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भदईपुरवा में काम शुरू पर उमेश्ानगर नहीं आया याद
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 24 Jul 2015 10:27 PM IST
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धौरहरा तहसील में बह रही घाघरा नदी के कटान से खेत और मकानों की बर्बादी और शासन प्रशासन से नाउम्मीद होकर भदईपुरवा के 36 पुरुष-महिलाएं और उनके 12 बच्चों ने नदी में उतरकर जल समाधि लेने की चेतावनी दी तो प्रशासन इस गांव पर मेहरबान हो गया। अधिकारियों ने गुरुवार को कटान की रोकथाम के लिए आश्वासन दिया था, जिस पर शुक्रवार को काम शुरू हो गया और मुआवजे के लिए लेखपाल ने नए सिरे से जांच शुरू कर दी। उधर तहसील निघासन में भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना नदी के कटान से प्रभावित हो रहा उमेशनगर शुक्रवार को भी उपेक्षित रहा। इस ओर न तो किसी जनप्रतिनिधि की नजर जा रही है और न ही अधिकारियों की, इससे यहां के लोगों में मायूसी है। अपने हाथों आशियाना तोड़ रहे लोगों ने मुआवजे के लिए प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन भेजा है।
डीएम किंजल सिंह ने बताया कि धौरहरा तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी के कटान से भदईपुरवा के पास हो रहे नुकसान से बचाव के लिए निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। इसके अलावा दो अन्य स्थानों पर बचाव कार्य प्रगति पर है। पात्र लोगों को मुआवजा दिलाने के लिए प्रशासन कटिबद्ध है। उमेशनगर में अभी ठोकर आदि बनाने का काम संभव नहीं है, फिलहाल बचाव कार्य के निर्देश बाढ़ खंड को दिए गए हैं।
...और शुरू हो गया कटान की रोकथाम का काम
ईसानगर। घाघरा नदी के कटान से सबसे ज्यादा भदईपुरवा गांव प्रभावित है। यहां पिछले 11 दिनों से नदी कटान कर रही है। गांव के लोग प्रशासन से पहले फसलों का नुकसान होने और अब कटान से तबाह होने का मुआवजा मांग रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई तो गुरुवार को गांव वालों का सब्र जवाब दे गया और वे अपने बच्चों के साथ नदी के मझधार में जाकर खड़े हो गए। ग्रामीणों ने मुआवजा नहीं तो जलसमाधि लेने की धमकी दी। आखिर प्रशासनिक अमला पहुंचा और कटान की रोकथाम से लेकर पात्र अभ्यर्थियों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसी क्रम में शुक्रवार को सिंचाई विभाग ने कटान वाले स्थल पर बांस से कैरेट बनवाकर उसमें बालू भरकर बोरियां डलवाकर ठोकर बनवाने का काम शुरू कर दिया। इससे गांव वालों ने राहत की सांस ली। उधर एसडीएम धौरहरा ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव के निर्देश पर राजस्व टीम ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर कटान से हुए नुकसान का जायजा लिया और पात्रों की सूची बनाई।
इन लोगों के नुकसान का किया आंकलन
नदी की मझधार में खड़े होकर जलसमाधि की चेतावनी देने वाले गब्बर, लालाराम, मंसूर, शत्रोहन, सलीम, शहाबुद्दीन, इकरार, आकिब, नईम, वसीम, रशीद, सद्दाम, विजय कुमार, विजय प्रकाश, वजाहुद्दीन, जब्बार, मुबारक, कमालू, राजेश, इलियास, ताहिर, सिराज, बलराम सहित 36 लोगों के नुकसान का आंकलन किया गया। राजस्व टीम ने बताया कि वह अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपेंगे।
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विरोध पर बोरियों में भरी गई बालू
ईसानगर। घाघरा नदी के कटान की रोकथाम के लिए बनाई जाने वाली ठोकर के लिए सिंचाई विभाग के कर्मचारी बोरियों में मिट्टी भराने लगे। भदईपुरवा के ग्रामीणों ने बोरियों में मिट्टी भरते देखा तो विरोध किया और काम रुकवा दिया। इसी बीच तहसील अधिकारियों के पहुंचने पर उन्होंने पूरी बात बताई, जिस पर सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने बोरियों में बालू भरानी शुरू की। कर्मचारियों ने बताया कि नदी पार से नाव में भरकर बालू लानी पड़ रही है।
कटान से तबाही, आशियाना तोड़ रहे उमेशनगर के लोग
तिकुनियां/बेलरायां। बार्डर पर मोहाना नदी के कटान के चलते करीब 60 घरों वाला गांव उमेशनगर प्रभावित है। गांव के 20 घर कटने के बाद करीब 40 घर अभी नदी के निशाने पर हैं। सिंचाई विभाग ने सर्वे के बाद भी कटान से रोकथाम को कोई काम शुरू नहीं किया है। उधर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सुधि न लेने पर लोगों ने प्रदर्शन कर डीएम को पत्र भेजकर कटान की रोकथाम करने और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
सूरतनगर गांव के पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा, मन्नीलाल, सुरेश कुमार जुगेश, राकेश, गोपीचंग, रमेशकुमार ने बताया कि घर व जमीन कटने के बाद वे लोग रिश्तेदारी में शरण लिए हैं। वहीं उमेशनगर के दूधनाथ, बेचूलाल, जयनरायन, पूर्णमासी सहित 40 लोगों के घर नदी के निशाने पर हैं। ग्रामीण अपने आशियाने उजाड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। मौके पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों की लहलहाती धान और गन्ने की फसल नदी में समा जाने से रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
कभी था फार्म अब तो हैं भूमिहीन
ग्राम पंचायत सूरतनगर के मजरा गांव उमेशनगर के वकील विश्वनाथ त्रिपाठी, पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा पूर्व प्रधान रामकरन, रामवृक्ष आदि के पास कभी 50 से सौ एकड़ जमीन थी आज वे भूमिहीन हो गए हैं।
खतरे में है ऐतिहासिक कौड़ियाला गुरुद्वारा
मोहाना नदी से करीब एक किलोमीटर पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा कौड़ियाला रह गया है। गुरुद्वारे के प्रबंधक बाबा काला सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग कटान रोकने के प्रति गंभीर नहीं है, जिसके चलते नदी तेजी से कटान करती हुई गुरुद्वारे की ओर बढ़ रही है।
कटान का उस्मानी ने लिया जायजा
निघासन। युवा कल्याण परिषद उपाध्यक्ष आरए उस्मानी ने बाढ़ से कटे निघासन बैलहा समग्र गांव का जायजा लिया। उन्होंने एसडीएम से शीघ्र ही कटे रास्ते को चालू कराने का आदेश दिया।
डॉ. आरए उस्मानी अपने काफिले के साथ समग्र गांव बैलहा जाने वाले मार्ग पर पहुंचे। वहां पर शारदा नदी से निकले सोतिया नाले को देखा। किसान नेता नरेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि शारदा नदी से निकले सोतिया नाले पर बने रपटा पुल में कुंभी आदि उग आने के कारण पानी नहीं निकल पाता है। पिछले साल ग्रामीणों ने बमुश्किल नाव आदि से पुल में फंसे कचरे को निकाल कर पानी का निकास किया था। इस साल अधिक कूड़ा होने के कारण पानी ने दूसरा निकास बनाते हुए संपर्क मार्ग को काट दिया है। उस्मानी ने नाव पर बैठकर बाढ़ का जायजा लेते हुए एसडीएम पीके सिंह से कचरा साफ कराने तथा रास्ते को पटवाकर सही कराने का आदेश दिया। इस दौरान मंत्री प्रतिनिधि आफताब साहिल, विधायक प्रतिनिधि राकेश बाथम, ओपी जायसवाल, प्रधान अनवार खां, मुन्ना उस्मानी,चश्मुद्दीन अंसारी, महेश अग्रवाल, रजनीश कनौजिया, लालू आदि लोग मौजूद रहे।
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डीएम किंजल सिंह ने बताया कि धौरहरा तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी के कटान से भदईपुरवा के पास हो रहे नुकसान से बचाव के लिए निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। इसके अलावा दो अन्य स्थानों पर बचाव कार्य प्रगति पर है। पात्र लोगों को मुआवजा दिलाने के लिए प्रशासन कटिबद्ध है। उमेशनगर में अभी ठोकर आदि बनाने का काम संभव नहीं है, फिलहाल बचाव कार्य के निर्देश बाढ़ खंड को दिए गए हैं।
...और शुरू हो गया कटान की रोकथाम का काम
ईसानगर। घाघरा नदी के कटान से सबसे ज्यादा भदईपुरवा गांव प्रभावित है। यहां पिछले 11 दिनों से नदी कटान कर रही है। गांव के लोग प्रशासन से पहले फसलों का नुकसान होने और अब कटान से तबाह होने का मुआवजा मांग रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई तो गुरुवार को गांव वालों का सब्र जवाब दे गया और वे अपने बच्चों के साथ नदी के मझधार में जाकर खड़े हो गए। ग्रामीणों ने मुआवजा नहीं तो जलसमाधि लेने की धमकी दी। आखिर प्रशासनिक अमला पहुंचा और कटान की रोकथाम से लेकर पात्र अभ्यर्थियों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसी क्रम में शुक्रवार को सिंचाई विभाग ने कटान वाले स्थल पर बांस से कैरेट बनवाकर उसमें बालू भरकर बोरियां डलवाकर ठोकर बनवाने का काम शुरू कर दिया। इससे गांव वालों ने राहत की सांस ली। उधर एसडीएम धौरहरा ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव के निर्देश पर राजस्व टीम ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर कटान से हुए नुकसान का जायजा लिया और पात्रों की सूची बनाई।
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इन लोगों के नुकसान का किया आंकलन
नदी की मझधार में खड़े होकर जलसमाधि की चेतावनी देने वाले गब्बर, लालाराम, मंसूर, शत्रोहन, सलीम, शहाबुद्दीन, इकरार, आकिब, नईम, वसीम, रशीद, सद्दाम, विजय कुमार, विजय प्रकाश, वजाहुद्दीन, जब्बार, मुबारक, कमालू, राजेश, इलियास, ताहिर, सिराज, बलराम सहित 36 लोगों के नुकसान का आंकलन किया गया। राजस्व टीम ने बताया कि वह अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपेंगे।
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विरोध पर बोरियों में भरी गई बालू
ईसानगर। घाघरा नदी के कटान की रोकथाम के लिए बनाई जाने वाली ठोकर के लिए सिंचाई विभाग के कर्मचारी बोरियों में मिट्टी भराने लगे। भदईपुरवा के ग्रामीणों ने बोरियों में मिट्टी भरते देखा तो विरोध किया और काम रुकवा दिया। इसी बीच तहसील अधिकारियों के पहुंचने पर उन्होंने पूरी बात बताई, जिस पर सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने बोरियों में बालू भरानी शुरू की। कर्मचारियों ने बताया कि नदी पार से नाव में भरकर बालू लानी पड़ रही है।
कटान से तबाही, आशियाना तोड़ रहे उमेशनगर के लोग
तिकुनियां/बेलरायां। बार्डर पर मोहाना नदी के कटान के चलते करीब 60 घरों वाला गांव उमेशनगर प्रभावित है। गांव के 20 घर कटने के बाद करीब 40 घर अभी नदी के निशाने पर हैं। सिंचाई विभाग ने सर्वे के बाद भी कटान से रोकथाम को कोई काम शुरू नहीं किया है। उधर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सुधि न लेने पर लोगों ने प्रदर्शन कर डीएम को पत्र भेजकर कटान की रोकथाम करने और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
सूरतनगर गांव के पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा, मन्नीलाल, सुरेश कुमार जुगेश, राकेश, गोपीचंग, रमेशकुमार ने बताया कि घर व जमीन कटने के बाद वे लोग रिश्तेदारी में शरण लिए हैं। वहीं उमेशनगर के दूधनाथ, बेचूलाल, जयनरायन, पूर्णमासी सहित 40 लोगों के घर नदी के निशाने पर हैं। ग्रामीण अपने आशियाने उजाड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। मौके पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों की लहलहाती धान और गन्ने की फसल नदी में समा जाने से रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
कभी था फार्म अब तो हैं भूमिहीन
ग्राम पंचायत सूरतनगर के मजरा गांव उमेशनगर के वकील विश्वनाथ त्रिपाठी, पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा पूर्व प्रधान रामकरन, रामवृक्ष आदि के पास कभी 50 से सौ एकड़ जमीन थी आज वे भूमिहीन हो गए हैं।
खतरे में है ऐतिहासिक कौड़ियाला गुरुद्वारा
मोहाना नदी से करीब एक किलोमीटर पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा कौड़ियाला रह गया है। गुरुद्वारे के प्रबंधक बाबा काला सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग कटान रोकने के प्रति गंभीर नहीं है, जिसके चलते नदी तेजी से कटान करती हुई गुरुद्वारे की ओर बढ़ रही है।
कटान का उस्मानी ने लिया जायजा
निघासन। युवा कल्याण परिषद उपाध्यक्ष आरए उस्मानी ने बाढ़ से कटे निघासन बैलहा समग्र गांव का जायजा लिया। उन्होंने एसडीएम से शीघ्र ही कटे रास्ते को चालू कराने का आदेश दिया।
डॉ. आरए उस्मानी अपने काफिले के साथ समग्र गांव बैलहा जाने वाले मार्ग पर पहुंचे। वहां पर शारदा नदी से निकले सोतिया नाले को देखा। किसान नेता नरेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि शारदा नदी से निकले सोतिया नाले पर बने रपटा पुल में कुंभी आदि उग आने के कारण पानी नहीं निकल पाता है। पिछले साल ग्रामीणों ने बमुश्किल नाव आदि से पुल में फंसे कचरे को निकाल कर पानी का निकास किया था। इस साल अधिक कूड़ा होने के कारण पानी ने दूसरा निकास बनाते हुए संपर्क मार्ग को काट दिया है। उस्मानी ने नाव पर बैठकर बाढ़ का जायजा लेते हुए एसडीएम पीके सिंह से कचरा साफ कराने तथा रास्ते को पटवाकर सही कराने का आदेश दिया। इस दौरान मंत्री प्रतिनिधि आफताब साहिल, विधायक प्रतिनिधि राकेश बाथम, ओपी जायसवाल, प्रधान अनवार खां, मुन्ना उस्मानी,चश्मुद्दीन अंसारी, महेश अग्रवाल, रजनीश कनौजिया, लालू आदि लोग मौजूद रहे।