात्रों के घरों में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है तो वहीं आधे-अधूरे बने पड़े शौचालय क्रियाशील न होने से उनमें कंडा, चारा आदि सामान रखा जा रहा है। यही वजह है कि महिलाओं और बालिकाओं को भी खेत पर शौच को जाना पड़ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी शौचालय निर्माण आधे-अधूरे बने होने पर टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
जनपद में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 2012 में कराए गए बेसलाइन सर्वे सहित कुल 7,17,155 शौचालय निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष अब तक 7,14,925 शौचालय पूर्ण कराने का दावा पंचायत राज विभाग कर रहा है। इन दावों की सच्चाई जानने के लिए गांवों का भ्रमण किया गया तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई हैै। गांवों में आधे-अधूरे पड़े शौचालय क्रियाशील न होने से लोग उसमें कंडा, पशुओं का चारा आदि घरेलू सामान रख रहे हैं। निघासन ब्लॉक क्षेत्र के गांव छेदुईपतिया निवासी कलीम खां के घर के बाहर बने शौचालय में पशुओं का चारा रखा जा रहा है। कलीम ने बताया कि शौचालय निर्माण 2018-19 में हुआ था, लेकिन अभी पूरा नहीं बना है। प्रधान और सचिव टरका रहे हैं। इसी ब्लॉक के गांव मोतीपुरवा में जयसुख का शौचालय अधूरा मिला, जिसमें चारा आदि सामान रखा मिला। जयसुख ने बताया कि प्रधान ने अब तक शौचालय पूर्ण नहीं कराया है। अभी टैंक भी नहीं बना है। इससे परिवार के सदस्यों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है।
दूसरे चरण में ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अभियान शीघ्र ही चलाया जाएगा, जो 2025 तक चलेगा। इस अभियान में ग्रामीणों को शौचालय का उपयोग और उसके रख-रखाव की जानकारी दी जाएगी। कोविड-19 संक्रमण के चलते अभियान स्थगित हुआ था। इसके लिए शासन से निर्देश मिलते ही अभियान प्रारंभ कर दिया जाएगा। जो शौचालय अधूरे पड़े हैं, उन्हें जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। कई प्रधानों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है।
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-अजय श्रीवास्तव, डीपीआरओ
कैसे मिलेगा महिलाओं को शौचालय का लाभ
बांकेगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत रामपुर डाटपुर के मजरा रामपुर गांव में महिलाओं की सुविधा के लिए बने शौचालयों में भूसा और कंडे भरे जा रहे हैं, जिससे स्कीम पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रही है। रामपुर निवासी ईश्वरवती पत्नी कुलदीप के शौचालय में भूसा तो अमरदीप पुत्र यदुनाथ के शौचालय में कंडे भरे हैं। उधर महेंद्र कुमार पुत्र धनीराम और धर्मेंद्र पुत्र धनीराम के शौचालय में पल्ले ही नहीं है, जबकि प्रधान हंसराम और ग्राम पंचायत अधिकारी चंद्रप्रकाश का कहना है कि शौचालय पूरी तरह बनवा दिए गए थे। साथ ही जब भी वहां पंचायत की बैठक होती है तब लोगों को शौचालय के उपयोग और स्वच्छ भारत मिशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। यदि फिर भी लोग शौचालय का दुरुपयोग कर रहे हैं, तो जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जनपद में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 2012 में कराए गए बेसलाइन सर्वे सहित कुल 7,17,155 शौचालय निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष अब तक 7,14,925 शौचालय पूर्ण कराने का दावा पंचायत राज विभाग कर रहा है। इन दावों की सच्चाई जानने के लिए गांवों का भ्रमण किया गया तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई हैै। गांवों में आधे-अधूरे पड़े शौचालय क्रियाशील न होने से लोग उसमें कंडा, पशुओं का चारा आदि घरेलू सामान रख रहे हैं। निघासन ब्लॉक क्षेत्र के गांव छेदुईपतिया निवासी कलीम खां के घर के बाहर बने शौचालय में पशुओं का चारा रखा जा रहा है। कलीम ने बताया कि शौचालय निर्माण 2018-19 में हुआ था, लेकिन अभी पूरा नहीं बना है। प्रधान और सचिव टरका रहे हैं। इसी ब्लॉक के गांव मोतीपुरवा में जयसुख का शौचालय अधूरा मिला, जिसमें चारा आदि सामान रखा मिला। जयसुख ने बताया कि प्रधान ने अब तक शौचालय पूर्ण नहीं कराया है। अभी टैंक भी नहीं बना है। इससे परिवार के सदस्यों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है।
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दूसरे चरण में ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अभियान शीघ्र ही चलाया जाएगा, जो 2025 तक चलेगा। इस अभियान में ग्रामीणों को शौचालय का उपयोग और उसके रख-रखाव की जानकारी दी जाएगी। कोविड-19 संक्रमण के चलते अभियान स्थगित हुआ था। इसके लिए शासन से निर्देश मिलते ही अभियान प्रारंभ कर दिया जाएगा। जो शौचालय अधूरे पड़े हैं, उन्हें जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। कई प्रधानों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है।
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-अजय श्रीवास्तव, डीपीआरओ
कैसे मिलेगा महिलाओं को शौचालय का लाभ
बांकेगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत रामपुर डाटपुर के मजरा रामपुर गांव में महिलाओं की सुविधा के लिए बने शौचालयों में भूसा और कंडे भरे जा रहे हैं, जिससे स्कीम पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रही है। रामपुर निवासी ईश्वरवती पत्नी कुलदीप के शौचालय में भूसा तो अमरदीप पुत्र यदुनाथ के शौचालय में कंडे भरे हैं। उधर महेंद्र कुमार पुत्र धनीराम और धर्मेंद्र पुत्र धनीराम के शौचालय में पल्ले ही नहीं है, जबकि प्रधान हंसराम और ग्राम पंचायत अधिकारी चंद्रप्रकाश का कहना है कि शौचालय पूरी तरह बनवा दिए गए थे। साथ ही जब भी वहां पंचायत की बैठक होती है तब लोगों को शौचालय के उपयोग और स्वच्छ भारत मिशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। यदि फिर भी लोग शौचालय का दुरुपयोग कर रहे हैं, तो जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

निघासन क्षेत्र में शौचालय में धरा जानवरों का चारा- फोटो : LAKHIMPUR