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Lakhimpur Kheri News: ब्रिटिश तानाशाही की गवाही देता है चपरतला गेस्ट हाउस
Thu, 14 Aug 2025 12:14 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:14 AM IST
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मैगलगंज क्षेत्र के चपरतला स्थित ब्रिटिश हुकूमत का बनवाया हुआ गेस्ट हाउस का भवन। संवाद
- फोटो : वीडियो ग्रैब
मैगलगंज। लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर गोमती नदी के किनारे बसे चपरतला गांव में स्थित पुरानी कोठी आज भी इतिहास के पन्नों में अपनी कहानी समेटे हुए है।
वर्ष 1857 में हुए गदर के दौरान ब्रिटिश हुकूमत इसे गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल करते थे। वे यहां से जिला खीरी समेत आसपास के चार जिलों पर नजर रखते थे।
जिले के इतिहासकार रामपाल सिंह बताते हैं कि गदर थमने के बाद भी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत रुकने का नाम नहीं ले रही थी। अंग्रेजों ने रणनीतिक दृष्टि से यह गेस्ट हाउस बनवाया, जिसकी लोकेशन चारों जिलों से समान दूरी पर थी। यहां से अंग्रेज अफसर सीतापुर, शाहजहांपुर, हरदोई और लखीमपुर जिलों पर एक साथ निगरानी करते थे।
ब्रिटिश अधिकारियों ने अपने ठहरने और प्रशासनिक कार्यों के लिए इसका निर्माण कराया था। उस समय यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह नेपाल सीमा के करीब था और अवध क्षेत्र में ब्रिटिश शासन को मजबूत करने में सहायक था। आजादी के बाद भी अफसर और नेता यहां आकर ठहरते थे, लेकिन समय के साथ इसकी चमक फीकी पड़ गई। संवाद
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वर्ष 1857 में हुए गदर के दौरान ब्रिटिश हुकूमत इसे गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल करते थे। वे यहां से जिला खीरी समेत आसपास के चार जिलों पर नजर रखते थे।
जिले के इतिहासकार रामपाल सिंह बताते हैं कि गदर थमने के बाद भी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत रुकने का नाम नहीं ले रही थी। अंग्रेजों ने रणनीतिक दृष्टि से यह गेस्ट हाउस बनवाया, जिसकी लोकेशन चारों जिलों से समान दूरी पर थी। यहां से अंग्रेज अफसर सीतापुर, शाहजहांपुर, हरदोई और लखीमपुर जिलों पर एक साथ निगरानी करते थे।
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ब्रिटिश अधिकारियों ने अपने ठहरने और प्रशासनिक कार्यों के लिए इसका निर्माण कराया था। उस समय यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह नेपाल सीमा के करीब था और अवध क्षेत्र में ब्रिटिश शासन को मजबूत करने में सहायक था। आजादी के बाद भी अफसर और नेता यहां आकर ठहरते थे, लेकिन समय के साथ इसकी चमक फीकी पड़ गई। संवाद
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