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Lakhimpur Kheri News: अव्यवस्थाओं का काढ़ा पी रहे आयुर्वेदिक अस्पताल
Thu, 08 Oct 2026 11:00 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:00 PM IST
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सिंगाही के आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर लटकता ताला। संवाद
लखीमपुर खीरी। आयुर्वेदिक इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को कई जगह इलाज से पहले ही अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। कहीं डॉक्टर नहीं मिलते तो कहीं दवा बांटने के लिए फार्मासिस्ट नहीं हैं।
किसी अस्पताल की छत जर्जर है तो कहीं बारिश में पानी टपक रहा है। जिले के 36 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की पड़ताल में चिकित्सा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां मरीजों से लेकर स्टाफ तक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
जिले में 36 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं। इनके लिए 38 चिकित्सकों के पद होने चाहिए, लेकिन 33 डॉक्टरों के सहारे व्यवस्था चल रही है। भीखमपुर, बांकेगंज, भीरा और सकेथू के अस्पतालों में चिकित्सक की तैनाती ही नहीं है।
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फार्मासिस्ट की स्थिति इससे भी खराब है। 36 अस्पतालों में सिर्फ नीमगांव, भीखमपुर, भीरा घासी, लल्लुआ और जलालपुर में फार्मासिस्ट तैनात हैं। इन पांच में से दो जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में दवा वितरण का जिम्मा वार्ड बाॅय के कंधों पर है। 72 चौकीदार/वार्ड बाॅय होने चाहिए, लेकिन महज 35 से काम चलाया जा रहा है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय राजापुर में बृहस्पतिवार को इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों को लौटना पड़ा। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने बताया कि चिकित्सक विकास खंड परिसर में लगे कैंप में गए हैं। इसलिए इलाज के लिए अगले दिन आना पड़ेगा। इस अस्पताल में प्रतिदिन करीब 70-80 मरीजों की ओपीडी होती है।
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अस्पताल में बताया गया कि चिकित्सक कैंप में गए हैं। इसलिए वह आज नहीं मिल पाएंगे। अब पुराने पर्चे पर ही लिखी दवा लेकर जा रहे हैं।
-इंदर कुमार, छाउछ
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एलर्जी से परेशानी हो गई है। रात में खुजली और होंठ फूल गए हैं। दवा लेने आए थे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। कहा गया है कि अब कल आना। मजबूरन फिर आना पड़ेगा।
-सूरज प्रसाद, राजापुर
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जर्जर हालत में है खीरी कस्बे का अस्पताल
खीरी टाउन। कस्बे की पीएचसी में आयुर्वेद, होम्योपैथ और एलोपैथ अस्पताल संचालित हैं। यहां दो कक्ष जर्जर हालत में हैं। दरवाजे-खिड़कियां टूट चुकी हैं। मुख्य गेट भी टूटा है। चहारदीवारी के नीचे से रास्ता खुला होने के कारण अस्पताल परिसर में चोर-उचक्कों और नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। पीएचसी पर 70-100 मरीज आते हैं। संवाद
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पानी और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं
मोहम्मदी। कस्बे का आयुर्वेदिक अस्पताल किराये के भवन में चल रहा है। जर्जर भवन में बारिश के दौरान पानी टपकता है। चिकित्सक और स्टाफ के लिए पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। संवाद
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35 साल से जर्जर भवन में अस्पताल, सिंगाही में ताला
निघासन। रमियाबेहड़ के खरवाहिया गांव का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल करीब 35 वर्षों से पूर्व प्रधान के किराये के कमरे में चल रहा है। भवन जर्जर हालत में है। वहीं सिंगाही कस्बे के आयुर्वेदिक अस्पताल में बृहस्पतिवार को ताला लटकता मिला। संवाद
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एक डॉक्टर के पास तीन अस्पतालों का चार्ज
तिकुनिया। बॉर्डर के ग्राम बनवीरपुर में आयुर्वेदिक अस्पताल करीब 30 साल से किराये के घर में संचालित है। यहां डॉ. नवनीत वर्मा तैनात हैं। उनके पास मैलानी और भीरा अस्पताल का भी चार्ज है। ऐसे में वह प्रतिदिन इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। संवाद
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कीचड़ से होकर अस्पताल पहुंच रहे मरीज
महेवागंज। आयुर्वेदिक चिकित्सालय सुंदरवल तक पहुंचने के लिए मरीजों को जलभराव और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल की जर्जर छत टपक रही है। बीते दिनों हाईवोल्टेज आने से अस्पताल के पांचों पंखे फुंक गए। शौचालय का दरवाजा टूटा है और मरीजों के लिए नल भी नहीं है। डॉक्टर ने निजी खर्च से वाटर कूलर लगाया है। संवाद
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रैन बसेरे के आधे भवन में चल रहा अस्पताल
गोला गोकर्णनाथ। वर्ष 1987 में नगर को 25 बेड का अस्पताल मिला था। करीब एक दशक तक तीर्थ जाने वाले मार्ग पर किराये के भवन में संचालित होने के बाद 2004 से 19 दिसंबर 2024 तक नगर पालिका परिषद की कृपा पात्र में गोकर्ण तीर्थ तट स्थित महादेवा धर्मशाला भवन में अस्पताल चला। कॉरिडोर निर्माण होने पर अब इसे नगर पालिका परिषद के त्रिलोक गिरि मंदिर परिसर स्थित रैन बसेरे के आधे भवन में संचालित किया जा रहा है। संवाद
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तकियापुरवा के आयुर्वेदिक अस्पताल में दवाओं का संकट
बेलरायां। तकियापुरवा के आयुर्वेदिक अस्पताल में खद्रादि गुटखा, खदरारिस्ट, चित्रकारी गुटका, अणु तेल सहित 11 दवाओं का एक साल से संकट है। इलाज के लिए कुल 51 तरह की दवाएं होनी चाहिए। स्टाफ की कमी, परिसर में जलभराव और जर्जर भवन से मरीज और तीमारदारों को भी दिक्कतें हो रही हैं। संवाद
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शासन से जर्जर अस्पतालों की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी। स्टाफ के लिए समय-समय पर पत्राचार किया जाता है। दवाओं का संकट जिले में नहीं है। अगर कहीं ऐसी बात है तो उसे दिखवाया जाएगा।
-डॉ. सुमंत कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी
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किसी अस्पताल की छत जर्जर है तो कहीं बारिश में पानी टपक रहा है। जिले के 36 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की पड़ताल में चिकित्सा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां मरीजों से लेकर स्टाफ तक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
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जिले में 36 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं। इनके लिए 38 चिकित्सकों के पद होने चाहिए, लेकिन 33 डॉक्टरों के सहारे व्यवस्था चल रही है। भीखमपुर, बांकेगंज, भीरा और सकेथू के अस्पतालों में चिकित्सक की तैनाती ही नहीं है।
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फार्मासिस्ट की स्थिति इससे भी खराब है। 36 अस्पतालों में सिर्फ नीमगांव, भीखमपुर, भीरा घासी, लल्लुआ और जलालपुर में फार्मासिस्ट तैनात हैं। इन पांच में से दो जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में दवा वितरण का जिम्मा वार्ड बाॅय के कंधों पर है। 72 चौकीदार/वार्ड बाॅय होने चाहिए, लेकिन महज 35 से काम चलाया जा रहा है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय राजापुर में बृहस्पतिवार को इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों को लौटना पड़ा। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने बताया कि चिकित्सक विकास खंड परिसर में लगे कैंप में गए हैं। इसलिए इलाज के लिए अगले दिन आना पड़ेगा। इस अस्पताल में प्रतिदिन करीब 70-80 मरीजों की ओपीडी होती है।
अस्पताल में बताया गया कि चिकित्सक कैंप में गए हैं। इसलिए वह आज नहीं मिल पाएंगे। अब पुराने पर्चे पर ही लिखी दवा लेकर जा रहे हैं।
-इंदर कुमार, छाउछ
एलर्जी से परेशानी हो गई है। रात में खुजली और होंठ फूल गए हैं। दवा लेने आए थे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। कहा गया है कि अब कल आना। मजबूरन फिर आना पड़ेगा।
-सूरज प्रसाद, राजापुर
जर्जर हालत में है खीरी कस्बे का अस्पताल
खीरी टाउन। कस्बे की पीएचसी में आयुर्वेद, होम्योपैथ और एलोपैथ अस्पताल संचालित हैं। यहां दो कक्ष जर्जर हालत में हैं। दरवाजे-खिड़कियां टूट चुकी हैं। मुख्य गेट भी टूटा है। चहारदीवारी के नीचे से रास्ता खुला होने के कारण अस्पताल परिसर में चोर-उचक्कों और नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। पीएचसी पर 70-100 मरीज आते हैं। संवाद
पानी और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं
मोहम्मदी। कस्बे का आयुर्वेदिक अस्पताल किराये के भवन में चल रहा है। जर्जर भवन में बारिश के दौरान पानी टपकता है। चिकित्सक और स्टाफ के लिए पीने के पानी और शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। संवाद
35 साल से जर्जर भवन में अस्पताल, सिंगाही में ताला
निघासन। रमियाबेहड़ के खरवाहिया गांव का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल करीब 35 वर्षों से पूर्व प्रधान के किराये के कमरे में चल रहा है। भवन जर्जर हालत में है। वहीं सिंगाही कस्बे के आयुर्वेदिक अस्पताल में बृहस्पतिवार को ताला लटकता मिला। संवाद
एक डॉक्टर के पास तीन अस्पतालों का चार्ज
तिकुनिया। बॉर्डर के ग्राम बनवीरपुर में आयुर्वेदिक अस्पताल करीब 30 साल से किराये के घर में संचालित है। यहां डॉ. नवनीत वर्मा तैनात हैं। उनके पास मैलानी और भीरा अस्पताल का भी चार्ज है। ऐसे में वह प्रतिदिन इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। संवाद
कीचड़ से होकर अस्पताल पहुंच रहे मरीज
महेवागंज। आयुर्वेदिक चिकित्सालय सुंदरवल तक पहुंचने के लिए मरीजों को जलभराव और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल की जर्जर छत टपक रही है। बीते दिनों हाईवोल्टेज आने से अस्पताल के पांचों पंखे फुंक गए। शौचालय का दरवाजा टूटा है और मरीजों के लिए नल भी नहीं है। डॉक्टर ने निजी खर्च से वाटर कूलर लगाया है। संवाद
रैन बसेरे के आधे भवन में चल रहा अस्पताल
गोला गोकर्णनाथ। वर्ष 1987 में नगर को 25 बेड का अस्पताल मिला था। करीब एक दशक तक तीर्थ जाने वाले मार्ग पर किराये के भवन में संचालित होने के बाद 2004 से 19 दिसंबर 2024 तक नगर पालिका परिषद की कृपा पात्र में गोकर्ण तीर्थ तट स्थित महादेवा धर्मशाला भवन में अस्पताल चला। कॉरिडोर निर्माण होने पर अब इसे नगर पालिका परिषद के त्रिलोक गिरि मंदिर परिसर स्थित रैन बसेरे के आधे भवन में संचालित किया जा रहा है। संवाद
तकियापुरवा के आयुर्वेदिक अस्पताल में दवाओं का संकट
बेलरायां। तकियापुरवा के आयुर्वेदिक अस्पताल में खद्रादि गुटखा, खदरारिस्ट, चित्रकारी गुटका, अणु तेल सहित 11 दवाओं का एक साल से संकट है। इलाज के लिए कुल 51 तरह की दवाएं होनी चाहिए। स्टाफ की कमी, परिसर में जलभराव और जर्जर भवन से मरीज और तीमारदारों को भी दिक्कतें हो रही हैं। संवाद
शासन से जर्जर अस्पतालों की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी। स्टाफ के लिए समय-समय पर पत्राचार किया जाता है। दवाओं का संकट जिले में नहीं है। अगर कहीं ऐसी बात है तो उसे दिखवाया जाएगा।
-डॉ. सुमंत कुमार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी

सिंगाही के आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर लटकता ताला। संवाद

सिंगाही के आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर लटकता ताला। संवाद

सिंगाही के आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर लटकता ताला। संवाद

सिंगाही के आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर लटकता ताला। संवाद