फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Can not successful kamdhenu Dairy Plan

सफल नहीं हो पा रही कामधेनु डेयरी योजना

Mon, 22 Jun 2015 07:39 PM IST
लखीमपुर खीरी।
लखीमपुर खीरी। Updated Mon, 22 Jun 2015 07:39 PM IST
विज्ञापन
Can not successful kamdhenu Dairy Plan
 दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजनाएं शुरू की गईं लेकिन जिले में इन्हें सफलता नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि कई बार विभाग को इसके लिए आवेदन निकालने पड़े हैं पर तमाम प्रयासों के बावजूद विभाग लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर पा रहा है।
विज्ञापन

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और किसानों को रोजगार देने के उद्देश्य से शासन ने कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजनाएं शुरू कीं। योजनाओं का जो स्वरूप है उसके अनुसार कामधेनु डेयरी इकाई की स्थापना के लिए 1.20 करोड़ तथा मिनी कामधेनु डेयरी इकाई की स्थापना के लिए 52 लाख रुपये लागत रखी गई है। पशु पालन विभाग ने जिले के लोगाें से आवेदन मांगे थे। योजना के तहत लागत की 25 प्रतिशत धनराशि उद्यमी को स्वयं जमा करनी थी तथा शेष 75 प्रतिशत के लिए बैंक से ऋण लेना था। सुचारू रूप से ऋण की मूलधन की आदायगी होते रहने पर ब्याज की अदायगी पशु पालन विभाग को करनी थी। पशुपालन विभाग ने जिले में पांच कामधेनु और 30 मिनी कामधेनु डेयरी स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। कामधेनु डेयरी योजना में सिर्फ चार लोगों का ऋण स्वीकृत हो पाया, इसमें भी दो इकाई स्थापित हो सकीं। इसी प्रकार मिनी कामधेनु डेयरी में 22 आवेदकों का ऋण स्वीकृत हुआ लेकिन अब तक केवल 13 इकाइयां ही स्थापित हो सकी हैं।
विज्ञापन


फिर बढ़ी आवेदन की तिथि
कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजना के लिए विभाग ने लक्ष्य पूरा करने के लिए फिर आवेदन मांगे, लेकिन आवेदन नहीं आए। विभाग ने इसके लिए फिर आवेदन की तिथि बढ़ा दी है। अब इच्छुक उद्यमी 25 जून तक आवेदन कर सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या हैं दिक्कतें
जिले में कामधेनु डेयरी की लागत 1.20 करोड़ तथा मिनी कामधेनु डेयरी की लागत लगभग 52 लाख है। इसमें छोटे किसान आगे आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसके लिए कामधेनु में लगभग 25 लाख तथा मिनी कामधेनु में 13 लाख रुपये लाभार्थी को मार्जिन मनी के रूप में जमा करने होते हैं यह धनराशि छोटे और मझोले किसानों के लिए जुटा पाना दिक्कत का काम है। इसके अलावा बैंकों से ऋण प्राप्त कर पाना भी किसानों के लिए आसान बात नहीं है। इस सबके अलावा इतनी बड़ी योजना के लिए अन्य संसाधन जुटाने में भी किसानों को दिक्कत होती है। यही कारण है कि विभाग को आवेदक नहीं मिल रहे हैं।


पूरा हो जाएगा लक्ष्य
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.एसपी सिंह ने बताया कि बड़ा प्रोजेक्ट होने के कारण किसान हिम्मत नहीं कर पाते। फिर भी उम्मीद है कि इस बार लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed