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ऑल इंडिया स्टैंडर्ड के मानक पूरा न करने पर 140 बस मालिकों को नोटिस
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लखीमपुर खीरी। ऑल इंडिया स्टैंडर्ड -119 (स्लीपर बसों के लिए) के मानकों को पूरा कराने के लिए एआरटीओ प्रशासन ने बस मालिकों को नोटिस जारी की है। नोटिस के माध्यम से 15 दिन का समय दिया गया है। निर्धारित समय में बसों में मानक के अनुरूप व्यवस्था नहीं करने पर एआरटीओ प्रशासन बसों की परमिट निरस्त करने की तैयारी में है। बता दें कि जनपद से दिल्ली समेत बड़े शहरों के लिए करीब 140 स्लीपर बसें संचालित हैं, जो ऑल इंडिया परमिट की हैं। ज्यादातर बसों में मानक के अनुसार यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए इंतजाम नहीं हैं। इससे दुर्घटना या आपात स्थिति में यात्रियों की जानमाल का नुकसान हो सकता है।
एआरटीओ प्रशासन बीके सिंह ने कहा है कि कुछ बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन प्रभारी मंत्री को झूठी शिकायत कर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि ऑल इंडिया स्टैंडर्ड-119 में निर्धारित मानकों को पूरा करने से छूट मिल जाए। उन्होंने बताया कि स्लीपर बसें दो तरह की हैं, जिनमें एक स्लीपर टियर में 30 यात्री सफर कर सकते हैैं। जबकि दूसरी तरह की स्लीपर संयुक्त व्यवस्था वाली बस में 15 स्लीपर और चालक समेत 33 सीट होती हैं। उन्होंने मानकों के बारे में बताया कि स्लीपर बसों में आपातकालीन गेट की लॉक को खोलने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। पीछे वाले टफेल ग्लास के पास हथौड़ी लगी होनी चाहिए, जिससे आपात स्थिति में ग्लास को तोड़कर यात्री बाहर निकल सकें। स्पीड कंट्रोल डिवाइस, प्रदूषण सर्टिफिकेट समेत अन्य तकनीकी जांच की जानी है। एआरटीओ ने बताया कि 21 जनवरी 2020 को परिवहन आयुक्त ने स्लीपर और ठेका बसों की तकनीकी जांच करने के आदेश दिए थे। इसलिए स्लीपर बस मालिकों को नोटिस के माध्यम से बसों में एआईएस 119 के मानक पूरे कराकर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मानकों के अभाव में 16 स्लीपर बसों की फिटनेस निरस्त की गई है।
140 स्लीपर बसों के मालिकों को नोटिस देकर एआईएस -119 के मानक के हिसाब से बसों में सुरक्षा व्यवस्था पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद बसों का निरीक्षण कर फिटनेस जारी होगा। इसमें कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। बिना मानक पूर्ण कराए बसों को सड़क पर संचालित करने से मना किया गया है। अन्यथा एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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बीके सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
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एआरटीओ प्रशासन बीके सिंह ने कहा है कि कुछ बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन प्रभारी मंत्री को झूठी शिकायत कर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि ऑल इंडिया स्टैंडर्ड-119 में निर्धारित मानकों को पूरा करने से छूट मिल जाए। उन्होंने बताया कि स्लीपर बसें दो तरह की हैं, जिनमें एक स्लीपर टियर में 30 यात्री सफर कर सकते हैैं। जबकि दूसरी तरह की स्लीपर संयुक्त व्यवस्था वाली बस में 15 स्लीपर और चालक समेत 33 सीट होती हैं। उन्होंने मानकों के बारे में बताया कि स्लीपर बसों में आपातकालीन गेट की लॉक को खोलने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। पीछे वाले टफेल ग्लास के पास हथौड़ी लगी होनी चाहिए, जिससे आपात स्थिति में ग्लास को तोड़कर यात्री बाहर निकल सकें। स्पीड कंट्रोल डिवाइस, प्रदूषण सर्टिफिकेट समेत अन्य तकनीकी जांच की जानी है। एआरटीओ ने बताया कि 21 जनवरी 2020 को परिवहन आयुक्त ने स्लीपर और ठेका बसों की तकनीकी जांच करने के आदेश दिए थे। इसलिए स्लीपर बस मालिकों को नोटिस के माध्यम से बसों में एआईएस 119 के मानक पूरे कराकर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मानकों के अभाव में 16 स्लीपर बसों की फिटनेस निरस्त की गई है।
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140 स्लीपर बसों के मालिकों को नोटिस देकर एआईएस -119 के मानक के हिसाब से बसों में सुरक्षा व्यवस्था पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद बसों का निरीक्षण कर फिटनेस जारी होगा। इसमें कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। बिना मानक पूर्ण कराए बसों को सड़क पर संचालित करने से मना किया गया है। अन्यथा एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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बीके सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन