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Lakhimpur Kheri News: सब्जियों के बाद गांव से आने वाले दूधिया भी होने लगे दूर
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पलियाकलां। शारदा और सुहेली नदी के उफनाने से टापू बने पलिया शहर आने वाले रास्तों पर आवागमन थमने का असर सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ा है। पैकेट वाला दूध तो मिल जा रहा है, लेकिन गांव से आने वाले दूधिया भी बाढ़ के कारण दूर होने लगे हैं। सोमवार को कुछ संपर्क मार्गों पर आवागमन शुरू हुआ है।
मार्गों के बंद होने का सीधा असर रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान पर पड़ा है। बात अगर सब्जियों के दामों की करें तो मार्ग सही होने से पहले 20 रुपये किलो बिकने वाला आलू 35 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। प्याज की कीमत भी 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। टमाटर 20 रुपये से करीब 100-120 रुपये किलो तक बाजार में बिक रहा है।
भिंडी 20 से 60, परवल 40 से 100 और बैंगन की कीमत 15-20 रुपये से 40-50 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। इसके अलावा अन्य कई सब्जियां हैं, जिनके दामों में एकदम से मार्गों पर आवागमन गड़बड़ाने का असर पड़ा है। किराने का सामान भी महंगा हो गया है। इससे बुधवार व शनिवार को यहां पड़ने वाली साप्ताहिक बाजारों में भी रौनक कम हो गई है।
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इसके अलावा दूध के पैकेटों की तो बिक्री हो रही है, लेकिन फार्म और गांवों से आने वाला दूध यहां नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते दही, पनीर की किल्लत का सामना भी लोगों का करना पड़ रहा है।
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मार्गों के बंद होने का सीधा असर रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान पर पड़ा है। बात अगर सब्जियों के दामों की करें तो मार्ग सही होने से पहले 20 रुपये किलो बिकने वाला आलू 35 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। प्याज की कीमत भी 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। टमाटर 20 रुपये से करीब 100-120 रुपये किलो तक बाजार में बिक रहा है।
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भिंडी 20 से 60, परवल 40 से 100 और बैंगन की कीमत 15-20 रुपये से 40-50 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। इसके अलावा अन्य कई सब्जियां हैं, जिनके दामों में एकदम से मार्गों पर आवागमन गड़बड़ाने का असर पड़ा है। किराने का सामान भी महंगा हो गया है। इससे बुधवार व शनिवार को यहां पड़ने वाली साप्ताहिक बाजारों में भी रौनक कम हो गई है।
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इसके अलावा दूध के पैकेटों की तो बिक्री हो रही है, लेकिन फार्म और गांवों से आने वाला दूध यहां नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते दही, पनीर की किल्लत का सामना भी लोगों का करना पड़ रहा है।