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करोड़ों खर्च होने के बाद भी आबाद नहीं ट्रांसपोर्टनगर

Sun, 10 May 2015 10:57 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Sun, 10 May 2015 10:57 PM IST
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After spending millions not even manned Tronsportongr
सीमावर्ती क्षेत्र छाउछ में व्यापारियों के लिए अलग से ट्रांसपोर्टनगर बसाने को लेकर वर्ष 1995-96 में शुरू की गई कवायद प्रशासन और नगर पालिका की फाइलों में कैद होकर रह गई है। खास बात यह कि ट्रांसपोर्टनगर को आबाद करने के लिए लाइटिंग और पेयजल की व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद 20 साल में भी न तो ट्रांसपोर्टनगर आबाद हुआ और न ही अधिकारियों ने इसे आबाद करने की इच्छाशक्ति ही दिखाई। लिहाजा ट्रांसपोर्टनगर बसाने के लिए लगाए गए बिजली के खंभे, नलकूप आदि सालों से शोपीस बनकर रह गए हैं। आलम यह है कि निगरानी न होने के कारण चोरों ने तार, बल्ब, ट्यूबवेल के उपकरण आदि सामान चोरी कर ले गए हैं।
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गौरतलब है कि जब ट्रांसपोर्टनगर की नींव जाने लगी तो वहां 50 से अधिक लोगों को प्लाट आवंटन किया गया और बिजली लाइनें बिछाकर पानी के लिए नलकूप लगाया गया था। बीते सालों में ट्रांसपोर्टनगर बसाने को लेकर कई बार प्रशासन और शहर के व्यापारियों के बीच बैठकें भी हुईं, लेकिन नतीजा सिफर रहा। एक अधिकारी का कहना है कि ट्रांसपोर्टनगर को लेकर प्रशासन, नगर पालिका और व्यापारियों के बीच सामंजस्य का अभाव है। शुरुआती दिक्कत यह सामने आ है रही कि यहां पांच-छह ट्रांसपोर्ट्स को छोड़कर अन्य लोगों को फर्जी तरीके से प्लाट आवंटित कर दिए गए हैं। एक प्रमुख व्यापारी का कहना है कि प्रशासन और नगर पालिका शहर के ट्रांसपोर्ट्स को छाउछ में बसाने को लेकर कभी गंभीर नहीं हुआ, लिहाजा ट्रांसपोर्ट्स भी शहर को छोड़कर छाउछ में बसने को तैयार नहीं हुए।  
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50 से अधिक हैं ट्रांसपोर्ट कंपनियां  
व्यापारियों के मुताबिक, जिस समय शहर से अलग ट्रांसपोर्टनगर बसाने की कवायद शुरू की गई थी, तब 12 से 14 ही ट्रांसपोर्ट थे। मंशा थी कि ट्रांसपोर्ट पर आने वाले वाहन शहर के बाहर ही रहें। मौजूदा समय में ट्रांसपोर्ट्स की संख्या बढ़कर 50 हो गई है और ट्रांसपोर्ट्स के बड़े वाहन भी शहर में आकर आवागमन बाधित कर रहे हैं।
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जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल मिश्रा गुट राकेश मिश्रा ने बताया कि ट्रांसपोर्ट बसाने को लेकर नगर पालिका और प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। इनकी इच्छाशक्ति कमजोर होने के कारण कई वर्षों से ट्रांसपोर्टनगर सूना पड़ा है। मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण ट्रांसपोर्ट वहां नहीं जाना चाहते।
जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल कंछल गुट संजय अग्रवाल ने बताया कि ट्रांसपोर्टनगर बसाने के लिए जरूरी है कि प्रशासन, नगर पालिका और व्यापारियों के बीच सामंजस्य स्थापित हो। कई बार उद्योग बंधु की बैठकों में भी यह मुद्दा उठा, लेकिन अभी हालात व्यापारियों के अनुकूल नहीं बन पा रहे हैं।

अध्यक्ष जिला ट्रक आपरेटर यूनियन राजू राना ने बताया कि ट्रांसपोर्टनगर बसाया जाना चाहिए, इससे कोई इंकार नहीं कर रहा, लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब वाजिद रेट लिया जाए। वहां ट्रांसपोर्टनगर की वजह से सर्किल रेट से भी बढ़कर रेट मांगा जा रहा है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट नगर में कौन जाना चाहेगा।

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