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अधिकतर एंबुलेंस खराब..कैसे लड़ी जाएगी कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से लड़ाई
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लखीमपुर खीरी। समय पर अस्पताल पहुंचाकर मरीजों की जान बचाने में लगी 108 व 102 एंबुलेंस खस्ताहाल हैं। कई एंबुलेंस निर्धारित करीब तीन लाख किलोमीटर पूरा करने के बावजूद मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में लगी हैं। इन हालात में यह रास्ते में खड़ी तक हो जाती है। ऐसे में दूसरी एंबुलेंस से मरीज अस्पताल पहुंचाए जाते हैं। बीमार एंबुलेंस से कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर का कैसे मुकाबला किया जाएगा इसका जवाब स्वास्थ्य अधिकारियों के पास भी नहीं है।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने हर स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अब तक जो दावे किए जा रहे थे, वह सब खोखले साबित हुए। न तो मरीजों को समय पर एंबुलेंस मिल सकी और न ही अस्पताल आने पर बेड एवं ऑक्सीजन।
दूसरी लहर अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हो पाई और तीसरी आने की आशंका जताई जाने लगी है। शासन से लेकर प्रशासन तक तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों में जुटा है। मगर, स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली एंबुलेंस सेवा का हाल बेहाल है। तमाम एंबुुलेंस निर्धारित किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। तो तमाम जुगाड़ के सहारे चल रहीं हैं। ऐसे में समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण तीमारदार निजी वाहन कर मरीज को अस्पताल लाने के लिए मजबूर होते हैं।
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चालकों के मुताबिक 40 फीसदी एंबुलेंस अनफिट
महिला अस्पताल से लेकर सीएचसी पर खड़ी एंबुलेंस के चालक बताते हैं कि करीब 40 फीसदी एंबुलेंस चलने के लिए फिट नहीं हैं। फिर भी जरूरतमंदों को अस्पताल पहुंचा रहीं हैं। नियमानुसार तीन लाख किलोमीटर ही एंबुलेंस चलनी चाहिए। मगर, पांच लाख किलोमीटर चलने के बाद भी मरीजों को ले जा रहीं हैं। कई बार मरीज ले जाते समय एंबुलेंस रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। तीमारदार हम लोगों पर हावी होते हैं। दूसरी एंबुलेंस से उन्हें भेजते हैं। समय पर सर्विस और ढंग से काम न होने के कारण रोजाना तकनीकी दिक्कत आती रहती हैं,
15 से 20 मिनट में मिलनी चाहिए एंबुलेंस
चालक बताते हैं कि नियमानुसार तीमारदार के फोन करने पर शहर क्षेत्र में एंबुलेंस को 15 से 20 और ग्रामीण क्षेत्र में 20-30 मिनट का समय लगना चाहिए। मगर, तकनीकी दिक्कतों के कारण 30 से 40 मिनट और कई बार इससे अधिक समय भी लग जाता है।
हर प्रकार के मरीज के लिए है फ्री
108 एवं 102 सेवा के प्रोग्राम मैनेजर बताते हैं कि एंबुलेंस सेवा हर मरीज के लिए मुफ्त है। सड़क दुर्घटना में घायल हो या फिर बुखार सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित। सभी को 108 पर फोन कर सुविधा का लाभ उठाना चाहिए। प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाना और उसके बाद जच्चा बच्चा को घर तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा है।
एंबुलेंस के लिए करीब तीन लाख किलोमीटर निर्धारित हैं। जो तय किलोमीटर पूरे कर चुकी हैं, उनकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है, जिससे इनकी जगह पर नई मिल सकें। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते एंबुलेंस के ईएमटी को ट्रेंड किया जा रहा है, जिससे विषम परिस्थिति में मरीजों के लिए प्राथमिक उपचार मिल सके। -प्रवीन द्विवेदी, प्रोग्राम मैनेजर
किलोमीटर को लेकर एंबुलेंस का निर्धारित मानक क्या है। इसकी जानकारी नहीं है। यदि तीन लाख किलोमीटर निर्धारित है तो प्रोग्राम मैनेजर को इस तरह की एंबुलेंस चिह्नित कर बदलवाने के लिए निर्देशित किया जाएगा। -डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने हर स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अब तक जो दावे किए जा रहे थे, वह सब खोखले साबित हुए। न तो मरीजों को समय पर एंबुलेंस मिल सकी और न ही अस्पताल आने पर बेड एवं ऑक्सीजन।
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दूसरी लहर अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हो पाई और तीसरी आने की आशंका जताई जाने लगी है। शासन से लेकर प्रशासन तक तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों में जुटा है। मगर, स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली एंबुलेंस सेवा का हाल बेहाल है। तमाम एंबुुलेंस निर्धारित किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। तो तमाम जुगाड़ के सहारे चल रहीं हैं। ऐसे में समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण तीमारदार निजी वाहन कर मरीज को अस्पताल लाने के लिए मजबूर होते हैं।
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चालकों के मुताबिक 40 फीसदी एंबुलेंस अनफिट
महिला अस्पताल से लेकर सीएचसी पर खड़ी एंबुलेंस के चालक बताते हैं कि करीब 40 फीसदी एंबुलेंस चलने के लिए फिट नहीं हैं। फिर भी जरूरतमंदों को अस्पताल पहुंचा रहीं हैं। नियमानुसार तीन लाख किलोमीटर ही एंबुलेंस चलनी चाहिए। मगर, पांच लाख किलोमीटर चलने के बाद भी मरीजों को ले जा रहीं हैं। कई बार मरीज ले जाते समय एंबुलेंस रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। तीमारदार हम लोगों पर हावी होते हैं। दूसरी एंबुलेंस से उन्हें भेजते हैं। समय पर सर्विस और ढंग से काम न होने के कारण रोजाना तकनीकी दिक्कत आती रहती हैं,
15 से 20 मिनट में मिलनी चाहिए एंबुलेंस
चालक बताते हैं कि नियमानुसार तीमारदार के फोन करने पर शहर क्षेत्र में एंबुलेंस को 15 से 20 और ग्रामीण क्षेत्र में 20-30 मिनट का समय लगना चाहिए। मगर, तकनीकी दिक्कतों के कारण 30 से 40 मिनट और कई बार इससे अधिक समय भी लग जाता है।
हर प्रकार के मरीज के लिए है फ्री
108 एवं 102 सेवा के प्रोग्राम मैनेजर बताते हैं कि एंबुलेंस सेवा हर मरीज के लिए मुफ्त है। सड़क दुर्घटना में घायल हो या फिर बुखार सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित। सभी को 108 पर फोन कर सुविधा का लाभ उठाना चाहिए। प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाना और उसके बाद जच्चा बच्चा को घर तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा है।
एंबुलेंस के लिए करीब तीन लाख किलोमीटर निर्धारित हैं। जो तय किलोमीटर पूरे कर चुकी हैं, उनकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है, जिससे इनकी जगह पर नई मिल सकें। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते एंबुलेंस के ईएमटी को ट्रेंड किया जा रहा है, जिससे विषम परिस्थिति में मरीजों के लिए प्राथमिक उपचार मिल सके। -प्रवीन द्विवेदी, प्रोग्राम मैनेजर
किलोमीटर को लेकर एंबुलेंस का निर्धारित मानक क्या है। इसकी जानकारी नहीं है। यदि तीन लाख किलोमीटर निर्धारित है तो प्रोग्राम मैनेजर को इस तरह की एंबुलेंस चिह्नित कर बदलवाने के लिए निर्देशित किया जाएगा। -डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ