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जग्गा घाट के पास टूटा बंधा
अमर उजाला ब्यूरो पलियाकलां।
Updated Mon, 14 Aug 2017 11:18 PM IST
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डर
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रामीणों ने बोरियों में मिट्टी भरकर पानी के प्रवाह को रोका
आखिर जिसका डर ग्रामीणों को सता रहा था वहीं हुआ। परवतिया घाट से लोहरा घाट तक बना बंधा जग्गा घाट के पास से टूट गया। ग्रामीणों ने काफी प्रयास करके बोरियों में मिट्टी भरकर पानी के प्रवाह को रोक दिया है। हालांकि कि इसके बावजूद रिसाव हो रहा है। बंधा टूटने से आसपास कई इलाकों में पानी भर गया।
परवतिया घाट से लोहरा घाट तक लगभग चार किलोमीटर लंबा बंधा बना हुआ है। यह बंधा कई सालों से काफी जर्जर हालत में था। कई बार इसके मरम्मत के लिए मलिनियां प्रधान प्रतिनिधि रिंकू सहित ग्रामीण शिकायती पत्र विभागीय अधिकारियों को दे चुके हैं। बावजूद इसके बरसात से पूर्व इसका मरम्मत कराने की विभागीय अधिकारियों ने जहमत नहीं उठाई। नतीजन सोमवार को नदी का जल स्तर बढ़ने जर्जर बंधा टूटा गया। इससे ग्रामीणों में भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। एकजुट होकर ग्रामीणों ने बोरियों में मिट्टी भरकर पानी को रोकने का प्रयास किया।
बीते दिनों इस क्षतिग्रस्त बंधे अमर उजाला में प्रमुखता से खबर छपी तो तहसील प्रशासन जागा और बंधे का निरीक्षण किया। तहसीलदार ने नाव से बंधे का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद बंधे का मरम्मत कराने की कोई पहल नहीं की गई। हालांकि समय रहते ही ग्रामीणों ने एक बार फिर से एकजुट हो करके पानी के प्रवाह को रोक दिया है।
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आखिर जिसका डर ग्रामीणों को सता रहा था वहीं हुआ। परवतिया घाट से लोहरा घाट तक बना बंधा जग्गा घाट के पास से टूट गया। ग्रामीणों ने काफी प्रयास करके बोरियों में मिट्टी भरकर पानी के प्रवाह को रोक दिया है। हालांकि कि इसके बावजूद रिसाव हो रहा है। बंधा टूटने से आसपास कई इलाकों में पानी भर गया।
परवतिया घाट से लोहरा घाट तक लगभग चार किलोमीटर लंबा बंधा बना हुआ है। यह बंधा कई सालों से काफी जर्जर हालत में था। कई बार इसके मरम्मत के लिए मलिनियां प्रधान प्रतिनिधि रिंकू सहित ग्रामीण शिकायती पत्र विभागीय अधिकारियों को दे चुके हैं। बावजूद इसके बरसात से पूर्व इसका मरम्मत कराने की विभागीय अधिकारियों ने जहमत नहीं उठाई। नतीजन सोमवार को नदी का जल स्तर बढ़ने जर्जर बंधा टूटा गया। इससे ग्रामीणों में भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। एकजुट होकर ग्रामीणों ने बोरियों में मिट्टी भरकर पानी को रोकने का प्रयास किया।
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बीते दिनों इस क्षतिग्रस्त बंधे अमर उजाला में प्रमुखता से खबर छपी तो तहसील प्रशासन जागा और बंधे का निरीक्षण किया। तहसीलदार ने नाव से बंधे का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद बंधे का मरम्मत कराने की कोई पहल नहीं की गई। हालांकि समय रहते ही ग्रामीणों ने एक बार फिर से एकजुट हो करके पानी के प्रवाह को रोक दिया है।
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