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कई परिवारों का सहारा छिना... धौरहरा में गम का सन्नाटा
सार
छोटे भाई ने बताया कपड़े लेने के लिए लखनऊ जा रहे थे।यह अपने पीछे तीन पुत्र और दो पुत्रों को छोड़ गए हैं। धौरहरा के मोहल्ला बाजार वार्ड निवासी 30 वर्षीय जितेंद्र कुमार रस्तोगी दीपावली में पटाखे की दुकान लगाने के लिए लखनऊ आतिशबाजी का सामान लेने जा रहे थे। अभी कुछ माह पहले इनकी मां जी का स्वर्गवास हो गया यह अपने भाइयों में दूसरे नंबर पर थे।ब्लॉक नकहा के कटकुसमा गांव निवासी 45 वर्षीय कौशल किशोर त्रिवेदी होमगार्ड है और धौरहरा कोतवाली में रात की ड्यूटी करते थे।
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विस्तार
धौरहरा। ऐरा पुल पर बस और मिनी ट्रक के टकराने से हुए भीषण हादसे में मरने वाले लोगों में सबसे ज्यादा लोग धौरहरा कस्बे हैं। इनमें कई मासूम बच्चे भी शामिल हैं। मृतकों में अधिकतर लोग कमजोर आर्थिक स्थिति वाले हैं, जो मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे थे। इनकी मौत से परिवार बेसहारा हो गया है। मृतक के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। बुधवार को इन परिवार के पड़ोसियों के यहां भी चूल्हा नहीं जला। पूरे कस्बे में इसी भीषण सड़क हादसे की चर्चा होती रही। लोगों की आंखें नम हैं।
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 35 वर्षीय सुरेंद्र चौरसिया पुत्र बदलू चौरसिया फतेपुर धौरहरा के निवासी थे मेहनत, मजदूरी के लिए अक्सर जिला मुख्यालय के लिए आते जाते थे। सुरेंद्र अपने परिवार के एकलौते कमाऊ सदस्य थे। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। इनके तीन पुत्रियां व दो पुत्र हैं। दो पुत्रियां नेत्रहीन हैं। सुरेद्र की मौत से उसका परिवार बेसहारा हो गया है। परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल है।
धौरहरा कस्बे के मोहल्ला बनघुसरी निवासी अकील अहमद की 55 वर्षीया पत्नी अजीमुन की भी ऐरा पुल पर हुए हादसे में मौत हुई है। परिजनों के मुताबिक वह अपना इलाज कराने के लिए लखनऊ जा रही थीं। छोटे बेटे ने बताया कि अम्मी के पेट में पथरी होने की वजह से आज ऑपरेशन के लिए जा रही थीं। क्या पता था कि आज घर वापस लौट कर नहीं आएंगी। वह अपने पीछे 2 पुत्र और अविवाहित पुत्री को छोड़ गई है।
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धौरहरा के कस्बा रामबटी निवासी हरे गोविंद की सात साल की बेटी श्रद्धा निगम अपने माता पिता की लाड़ली और परिवार में सबकी दुलारी थी। वह माता-पिता के साथ लखनऊ जा रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। घटना की सूचना मिलते ही पूरा परिवार घटनास्थल की ओर रवाना हो गया। घर में ताला पड़ा था। बच्ची की मौत से पड़ोसी भी गमजदा हैं।
धौरहरा कस्बे के ही मथुरा मिश्रा के 15 वर्षीय पुत्र पुत्र मन्नू मिश्रा मजदूरी के सिलसिले में लखनऊ जा रहा था। और वहां रह कर मेहनत मजदूरी करता हैं। इनकी पारिवारिक स्थिति बहुत ही दयनीय है। यह नगर पंचायत धौरहरा की बनी पुरानी बिल्डिंग में रहकर जीवन यापन करते हैं। इन लोगों के पास ना तो कोई घर है ना ही कृषि योग्य किसी प्रकार की कोई जमीन है।
धौरहरा के बाजार वार्ड निवासी 45 वर्षीय सगीर कपड़ों की फेरी लगाकर कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था मृतक के चार बच्चे हैं। पिता पांच माह से बीमारी से जूझ रहे हैं। तीन भाइयों में यह सबसे बड़े थे। छोटे भाई ने बताया कपड़े लेने के लिए लखनऊ जा रहे थे।यह अपने पीछे तीन पुत्र और दो पुत्रों को छोड़ गए हैं।
धौरहरा के मोहल्ला बाजार वार्ड निवासी 30 वर्षीय जितेंद्र कुमार रस्तोगी दीपावली में पटाखे की दुकान लगाने के लिए लखनऊ आतिशबाजी का सामान लेने जा रहे थे। यह सदर बाजार में चाट का ठेला (खोमचा) लगाकर जीवन यापन करते थे। अभी कुछ माह पहले इनकी मां जी का स्वर्गवास हो गया यह अपने भाइयों में दूसरे नंबर पर थे।
ब्लॉक नकहा के कटकुसमा गांव निवासी 45 वर्षीय कौशल किशोर त्रिवेदी होमगार्ड है और धौरहरा कोतवाली में रात की ड्यूटी करते थे। वह रोज सुबह 7:00 बजे अपने घर को इसी बस से आते- जाते थे। क्या पता था कि यही बस इनकी मौत का कारण बनेगी।
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सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 35 वर्षीय सुरेंद्र चौरसिया पुत्र बदलू चौरसिया फतेपुर धौरहरा के निवासी थे मेहनत, मजदूरी के लिए अक्सर जिला मुख्यालय के लिए आते जाते थे। सुरेंद्र अपने परिवार के एकलौते कमाऊ सदस्य थे। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। इनके तीन पुत्रियां व दो पुत्र हैं। दो पुत्रियां नेत्रहीन हैं। सुरेद्र की मौत से उसका परिवार बेसहारा हो गया है। परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल है।
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धौरहरा कस्बे के मोहल्ला बनघुसरी निवासी अकील अहमद की 55 वर्षीया पत्नी अजीमुन की भी ऐरा पुल पर हुए हादसे में मौत हुई है। परिजनों के मुताबिक वह अपना इलाज कराने के लिए लखनऊ जा रही थीं। छोटे बेटे ने बताया कि अम्मी के पेट में पथरी होने की वजह से आज ऑपरेशन के लिए जा रही थीं। क्या पता था कि आज घर वापस लौट कर नहीं आएंगी। वह अपने पीछे 2 पुत्र और अविवाहित पुत्री को छोड़ गई है।
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धौरहरा के कस्बा रामबटी निवासी हरे गोविंद की सात साल की बेटी श्रद्धा निगम अपने माता पिता की लाड़ली और परिवार में सबकी दुलारी थी। वह माता-पिता के साथ लखनऊ जा रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। घटना की सूचना मिलते ही पूरा परिवार घटनास्थल की ओर रवाना हो गया। घर में ताला पड़ा था। बच्ची की मौत से पड़ोसी भी गमजदा हैं।
धौरहरा कस्बे के ही मथुरा मिश्रा के 15 वर्षीय पुत्र पुत्र मन्नू मिश्रा मजदूरी के सिलसिले में लखनऊ जा रहा था। और वहां रह कर मेहनत मजदूरी करता हैं। इनकी पारिवारिक स्थिति बहुत ही दयनीय है। यह नगर पंचायत धौरहरा की बनी पुरानी बिल्डिंग में रहकर जीवन यापन करते हैं। इन लोगों के पास ना तो कोई घर है ना ही कृषि योग्य किसी प्रकार की कोई जमीन है।
धौरहरा के बाजार वार्ड निवासी 45 वर्षीय सगीर कपड़ों की फेरी लगाकर कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था मृतक के चार बच्चे हैं। पिता पांच माह से बीमारी से जूझ रहे हैं। तीन भाइयों में यह सबसे बड़े थे। छोटे भाई ने बताया कपड़े लेने के लिए लखनऊ जा रहे थे।यह अपने पीछे तीन पुत्र और दो पुत्रों को छोड़ गए हैं।
धौरहरा के मोहल्ला बाजार वार्ड निवासी 30 वर्षीय जितेंद्र कुमार रस्तोगी दीपावली में पटाखे की दुकान लगाने के लिए लखनऊ आतिशबाजी का सामान लेने जा रहे थे। यह सदर बाजार में चाट का ठेला (खोमचा) लगाकर जीवन यापन करते थे। अभी कुछ माह पहले इनकी मां जी का स्वर्गवास हो गया यह अपने भाइयों में दूसरे नंबर पर थे।
ब्लॉक नकहा के कटकुसमा गांव निवासी 45 वर्षीय कौशल किशोर त्रिवेदी होमगार्ड है और धौरहरा कोतवाली में रात की ड्यूटी करते थे। वह रोज सुबह 7:00 बजे अपने घर को इसी बस से आते- जाते थे। क्या पता था कि यही बस इनकी मौत का कारण बनेगी।