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वेतन न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने ऐतिहासिक मंदिर में जड़ा ताला
अमर उजाला ब्यूरो सिंगाही।
Updated Wed, 02 Nov 2016 10:44 PM IST
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धरना प्रर्दशन
- फोटो : अमर उजाला
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प्राचीन काली मंदिर के 11 कर्मचारियों ने शुरू किया धरना प्रर्दशन
करीब सौ साल पुराने प्राचीन काली मंदिर के कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के विरोध में ताला जड़ दिया है। धरने पर बैठे कर्मियों ने दो दिनों से मंदिर में पूजा पाठ भी नहीं किया है। यह मंदिर सिंगाही महल में स्थित हैं। बेशकीमती मंदिर में 11 कर्मचारी तैनात हैं। सभी कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें छह माह से वेतन नहीं मिला है। मंदिर में ताला लगा होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कस्बे के सिंगाही राजघराने ने करीब सौ साल पहले काली माता मंदिर के साथ भैरव, दुुर्गा मंदिर समेत करीब नौ मंदिरों का निर्माण कराया था। इन मंदिरों की देखरेख के लिए दो पुजारी रमेश जोशी और मुनेश दीक्षित के अलावा मैनेजर इंद्रेश कुमार समेत 11 कर्मचारी लगाए गए थे। इंद्रेश ने बताया कि सभी लोगों का वेतन कस्बे के जिला सहकारी बैंक के खाते में प्रतिमाह आता था। वह लोग वर्षों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं। आरोप है कि करीब छह माह से 10 कर्मचारी और 18 माह से विनोद को वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने के कारण उनकी दिवाली भी फीकी रही। कर्मचारियों ने बताया कि वेतन न मिलने का कारण राजघराने में चला आ रहा आपसी विवाद बताया जाता है। उधर, राजघराने के अक्षय विक्रम शाह ने आरोपों को निराधार बताते हुए शीघ्र वेतन देने की बात कही है।
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करीब सौ साल पुराने प्राचीन काली मंदिर के कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के विरोध में ताला जड़ दिया है। धरने पर बैठे कर्मियों ने दो दिनों से मंदिर में पूजा पाठ भी नहीं किया है। यह मंदिर सिंगाही महल में स्थित हैं। बेशकीमती मंदिर में 11 कर्मचारी तैनात हैं। सभी कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें छह माह से वेतन नहीं मिला है। मंदिर में ताला लगा होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कस्बे के सिंगाही राजघराने ने करीब सौ साल पहले काली माता मंदिर के साथ भैरव, दुुर्गा मंदिर समेत करीब नौ मंदिरों का निर्माण कराया था। इन मंदिरों की देखरेख के लिए दो पुजारी रमेश जोशी और मुनेश दीक्षित के अलावा मैनेजर इंद्रेश कुमार समेत 11 कर्मचारी लगाए गए थे। इंद्रेश ने बताया कि सभी लोगों का वेतन कस्बे के जिला सहकारी बैंक के खाते में प्रतिमाह आता था। वह लोग वर्षों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं। आरोप है कि करीब छह माह से 10 कर्मचारी और 18 माह से विनोद को वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने के कारण उनकी दिवाली भी फीकी रही। कर्मचारियों ने बताया कि वेतन न मिलने का कारण राजघराने में चला आ रहा आपसी विवाद बताया जाता है। उधर, राजघराने के अक्षय विक्रम शाह ने आरोपों को निराधार बताते हुए शीघ्र वेतन देने की बात कही है।
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