हादसे में दो दोस्तों की मौत: अराजकतत्वों ने उकसाया... ग्रामीणों ने फूंक दी बस, पुलिस ने भीड़ को खदेड़ा
सीतापुर-लखीमपुर हाईवे पर मुड़ियाखेड़ा गांव के पास सोमवार शाम निजी बस की टक्कर से बाइक सवार दो दोस्तों की मौत हो गई थी। उससे गुस्साए ग्रामीणों ने पथराव कर बस को आग के हवाले कर दिया था।
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लखीमपुर खीरी में सीतापुर-लखीमपुर फोरलेन पर हादसे में दो दोस्तों गांव मुडियाखेड़ा निवासी इंद्रेश व अभिमन्यु की मौत के बाद बवाल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि ग्रामीणों के साथ भीड़ में कुछ अराजकतत्व भी शामिल हो गए। उन्हीं के बहकावे में आकर ग्रामीणों ने बस पर पथराव करते हुए आग लगा दी। बस जलने से अफरातफरी मच गई। इससे आवागमन बाधित हो गया।
सोमवार शाम को हुए हादसे में जो प्राइवेट बस लखनऊ से वापस आ रही थी, उसमें चालक-परिचालक के अलावा कोई यात्री सवार नहीं बताया जा रहा है। घटना होते ही चालक-परिचालक बस को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। घटना के बाद हाईवे के दोनों की ओर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा।सूचना पर पहुंची पुलिस को भीड़ को हटाने के लिए लाठियां फटकरानी पड़ीं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि बाइक सवार ही गलत दिशा में आ रहे थे। सामने से अचानक बाइक को आते देख चालक ने बस से अपना नियंत्रण खो दिया और हादसा हो गया। घटना में बाइक चकनाचूर हो गई।
घर से घूमने की बात कहकर निकले थे दोनों युवक
ग्रामीणों के अनुसार, अभिमन्यु और इंद्रेश परिजनों से घूमने की बात कहते हुए गांव से निकले थे। परिजनों को जब हादसे की सूचना मिली तो सभी घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों के एकत्र होने से हाईवे जाम हो गया। बताया जाता है कि इंद्रेश और अभिमन्यु दोनों अच्छे दोस्त थे। वह दोनों घूमने फिरने साथ ही जाते थे। वहीं, सीओ रमेश तिवारी और कोतवाली प्रभारी अंबर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने बमुश्किल स्थिति संभाली।
खाली थी बस, वरना होता बड़ा हादसा
घटना के दौरान बस पूरी तरह खाली थी। माना जा रहा था कि प्राइवेट बस ने सवारियों को कुछ दूर पहले ही उतार दिया था। खाली बस खड़ी करने के लिए चालक ले जा रहा था। बस अपने नियत स्थल पर पहुंचती, इससे पहले ही हादसा हो गया। लोगों का कहना था कि बस में अगर सवारियां होती तो पथराव और आगजनी की घटना के दौरान बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल सवारियां न होने की सूचना के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली।
अगर समय से पहुंचती एंबुलेंस तो बच जाती अभिमन्यु की जान
घटना के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीण और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि हादसे के तुरंत बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई थी। पुलिस तो कुछ देर में घटनास्थल पर पहुंच गई, जबकि एंबुलेंस करीब आधे घंटे तक नहीं पहुंच सकी थी। मृतक के परिजनों का कहना था कि अगर समय से अभिमन्यु को अस्पताल में भर्ती कराया जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद ही अभिमन्यु ने भी दम तोड़ दिया।