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लेडी डॉक्टर नहीं थीं, जच्चा-बच्चा की मौत
अमर उजाला ब्यूरो बिजुआ।
Updated Thu, 26 May 2016 11:29 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जननी सुरक्षा योजना की खुल गई कलई
बिजुआ में दो महिला डाक्टर पर दोनों जिला महिला अस्पताल से अटैच
सीएमओ बोले, कम हैं लेडी डॉक्टर, हर सीएचसी में नहीं कर सकते तैनात
एक तरफ सरकार जननी सुरक्षा योजना में करोड़ों रुपये खर्च कर जच्चा बच्चा को स्वस्थ जिंदगी देने का ढिंढोरा पीट रही है लेकिन हकीकत में लखीमपुर खीरी जिले के बिजुआ सीएचसी के संसाधन इस योजना का मखौल उड़ा रहे हैं। बुधवार को यहां महिला डॉक्टर न होने के कारण जच्चा और बच्चा की मौत हो गई। अभी कुछ दिनों पहले ही यहां मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराया गया था।
सीएमओ जिले में महिला डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर हर सीएचसी में उनकी तैनाती न होने की मजबूरी जता रहे हैं जबकि इसी सीएचसी में तैनात दो महिला डॉक्टरों को जिला महिला अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया है। इनकी संबद्धता के पीछे भी डॉक्टरों की कमी बताई जा रही है।
अंबारा गांव के राम किशोर बुधवार को अपनी गर्भवती पत्नी लक्ष्मी को सुबह नौ बजे बिजुआ सीएचसी लेकर आए। स्टाफ नर्सों ने उन्हें भर्ती कर लिया। दोपहर करीब दो बजे लक्ष्मी ने बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हो गया। महिला डॉक्टर के न होने से लक्ष्मी की हालत बिगड़ने लगी। इसी बीच नवजात ने दम तोड़ दिया। इसके बाद स्टॉफ नर्स ने लक्ष्मी की हालत गंभीर होने का हवाला देते हुए उन्हें जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस मंगाने में समय लगने के कारण राम किशोर लक्ष्मी को अपने मित्र की कार से लखीमपुर ले जाने लगे। वह अभी सीएचसी से बाहर ही निकले थे कि लक्ष्मी की सांसें भी थम गईं। इसके बाद राम किशोर लक्ष्मी को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अगर सीएचसी पर महिला डॉक्टर होतीं तो शायद दोनों को बचाया जा सकता था।
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दो महिला डॉक्टर चार साल से जिले में अटैच
सीएचसी पर अप्रैल 2012 से डॉ. यामिनी एवं डॉ. अंजलि वर्मा की तैनाती है। डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर दोनों को वर्ष 2012 से ही जिला महिला अस्पताल से संबद्ध रखा गया है। एक डॉक्टर के परिवार का शहर में एक निजी नर्सिंग होम भी है। पहले भी कई बार दोनों महिला डॉक्टरों की मूल स्थान पर तैनाती की मांग की जा चुकी है। शासन को भी इसकी शिकायत दी जा चुकी है लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस मामले में विधायक विनय तिवारी सीएमओ के अलावा प्रदेश के चिकित्सा मंत्री को भी पत्र भेज चुके हैं लेकिन हालात नहीं बदले।
लक्ष्मी को क्रिटिकल पोजीशन के चलते रेफर कर दिया गया था। यहां पर महिला डॉक्टर न होने से कई बार हालात बिगड़ चुके हैं। जच्चा-बच्चा की मौत की सूचना मिलते ही उसकी विधिक लिखा पढ़ी कर रिपोर्ट बनाई जाएगी।
- डॉ. प्रवीन निगम, कार्यवाहक प्रभारी सीएचसी बिजुआ
महिला डाक्टरों की कमी है इसलिए सभी सीएचसी पर महिला डॉक्टर नहीं तैनात की जा सकती हैं। हालांकि वहां एएनएम और स्टाफ नर्स प्रशिक्षित हैं। वह प्रसव कराती हैं। जिला महिला अस्पताल में भी डॉक्टरों की कमी है इसलिए दोनों महिला डॉक्टरों को अटैच किया गया है।
- डा. अरुण कुमार, सीएमओ
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बिजुआ में दो महिला डाक्टर पर दोनों जिला महिला अस्पताल से अटैच
सीएमओ बोले, कम हैं लेडी डॉक्टर, हर सीएचसी में नहीं कर सकते तैनात
एक तरफ सरकार जननी सुरक्षा योजना में करोड़ों रुपये खर्च कर जच्चा बच्चा को स्वस्थ जिंदगी देने का ढिंढोरा पीट रही है लेकिन हकीकत में लखीमपुर खीरी जिले के बिजुआ सीएचसी के संसाधन इस योजना का मखौल उड़ा रहे हैं। बुधवार को यहां महिला डॉक्टर न होने के कारण जच्चा और बच्चा की मौत हो गई। अभी कुछ दिनों पहले ही यहां मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराया गया था।
सीएमओ जिले में महिला डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर हर सीएचसी में उनकी तैनाती न होने की मजबूरी जता रहे हैं जबकि इसी सीएचसी में तैनात दो महिला डॉक्टरों को जिला महिला अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया है। इनकी संबद्धता के पीछे भी डॉक्टरों की कमी बताई जा रही है।
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अंबारा गांव के राम किशोर बुधवार को अपनी गर्भवती पत्नी लक्ष्मी को सुबह नौ बजे बिजुआ सीएचसी लेकर आए। स्टाफ नर्सों ने उन्हें भर्ती कर लिया। दोपहर करीब दो बजे लक्ष्मी ने बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हो गया। महिला डॉक्टर के न होने से लक्ष्मी की हालत बिगड़ने लगी। इसी बीच नवजात ने दम तोड़ दिया। इसके बाद स्टॉफ नर्स ने लक्ष्मी की हालत गंभीर होने का हवाला देते हुए उन्हें जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस मंगाने में समय लगने के कारण राम किशोर लक्ष्मी को अपने मित्र की कार से लखीमपुर ले जाने लगे। वह अभी सीएचसी से बाहर ही निकले थे कि लक्ष्मी की सांसें भी थम गईं। इसके बाद राम किशोर लक्ष्मी को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अगर सीएचसी पर महिला डॉक्टर होतीं तो शायद दोनों को बचाया जा सकता था।
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दो महिला डॉक्टर चार साल से जिले में अटैच
सीएचसी पर अप्रैल 2012 से डॉ. यामिनी एवं डॉ. अंजलि वर्मा की तैनाती है। डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर दोनों को वर्ष 2012 से ही जिला महिला अस्पताल से संबद्ध रखा गया है। एक डॉक्टर के परिवार का शहर में एक निजी नर्सिंग होम भी है। पहले भी कई बार दोनों महिला डॉक्टरों की मूल स्थान पर तैनाती की मांग की जा चुकी है। शासन को भी इसकी शिकायत दी जा चुकी है लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस मामले में विधायक विनय तिवारी सीएमओ के अलावा प्रदेश के चिकित्सा मंत्री को भी पत्र भेज चुके हैं लेकिन हालात नहीं बदले।
लक्ष्मी को क्रिटिकल पोजीशन के चलते रेफर कर दिया गया था। यहां पर महिला डॉक्टर न होने से कई बार हालात बिगड़ चुके हैं। जच्चा-बच्चा की मौत की सूचना मिलते ही उसकी विधिक लिखा पढ़ी कर रिपोर्ट बनाई जाएगी।
- डॉ. प्रवीन निगम, कार्यवाहक प्रभारी सीएचसी बिजुआ
महिला डाक्टरों की कमी है इसलिए सभी सीएचसी पर महिला डॉक्टर नहीं तैनात की जा सकती हैं। हालांकि वहां एएनएम और स्टाफ नर्स प्रशिक्षित हैं। वह प्रसव कराती हैं। जिला महिला अस्पताल में भी डॉक्टरों की कमी है इसलिए दोनों महिला डॉक्टरों को अटैच किया गया है।
- डा. अरुण कुमार, सीएमओ