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दशकों से नाले पर कब्जा मितौली के विकास में बना अड़ंगा
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नाले पर दुकानदार द्वारा किया कब्जा।
नाले पर अवैध निर्माण को तहसील प्रशासन दे रहा मूक सहमति
लखीमपुर खीरी। मितौली तहसील मुख्यालय समेत कई स्थानों पर अधिकारी अवैध अतिक्रमण हटाने में अब भी संकोच कर रहे हैं। अतिक्रमणकारियों के प्रभाव में आकर परियोजना में भी छेड़छाड़ कर बदलाव करने की कोशिश की जा रही है। मितौली में इसकी ताजा बानगी देखने को मिल रही है, जहां जिला पंचायत द्वारा पुरैना तालाब से निकले नाला के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है। नाले की शुरुआत में एक दुकानदार द्वारा किए गए कब्जे/अतिक्रमण को नहीं हटवाया गया है, जिससे तालाब के सौंदर्यीकरण के कार्य पर संकट के बादल छाने लगे हैं।
मितौली कस्बे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मार्ग पर स्थित पुरैना तालाब की पुलिया से निकले नाले के मुख्य मार्ग पर कुछ लोगों ने कब्जा करके पक्का निर्माण (दुकान) करा लिया था, जिससे नाले की सफाई न होने से बस्ती के नाले-नालियां चोक हो गए थे। सीएचसी के सामने गंदा पानी भरने की समस्या से लोग कई साल से जूझ रहे थे।
नाले की सफाई के साथ ही साइफन तक नाले का पक्का निर्माण कार्य कुछ दिन पहले जिला पंचायत ने शुरू कराया है तो जिला पंचायत के एएमए जागन सिंह ने नाले पर कब्जा करके बनाई गई दुकान के अवैध हिस्से/अतिक्रमण को हटाने की मांग मितौली तहसील प्रशासन से की। इस पर एसडीएम विधेश कुमार मौके पर अतिक्रमण हटवाने के लिए गए भी, लेकिन वह बिना कार्रवाई ही लौट गए। इसके बाद सियासी दांवपेंच से अतिक्रमण हटाने का अभियान फुस्स हो गया और तहसील प्रशासन द्वारा अतिक्रमण किए गए नाले के निर्माण की जिम्मेदारी भी अतिक्रमणकारी दुकानदार को ही सौंप दी गई। वहीं कार्यदायी संस्था जिला पंचायत को दुकानदार के कब्जे वाले नाले का हिस्सा छोड़कर आगे से नाला बनाने के लिए कह दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि मितौली तहसील प्रशासन द्वारा अतिक्रमणकारी को नाले पर अवैध कब्जा बरकरार रखने की छूट जा रही है, जिससे नाले की समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पाएगा। इस कारण ताला के सौंदर्यीकरण की योजना को भी पलीता लग रहा है, क्योंकि बारिश सीजन में तालाब से जलनिकास की समस्या जस की तस बनी रहेगी।
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जिला पंचायत के जेई राजेश यादव ने बताया कि पुलिया के पास निकले नाले पर पक्का अतिक्रमण करके दुकान बनाई गई है, जिससे वहां पर दुकानदार द्वारा मानकविहीन ईंट से नाले का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि जिला पंचायत द्वारा करीब 240 मीटर लंबा व एक मीटर चौड़ा आरसीसी नाले का निर्माण कराया जा रहा है, जिस पर अनुमानित 35 लाख रुपये लागत आएगी।
मेन रोड के नाले पर भी कब्जा
लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर कस्बे में सड़क के दोनों किनारों पर 1300 मीटर व 900 मीटर आरसीसी नाले का निर्माण कराया गया है, जिससे बारिश सीजन में सड़क का पानी नाले में बह जाए। इसके उलट दुकानदारों ने नाले पर अतिक्रमण करते हुए मिट्टी से पाटकर पूरी तरह बंद कर दिया है। इसे अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए तहसील प्रशासन ने सुधि नहीं ली है और न ही अभी तक कोई अभियान चलाया गया।
तालाब के इनलेट-आउटलेट के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी
जिला पंचायत ने हाल में तीन हेक्टेअर से अधिक क्षेत्रफल वाले पुरैना तालाब को सौंदर्यीकरण योजना में शामिल किया है, जिसके लिए जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ. नरेंद्र सिंह व एमएमए जागन सिंह ने कुछ दिन पहले तालाब का निरीक्षण किया था। अभी तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है, बल्कि काम को टालने पर विचार किया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि नाले पर अतिक्रमण के चलते तालाब के पानी को निकालने में समस्या आएगी। पानी निकालने के बाद तालाब का इनलेट-आउटलेट सिस्टम बनाया जा सकेगा। तालाब की पुलिया के मेन निकास पर ही अवैध कब्जा है। जिला पंचायत के एएमए ने बताया कि तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए पहले अतिक्रमण हटाना जरूरी है, जिसके बाद ही कार्य प्रारंभ हो सकेगा।
अस्थायी अतिक्रमण को हटवाया गया है। स्थायी अतिक्रमण अभी नहीं हटवाया जा सका है। उन्होंने बताया कि पूर्व में तत्कालीन एसडीएम द्वारा धारा 133 के तहत दुकानदार के पक्ष में आदेश दिया गया है, जिसके अनुसार दुकानदार अपने हिस्से के नाले का निर्माण कराएगा। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा।
- विधेश कुमार, एसडीएम
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लखीमपुर खीरी। मितौली तहसील मुख्यालय समेत कई स्थानों पर अधिकारी अवैध अतिक्रमण हटाने में अब भी संकोच कर रहे हैं। अतिक्रमणकारियों के प्रभाव में आकर परियोजना में भी छेड़छाड़ कर बदलाव करने की कोशिश की जा रही है। मितौली में इसकी ताजा बानगी देखने को मिल रही है, जहां जिला पंचायत द्वारा पुरैना तालाब से निकले नाला के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है। नाले की शुरुआत में एक दुकानदार द्वारा किए गए कब्जे/अतिक्रमण को नहीं हटवाया गया है, जिससे तालाब के सौंदर्यीकरण के कार्य पर संकट के बादल छाने लगे हैं।
मितौली कस्बे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मार्ग पर स्थित पुरैना तालाब की पुलिया से निकले नाले के मुख्य मार्ग पर कुछ लोगों ने कब्जा करके पक्का निर्माण (दुकान) करा लिया था, जिससे नाले की सफाई न होने से बस्ती के नाले-नालियां चोक हो गए थे। सीएचसी के सामने गंदा पानी भरने की समस्या से लोग कई साल से जूझ रहे थे।
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नाले की सफाई के साथ ही साइफन तक नाले का पक्का निर्माण कार्य कुछ दिन पहले जिला पंचायत ने शुरू कराया है तो जिला पंचायत के एएमए जागन सिंह ने नाले पर कब्जा करके बनाई गई दुकान के अवैध हिस्से/अतिक्रमण को हटाने की मांग मितौली तहसील प्रशासन से की। इस पर एसडीएम विधेश कुमार मौके पर अतिक्रमण हटवाने के लिए गए भी, लेकिन वह बिना कार्रवाई ही लौट गए। इसके बाद सियासी दांवपेंच से अतिक्रमण हटाने का अभियान फुस्स हो गया और तहसील प्रशासन द्वारा अतिक्रमण किए गए नाले के निर्माण की जिम्मेदारी भी अतिक्रमणकारी दुकानदार को ही सौंप दी गई। वहीं कार्यदायी संस्था जिला पंचायत को दुकानदार के कब्जे वाले नाले का हिस्सा छोड़कर आगे से नाला बनाने के लिए कह दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि मितौली तहसील प्रशासन द्वारा अतिक्रमणकारी को नाले पर अवैध कब्जा बरकरार रखने की छूट जा रही है, जिससे नाले की समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पाएगा। इस कारण ताला के सौंदर्यीकरण की योजना को भी पलीता लग रहा है, क्योंकि बारिश सीजन में तालाब से जलनिकास की समस्या जस की तस बनी रहेगी।
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जिला पंचायत के जेई राजेश यादव ने बताया कि पुलिया के पास निकले नाले पर पक्का अतिक्रमण करके दुकान बनाई गई है, जिससे वहां पर दुकानदार द्वारा मानकविहीन ईंट से नाले का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि जिला पंचायत द्वारा करीब 240 मीटर लंबा व एक मीटर चौड़ा आरसीसी नाले का निर्माण कराया जा रहा है, जिस पर अनुमानित 35 लाख रुपये लागत आएगी।
मेन रोड के नाले पर भी कब्जा
लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर कस्बे में सड़क के दोनों किनारों पर 1300 मीटर व 900 मीटर आरसीसी नाले का निर्माण कराया गया है, जिससे बारिश सीजन में सड़क का पानी नाले में बह जाए। इसके उलट दुकानदारों ने नाले पर अतिक्रमण करते हुए मिट्टी से पाटकर पूरी तरह बंद कर दिया है। इसे अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए तहसील प्रशासन ने सुधि नहीं ली है और न ही अभी तक कोई अभियान चलाया गया।
तालाब के इनलेट-आउटलेट के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी
जिला पंचायत ने हाल में तीन हेक्टेअर से अधिक क्षेत्रफल वाले पुरैना तालाब को सौंदर्यीकरण योजना में शामिल किया है, जिसके लिए जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ. नरेंद्र सिंह व एमएमए जागन सिंह ने कुछ दिन पहले तालाब का निरीक्षण किया था। अभी तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है, बल्कि काम को टालने पर विचार किया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि नाले पर अतिक्रमण के चलते तालाब के पानी को निकालने में समस्या आएगी। पानी निकालने के बाद तालाब का इनलेट-आउटलेट सिस्टम बनाया जा सकेगा। तालाब की पुलिया के मेन निकास पर ही अवैध कब्जा है। जिला पंचायत के एएमए ने बताया कि तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए पहले अतिक्रमण हटाना जरूरी है, जिसके बाद ही कार्य प्रारंभ हो सकेगा।
अस्थायी अतिक्रमण को हटवाया गया है। स्थायी अतिक्रमण अभी नहीं हटवाया जा सका है। उन्होंने बताया कि पूर्व में तत्कालीन एसडीएम द्वारा धारा 133 के तहत दुकानदार के पक्ष में आदेश दिया गया है, जिसके अनुसार दुकानदार अपने हिस्से के नाले का निर्माण कराएगा। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा।
- विधेश कुमार, एसडीएम