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Lakhimpur Kheri News: चैत्र नवरात्र आज से, अश्व पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
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फरधान। आज से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इस बार चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा अश्व अर्थात घोड़े पर सवार होकर आएंगी। शास्त्रों में मां दुर्गा के अश्व पर आने को गंभीर माना जाता है। देवकली तीर्थ स्थल के महंत ज्योतिषाचार्य प्रमोद महाराज ने बताया कि भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा जब घोड़े पर सवार होकर आती हैं तो प्राकृतिक आपदा और युद्ध की आशंका रहती।
नवरात्र का समापन 17 अप्रैल बुधवार को होगा। माता रानी हाथी पर प्रस्थान करेंगी। यह शुभता का द्योतक हैं। अच्छी बारिश, खुशहाली और तरक्की का शुभ मिलता है। नवरात्र आदि शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व है। मां दुर्गा की उपासना के लिए यह नौ दिन बेहद खास होते हैं। इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।
घट स्थापना पहला शुभ मुहूर्त
नौ अप्रैल मंगलवार, प्रतिपदा तिथि
सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त
मध्यान्ह 11:36 बजे से 12:24 बजे तक।
घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त
सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 03 बजकर 47 मिनट तक
घटस्थापना की विधि
महंत प्रमोद दीक्षित ने बताया कि मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्त धान्य बोएं। अब उसके ऊपर कलश में जल भरकर रखें। कलश के ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें। आम या अशोक के पत्तों को कलश के ऊपर रखें। नारियल में कलावा लपेटें। इसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के मुख और पत्तों के मध्य में रखें। घटस्थापना के बाद मां दुर्गा का आह्वान करें।
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नवरात्र का समापन 17 अप्रैल बुधवार को होगा। माता रानी हाथी पर प्रस्थान करेंगी। यह शुभता का द्योतक हैं। अच्छी बारिश, खुशहाली और तरक्की का शुभ मिलता है। नवरात्र आदि शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व है। मां दुर्गा की उपासना के लिए यह नौ दिन बेहद खास होते हैं। इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।
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घट स्थापना पहला शुभ मुहूर्त
नौ अप्रैल मंगलवार, प्रतिपदा तिथि
सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त
मध्यान्ह 11:36 बजे से 12:24 बजे तक।
घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त
सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 03 बजकर 47 मिनट तक
घटस्थापना की विधि
महंत प्रमोद दीक्षित ने बताया कि मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्त धान्य बोएं। अब उसके ऊपर कलश में जल भरकर रखें। कलश के ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें। आम या अशोक के पत्तों को कलश के ऊपर रखें। नारियल में कलावा लपेटें। इसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के मुख और पत्तों के मध्य में रखें। घटस्थापना के बाद मां दुर्गा का आह्वान करें।
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