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एसएसबी के 56वें बल स्थापना दिवस पर हुए रंगारंग कार्यक्रम
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महंगापुर। 39वीं वाहिनी एसएसबी गदनियां मुख्यालय पर एसएसकी का 56वां बल स्थापना दिवस मनाया गया। इसमें एसएसबी के जवानों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। मुख्य अतिथि जिला जज शिवशंकर प्रसाद ने एसएसबी जवानों के साहस को सराहा। वहीं कमानडेंट ने एसएसबी के बारे में विस्तार से जानकारियां दीं।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि जिला जज शिवशंकर प्रसाद ने दीप जलाकर की। इसके बाद एसएसबी जवानों ने कार्यक्रम पेश किए। वाहिनी कमांडेंट मुन्ना सिंह और संदीक्षा अध्यक्ष किरन सिंह ने आए हुए अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। जिला जज ने कहा कि वह जवानों के हौसलों को नमन करते हैं, अपने आप को गौरवान्वित समझ रहे हैं जो उनके बीच में खड़े हैं। कमांडेंट मुन्ना सिंह ने कहा कि 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद 20 दिसंबर 1963 को स्पेशल सर्विस ब्यूरो के नाम से इसका गठन हुआ था जिसका काम सूचनाओं को एकत्र करना था। फोर्स की क्षमता को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2003 में इसका नाम बदलकर सशस्त्र सीमा बल कर दिया और इंडो-नेपाल व भूटान सीमा की सुरक्षा का दायित्व दिया। जिसका निर्वाह पूरी मुस्तैदी से बल के जवान करते आ रहे हैं। कहा कि बल के निर्माण के बाद स्पेशल सर्विस के कारण ही चीन दोबारा हमला नहीं कर सका। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने रस्साकशी सहित अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस दौरान जिला एडीजे स्नेहा नेगी, एडीजे हेमेंद्र सिंह, जेएम अमर्शा सिंह, सांसद प्रतिनिधि दीपक तलवार के साथ ही सेकेंड कमानडेंट अमित कुमार सिंह, डिप्टी कमानडेंट संजीव कुमार, सहायक कमांडेंट उपेंद्र सिंह डांगी, अरविंद कुमार, डॉ संगीता विश्वास के साथ ही पलिया इलाके के सभी डॉक्टर, स्कूलों के चेयरमैन, गणमान्य नागरिक और एसएसबी जवान मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि जिला जज शिवशंकर प्रसाद ने दीप जलाकर की। इसके बाद एसएसबी जवानों ने कार्यक्रम पेश किए। वाहिनी कमांडेंट मुन्ना सिंह और संदीक्षा अध्यक्ष किरन सिंह ने आए हुए अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। जिला जज ने कहा कि वह जवानों के हौसलों को नमन करते हैं, अपने आप को गौरवान्वित समझ रहे हैं जो उनके बीच में खड़े हैं। कमांडेंट मुन्ना सिंह ने कहा कि 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद 20 दिसंबर 1963 को स्पेशल सर्विस ब्यूरो के नाम से इसका गठन हुआ था जिसका काम सूचनाओं को एकत्र करना था। फोर्स की क्षमता को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2003 में इसका नाम बदलकर सशस्त्र सीमा बल कर दिया और इंडो-नेपाल व भूटान सीमा की सुरक्षा का दायित्व दिया। जिसका निर्वाह पूरी मुस्तैदी से बल के जवान करते आ रहे हैं। कहा कि बल के निर्माण के बाद स्पेशल सर्विस के कारण ही चीन दोबारा हमला नहीं कर सका। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने रस्साकशी सहित अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस दौरान जिला एडीजे स्नेहा नेगी, एडीजे हेमेंद्र सिंह, जेएम अमर्शा सिंह, सांसद प्रतिनिधि दीपक तलवार के साथ ही सेकेंड कमानडेंट अमित कुमार सिंह, डिप्टी कमानडेंट संजीव कुमार, सहायक कमांडेंट उपेंद्र सिंह डांगी, अरविंद कुमार, डॉ संगीता विश्वास के साथ ही पलिया इलाके के सभी डॉक्टर, स्कूलों के चेयरमैन, गणमान्य नागरिक और एसएसबी जवान मौजूद रहे।
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