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जरूरत के समय समितियों में ढूंढे नहीं मिल रही यूरिया खाद

Mon, 02 Dec 2019 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2019 12:52 AM IST
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Civic Amenities
अमीरनगर। कस्बे और बस्तौली की सहकारी समिति में यूरिया खाद उपलब्ध न होने से किसानों को काफी दिक्कत हो रही हैं। इसके चलते किसान प्राइवेट दुकानदारों से महंगे दामों पर खाद खरीदकर फसल में डाल रहे हैं।
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रबी फसल की सिंचाई के बाद खेतों में यूरिया खाद की मांग बढ़ गई है। क्षेत्र में तमाम किसान गेहूं की फसल में पहला पानी लगा चुके हैं, लेकिन दोनों समितियों पर यूरिया खाद उपलब्ध न होने से किसानों के खेतों में पहली खाद नहीं पड़ पा रही है। किसान बताते हैं कि समितियों पर खाद न मिलने से उन्हें मजबूरन 50 रुपया प्रति बोरी अधिक देकर यूरिया खाद लेनी पड़ रही है। ऐसे में क्षेत्र के किसान सुलेमान खां, मोहम्मद उमर खां, इस्लाम खां, टीटू खां, राजपाल सिंह यादव सहित तमाम किसानों ने क्षेत्र की दोनों समितियों पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है।
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बिना खाद कैसे तैयार होगी फसल
अमीरनगर निवासी इमरान खान का कहना है कि इस साल उन्होंने साढ़े छह एकड़ गेहूं बोया है और खेतों में पहला पानी लगा चुके हैं, शनिवार को खाद पड़ जानी चाहिए थी। 15 दिन से खाद न होने की वजह से फसल को यूरिया खाद का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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देवरिया के एहरान खां का कहना है कि सहकारी समितियों पर मिलने वाली यूरिया खाद गुणवत्तापूर्वक होती है। प्राइवेट खादों का कोई भरोसा नहीं है। गेहूं की सिंचाई कर चुके थे इसलिए उन्हें प्राइवेट दुकानदार से 10 बोरी यूरिया खाद 50 रुपया प्रति बोरी अधिक के हिसाब से लेनी पड़ी।

गंगापुर के ग्राम प्रधान लखवीर सिंह का कहना है कि सहकारी समिति पर यूरिया खाद 266.50 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से मिल जाती थी, चूंकि अब समिति पर खाद ही नहीं है तो प्राइवेट दुकानदार से 300 रुपया प्रति बोरी के हिसाब से खाद खरीदकर गेहूं की फसल में डाली है, ऐसे में उत्तम खाद खेेत में पड़ने का उन्हें विश्वास नहीं है।

ग्राम उमरिया के सुनील सिंह बताते हैं कि वह हमेशा से गेहूं की सिंचाई करने के एक दिन पहले ही खाद डालते रहे हैं पर इस बार खाद ही नहीं मिली तो पहला पानी लगा दिया गया। अब सोमवार को प्राइवेट दुकानदार से खाद खरीदकर डालेंगे।

जिले में यूरिया खाद की कमी है। 30 मीट्रिक टन यूरिया खाद के लिए एक सप्ताह पहले चेक जमा किया था। अब रेक लगने पर ही यूरिया खाद उपलब्ध होगी। तभी किसानों को खाद मिल पाएगी।
- अमित तिवारी, सचिव, अमीरनगर साधन सहकारी समिति
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