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प्राइवेट चालकों के लिए मुसीबत बनी एंबुलेंस
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निजी चालक बोले, प्रशासन ने चाबी देने के बाद डीजल भरवाने तक के बारे में नहीं पूछा
अधिकतर एंबुलेंस महिला अस्पताल में हैं खड़ी, अपने साधनों से अस्पताल पहुंच रहे मरीज
लखीमपुर खीरी। जिला प्रशासन ने एंबुलेंस स्टाफ से चॉबी लेकर निजी वाहन चलाने वाले चालकों को भले ही दे रखी हो, लेकिन उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अधिकतर एंबुलेंस महिला अस्पताल में खड़ी हैं। वहीं गंभीर मरीज अपने साधनों से अस्पताल पहुंच रहे हैं। उधर, निजी चालकों का कहना है कि चाबी देने के बाद प्रशासन ने यह तक नहीं बताया कि एंबुलेंस में डीजल कौन भरवाएगा।
निजी चालकों का कहना है कि न तो उन्हें लोकेशन ट्रेस करना आता है और न ही ईएमटी हैं। ऐसेे में मरीज को रास्ते में कुछ हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। चालकों ने बताया कि न तो उन्हें यह बताया गया है कि कितना पैसा मिलेेगा और काम कितने घंटे करना है, क्योंकि पहले तो वे दिन में वाहन चलाते थे। रात में घर पर ही होते थे। मगर यहां तो 24 घंटे की ड्यूटी बताई जा रही है। इस तरह तो एंबुलेंस चलाना मुश्किल होगा।
गोला गोकर्णनाथ। शुक्रवार को गोला सीएचसी में एंबुलेंस संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे नगरा भीखमपुर निवासी आशीष कुमार, अनुराग कुमार, महेश वर्मा, बौठा निवासी दुर्गेश कुमार, करनपुर मुर्तिहा निवासी आशाराम प्रजापति, लखीमपुर निवासी राजेश कुमार और देवरिया निवासी सुनील ने बताया कि प्राइवेट ड्राइवरी करते थे, लेकिन सीएमओ ऑफिस में उनका डीएल, बैंक पासबुक, आधार कार्ड और शैक्षिक प्रमाणपत्र जमा करा लिए गए हैं और 450 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक दिहाड़ी मिलना मौखिक बताया गया है।
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तीन दिन ड्यूटी करते हो गए हैं। न तो कहीं रुकने का इंतजाम है और न ही बैठने का। विभाग ने एंबुलेंस की चाबी थमा देने के बाद हाल तक नहीं जाना है कि एंबुलेंस में तेल है कि नहीं। लोकेशन तक ही जानकारी नहीं है। न तो मोबाइल मिला। बस किसी तरह काम निपटा रहे हैं।
एंबुलेंस न मिलने पर निजी वाहन से पहुंचे जिला अस्पताल
गोला के भुसौरिया निवासी संगम सिंह शनिवार को घायल हो गए। पिता भारत सिंह इलाज के लिए गोला सीएचसी लेकर गए। प्राथमिक उपचार के बाद संगम सिंह को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। भारत सिंह काफी देर तक 108 पर कॉल करते रहे, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो निजी वाहन से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
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अधिकतर एंबुलेंस महिला अस्पताल में हैं खड़ी, अपने साधनों से अस्पताल पहुंच रहे मरीज
लखीमपुर खीरी। जिला प्रशासन ने एंबुलेंस स्टाफ से चॉबी लेकर निजी वाहन चलाने वाले चालकों को भले ही दे रखी हो, लेकिन उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अधिकतर एंबुलेंस महिला अस्पताल में खड़ी हैं। वहीं गंभीर मरीज अपने साधनों से अस्पताल पहुंच रहे हैं। उधर, निजी चालकों का कहना है कि चाबी देने के बाद प्रशासन ने यह तक नहीं बताया कि एंबुलेंस में डीजल कौन भरवाएगा।
निजी चालकों का कहना है कि न तो उन्हें लोकेशन ट्रेस करना आता है और न ही ईएमटी हैं। ऐसेे में मरीज को रास्ते में कुछ हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। चालकों ने बताया कि न तो उन्हें यह बताया गया है कि कितना पैसा मिलेेगा और काम कितने घंटे करना है, क्योंकि पहले तो वे दिन में वाहन चलाते थे। रात में घर पर ही होते थे। मगर यहां तो 24 घंटे की ड्यूटी बताई जा रही है। इस तरह तो एंबुलेंस चलाना मुश्किल होगा।
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गोला गोकर्णनाथ। शुक्रवार को गोला सीएचसी में एंबुलेंस संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे नगरा भीखमपुर निवासी आशीष कुमार, अनुराग कुमार, महेश वर्मा, बौठा निवासी दुर्गेश कुमार, करनपुर मुर्तिहा निवासी आशाराम प्रजापति, लखीमपुर निवासी राजेश कुमार और देवरिया निवासी सुनील ने बताया कि प्राइवेट ड्राइवरी करते थे, लेकिन सीएमओ ऑफिस में उनका डीएल, बैंक पासबुक, आधार कार्ड और शैक्षिक प्रमाणपत्र जमा करा लिए गए हैं और 450 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक दिहाड़ी मिलना मौखिक बताया गया है।
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तीन दिन ड्यूटी करते हो गए हैं। न तो कहीं रुकने का इंतजाम है और न ही बैठने का। विभाग ने एंबुलेंस की चाबी थमा देने के बाद हाल तक नहीं जाना है कि एंबुलेंस में तेल है कि नहीं। लोकेशन तक ही जानकारी नहीं है। न तो मोबाइल मिला। बस किसी तरह काम निपटा रहे हैं।
एंबुलेंस न मिलने पर निजी वाहन से पहुंचे जिला अस्पताल
गोला के भुसौरिया निवासी संगम सिंह शनिवार को घायल हो गए। पिता भारत सिंह इलाज के लिए गोला सीएचसी लेकर गए। प्राथमिक उपचार के बाद संगम सिंह को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। भारत सिंह काफी देर तक 108 पर कॉल करते रहे, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो निजी वाहन से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।