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नहीं रुक रही कालाबाजारी, 10 रुपये वाला ई स्टांप पड़ता है तीस रुपये में
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लखीमपुर खीरी। स्टांप पेपर की किल्लत को देखते हुए सरकार ने ई स्टांप की व्यवस्था शुरू की। मकसद था कि लोगों को फायदा पहुंचेगा, लेकिन अब भी दस रुपये वाला ई स्टांप तीस रुपये में और 50 वाला 70 रुपये में पड़ रहा है। वहीं सरकारी खजाने से मिलने वाले दस रुपये के स्टांप पेपर पर भी बीस रुपये वसूले जा रहे हैं, जो ई-स्टांप की व्यवस्था शुरू होने से पहले पांच-दस अतिरिक्त देकर मिल जाया करता था।
पंचायत चुनाव की तारीखें तय होती देख स्टांप की फर्जी किल्लत दिखाने का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय चुनावों के दौरान स्टांप पेपर की बढ़ी मांग और अच्छी कीमत मिलने की संभावना पर ही जोर आजमाइश शुरू हो गई है। स्टांप पेपर की कालाबाजारी करने वालों ने कोषागार कर्मियों से भी सांठ-गांठ कर रखी है, जिसके चलते कुछ चुनिंदा स्टांप वेंडर्स को ही मुंहमांगी मात्रा में स्टांप पेपर मिल रहे हैं, जबकि अन्य को स्टांप पेपर्स की कमी बताकर मांगी गई संख्या में स्टांप पेपर्स नहीं दिए जा रहे हैं।
कुछ जगह ही बन पाते हैं ई स्टांप
कचहरी में चंद केंद्रों पर ही ई स्टांप की व्यवस्था है, इस तरह दस रुपये वाले स्टांप पेपर के लिए 30 रुपये तो पचास रुपये वाले स्टांप पेपर के लिए 70 और एक सौ रुपये वाले स्टांप पेपर के लिए 120 रुपये की वसूली की जा रही है।
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हो चुका है आंदोलन भी, सौंपा गया था डीएम को ज्ञापन
स्टांप पेपर की किल्लत दिखाकर बीते साल स्टांप पेपर की कालाबाजारी शुरू हुई थी, तब मानवाधिकार सुरक्षा समिति के संयोजक अजय कुमार पांडेय ने साथी अधिवक्ताओं के साथ डीएम को ज्ञापन सौंपा था, इसके बाद कालाबाजारी पर कुछ रोक लगी मगर छह-सात महीने बीतने के बाद फिर कालाबाजारी का दौर शुरू हो चुका है। दस रुपये के स्टांप के बदले बीस रुपये की रकम चुकानी पड़ रही है।
आम आदमी से जुड़ा है
दस रुपये का स्टांप
वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ बताते हैं कि दस रुपये का स्टांप पेपर शपथ पत्र बनाने में प्रयुक्त होने के कारण यह स्टांप पेपर आम आदमी से जुुड़ा हुआ है, जिसकी किल्लत दिखाकर कालाबाजारी चल रही है। तय कीमत से 10-15 रुपये की अधिक वसूली की शिकायत करने से लोग बचते हैं।
होगी प्रशासन से वार्ता
जिला अधिवक्ता संघ के महामंत्री अजय कुमार पांडेय ने कहा कि स्टांप पेपर की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोषागार कर्मी सहित कई स्टांप वेंडर्स चिह्नित किए जा चुके हैं। कालाबाजारी पर रोक न लगी तो परिणाम गंभीर होंगे।
लोकप्रिय नही हैं ई स्टांप
तहसील लखीमपुर में वकालत करने वाले अधिवक्ता कमल पांडेय बताते हैं ई स्टांप पेपर आम जनमानस के बीच लोकप्रिय नहीं है। सरकारी छापेखाने से छपने वाले स्टांप पेपर का कागज अच्छा होता है, लिहाजा अभिलेख सालों तक सुरक्षित रहते हैं, जबकि ई स्टांप साधारण कागज पर प्रिंट होने के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं है।
शिकायत मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई
पेपर की पर्याप्त उपलब्धता के लिए वरिष्ठ कोषाधिकारी को निर्देशित किया जा चुका है, वैकल्पिक व्यवस्था में ई स्टांप पेपर को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। फिर भी अगर कहीं कोई गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
अरुण कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व
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पंचायत चुनाव की तारीखें तय होती देख स्टांप की फर्जी किल्लत दिखाने का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय चुनावों के दौरान स्टांप पेपर की बढ़ी मांग और अच्छी कीमत मिलने की संभावना पर ही जोर आजमाइश शुरू हो गई है। स्टांप पेपर की कालाबाजारी करने वालों ने कोषागार कर्मियों से भी सांठ-गांठ कर रखी है, जिसके चलते कुछ चुनिंदा स्टांप वेंडर्स को ही मुंहमांगी मात्रा में स्टांप पेपर मिल रहे हैं, जबकि अन्य को स्टांप पेपर्स की कमी बताकर मांगी गई संख्या में स्टांप पेपर्स नहीं दिए जा रहे हैं।
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कुछ जगह ही बन पाते हैं ई स्टांप
कचहरी में चंद केंद्रों पर ही ई स्टांप की व्यवस्था है, इस तरह दस रुपये वाले स्टांप पेपर के लिए 30 रुपये तो पचास रुपये वाले स्टांप पेपर के लिए 70 और एक सौ रुपये वाले स्टांप पेपर के लिए 120 रुपये की वसूली की जा रही है।
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हो चुका है आंदोलन भी, सौंपा गया था डीएम को ज्ञापन
स्टांप पेपर की किल्लत दिखाकर बीते साल स्टांप पेपर की कालाबाजारी शुरू हुई थी, तब मानवाधिकार सुरक्षा समिति के संयोजक अजय कुमार पांडेय ने साथी अधिवक्ताओं के साथ डीएम को ज्ञापन सौंपा था, इसके बाद कालाबाजारी पर कुछ रोक लगी मगर छह-सात महीने बीतने के बाद फिर कालाबाजारी का दौर शुरू हो चुका है। दस रुपये के स्टांप के बदले बीस रुपये की रकम चुकानी पड़ रही है।
आम आदमी से जुड़ा है
दस रुपये का स्टांप
वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ बताते हैं कि दस रुपये का स्टांप पेपर शपथ पत्र बनाने में प्रयुक्त होने के कारण यह स्टांप पेपर आम आदमी से जुुड़ा हुआ है, जिसकी किल्लत दिखाकर कालाबाजारी चल रही है। तय कीमत से 10-15 रुपये की अधिक वसूली की शिकायत करने से लोग बचते हैं।
होगी प्रशासन से वार्ता
जिला अधिवक्ता संघ के महामंत्री अजय कुमार पांडेय ने कहा कि स्टांप पेपर की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोषागार कर्मी सहित कई स्टांप वेंडर्स चिह्नित किए जा चुके हैं। कालाबाजारी पर रोक न लगी तो परिणाम गंभीर होंगे।
लोकप्रिय नही हैं ई स्टांप
तहसील लखीमपुर में वकालत करने वाले अधिवक्ता कमल पांडेय बताते हैं ई स्टांप पेपर आम जनमानस के बीच लोकप्रिय नहीं है। सरकारी छापेखाने से छपने वाले स्टांप पेपर का कागज अच्छा होता है, लिहाजा अभिलेख सालों तक सुरक्षित रहते हैं, जबकि ई स्टांप साधारण कागज पर प्रिंट होने के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं है।
शिकायत मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई
पेपर की पर्याप्त उपलब्धता के लिए वरिष्ठ कोषाधिकारी को निर्देशित किया जा चुका है, वैकल्पिक व्यवस्था में ई स्टांप पेपर को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। फिर भी अगर कहीं कोई गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
अरुण कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व