फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   acident

दो नेताओं की बसों में थी होड़... दस को गंवानी पड़ी जान

Fri, 30 Sep 2022 01:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 01:00 AM IST
सार

डग्गामार बसों का धंधा रसूखदारों से जुड़ा है।जिसे खत्म करने के लिए एआरटीओ, टीएसआई, रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक सहित बस मालिकों के बीच लिखित समझौता हुआ, जो कागजों तक ही सीमित रहा।मौजूदा समय में लखीमपुर से गोला, लखनऊ एवं धौरहरा रूट पर सिर्फ रोडवेज बसें संचालित हो सकती हैं।

विज्ञापन
acident

विस्तार

लखीमपुर खीरी। डग्गामार बसों का धंधा रसूखदारों से जुड़ा है। इसी वजह से सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रही डग्गामार बसों पर कार्रवाई करने से अफसर कतराते हैं। ऐसा कोई रूट नहीं, जिस पर डग्गामार बसें फर्राटा न भर रही हों। बेखौफ बस चालक पुलिस चौकी के सामने से ही सवारियां बैठाते हैं। बुधवार को हुआ हादसा दो नेताओं की बसों के चालकों में आगे निकलने की होड़ का नतीजा था।
विज्ञापन

चार सितंबर को रोडवेज के अनुबंधित बस मालिकों ने इन पर कार्रवाई के लिए चक्का जाम किया था। जिसे खत्म करने के लिए एआरटीओ, टीएसआई, रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक सहित बस मालिकों के बीच लिखित समझौता हुआ, जो कागजों तक ही सीमित रहा। अनुबंधित बस मालिकों का कहना है कि यदि जिम्मेदार जरा सा भी संजीदा हो गए होते तो बुधवार को दस लोगों का जान गवांनी न पड़ती।
विज्ञापन

डग्गामारी में मोटा मुनाफा है। इसलिए जिले की हर रोड पर ऐसे वाहनों को दौड़ते देखा जा सकता है। इनका मालिका या तो कोई रसूखदार हैं या फिर सत्ता पक्ष से जुड़ा कोई नेता। यही कारण है कि जिले में करीब 150 से 200 डग्गामार बसें संचालित हो रही हैं। मामला हाईफाई होने की वजह से जिम्मेदार इन पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसी वजह से आए दिन इन बसों में सवार यात्रियों की जान पर तक बन आती हैं। बुधवार को धौरहरा से लखनऊ जा रही बस एक सत्ता पक्ष के नेता की थी तो उसके पीछे एक बसपा नेता की बस चल रही थी। एक दूसरे में आगे निकलने की लगी होड़ ने ही दो बच्चियों सहित दस लोगों को मौत की नींद सुला दिया।
जो रूट प्रतिबंधित, वहीं डग्गामारी
विभिन्न रूटों पर यात्रियों को लाने और ले जाने के लिए शासन की ओर से रूट निर्धारित किया जाता है। कुछ रूट केवल रोडवेज बसों के लिए और कुछ पर निजी एवं रोडवेज दोनो का संचालन हो सकता है। इसके लिए परमिट जारी किए जाते हैं। मौजूदा समय में लखीमपुर से गोला, लखनऊ एवं धौरहरा रूट पर सिर्फ रोडवेज बसें संचालित हो सकती हैं। जबकि लखीमपुर से निघासन, पलिया, मितौली, मोहम्मदी रूट पर दोनों तरह की बसों का संचालन हो सकता है। डग्गामारी ऐसे रूटों पर हैं, जहां पर रोडवेज के अलावा अन्य बसों का संचालन प्रतिबंधित है। इन रूट पर बस संचालक जिम्मेदारों से साठगांठ कर बसों का संचालन कर जगह जगह से सवारियां उतारते और बैठाते हैं।
यह हैं नियम
डग्गामारी करने वाले बसों के पास अमूमन आल यूपी और आल इंडिया परमिट होता है। नियम यह है कि इस तरह की बसों के संचालक एक जगह से सवारियां बुक करेंगे और दूसरे स्थान पर उन्हें उतारेंगे। न तो रास्ते में सवारियां बैठाएंगे और न उतारेंगे, लेकिन जिम्मेदारों की मिलीभगत से डग्गामार बसों के चालक सरकारी बस अड्डे के आसपास से लेकर सार्वजनिक स्थल यहां तक कि पुलिस चौकी के सामने से बेखौफ होकर सवारियों को पुकारकर बैठाते और उतारते हैं।
इन जगहों से सवारियां बैठा रही डग्गामार बसें
संकटा देवी चौराहा, रेलवे स्टेशन, राजापुर एवं एलआरपी चौकी के सामने
पकड़े जाने पर है जुर्माने का प्रावधान
आल इंडिया एवं इंटर स्टेट परमिट वाली डग्गामार बसों को अगर आरटीओ द्वारा पकड़ा जाता है तो दस हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया जाता है। वहीं परमिट न होने पर जुर्माने की राशि चालीस से पैंतालिस हजार रुपये तक वसूली जाती है।
‘डग्गामार बसों के चलने से रोडवेज बसों की आय प्रभावित हो रही है। इन पर अंकुश लगाने के लिए कई बार अनुबंधित बस मालिक हड़ताल तक कर चुके हैं। चार सितंबर को बैठक में लिखित समझौता हुआ। कुछ दिन तक एआरटीओ ने संयुक्त चेकिंग की लेकिन बाद में फिर से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। डग्गामार वाहनों से रोडवेज का अच्छी खासी चपत लग रही है।’
- जोगेंद्र सिंह, एआरएम परिवहन निगम लखीमपुर डिपो
‘लिखित समझौता होने के बाद कई बार चेकिंग कर 50 बसों पर कार्रवाई की। लखीमपुर से मोहम्मदी, निघासन, पलिया निजी बसों के लिए और लखनऊ, गोला एवं धौरहरा रूट रोडवेज के लिए है। जिस बस का एक्सीडेंट हुआ है, उसका कई बार चालान हुआ है। नोटिस भेजकर परमिट पर कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है। डग्गामार बस किसी भी हो, कार्रवाई अवश्य होगी।’

- रमेश कुमार चौबे, एआरटीओ प्रर्वतन
‘डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई के लिए कई बार हम लोगों ने चक्काजाम किया। चार सितंबर को एआरटीओ, टीएसआई के साथ लिखित रूप में समझौता हुआ था कि इन पर कार्रवाई होगी लेकिन कुछ नहीं हुआ। इन पर लगाम लगाने के लिए यूनियन द्वारा आरटीओ, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से लेकर जिला प्रशासन तक से निवेदन किया जा चुका है मगर कोई नहीं सुन रहा।’
- श्रवण गुप्ता, अध्यक्ष अनुबंधित बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन लखीमपुर डिपो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed