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Lakhimpur Kheri News: 306 गांवों में आपदा से निपटने का बनेगा मास्टर प्लान
Tue, 01 Sep 2026 11:41 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 01 Sep 2026 11:41 PM IST
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लखीमपुर खीरी। बाढ़, अतिवृष्टि, वज्रपात, अग्निकांड और अन्य आपदाओं से निपटने के लिए जिले की पांच तहसीलों के 306 गांवों में ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन का मास्टर प्लान तैयार होगा। इसमें संभावित खतरे, उपलब्ध संसाधन और आपदा के बाद पुनर्वास की कार्ययोजना शामिल होगी।
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि योजना में गांव का परिचय, भौगोलिक स्थिति, आबादी और खतरा प्रोफाइल तैयार होगी। पिछले 20 वर्षों में बाढ़, जलभराव, अग्निकांड, वज्रपात, सर्पदंश आदि से हुई जन-धन की क्षति भी दर्ज की जाएगी।
आपदा के समय उपलब्ध संसाधनों का मानचित्रण किया जा रहा है। इसमें पक्के शेल्टर होम, ऊंचे सुरक्षित स्थान, पेयजल स्रोत, सरकारी व निजी नाव, ट्रैक्टर, जेसीबी और जनरेटर आदि शामिल हैं। लेखपाल और सचिव जियो-स्टैंपिंग व फोटो से स्थलवार सूचनाएं पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं।
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संभावित बाढ़ व जलभराव वाले क्षेत्रों, सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की पहचान की जाएगी। आवश्यक संसाधनों और संवेदनशील आबादी की सूची बनेगी। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों, गंभीर रोगियों और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्षतिग्रस्त आवास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और मूलभूत सुविधाओं की बहाली के साथ प्रभावित लोगों को राहत व सहायता देने की कार्ययोजना भी तैयार होगी। एसडीएम और तहसीलदार योजना की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
संभावित बाढ़ एवं जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का निर्धारण, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा संवेदनशील आबादी की सूची तैयार की जाएगी। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों, गंभीर रोगियों और दिव्यांगजनों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। आपदा से क्षतिग्रस्त आवास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और मूलभूत सुविधाओं की बहाली के साथ प्रभावित लोगों को राहत एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इधर, एसडीएम और तहसीलदार योजना की नियमित समीक्षा की जा रही है।
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एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि योजना में गांव का परिचय, भौगोलिक स्थिति, आबादी और खतरा प्रोफाइल तैयार होगी। पिछले 20 वर्षों में बाढ़, जलभराव, अग्निकांड, वज्रपात, सर्पदंश आदि से हुई जन-धन की क्षति भी दर्ज की जाएगी।
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आपदा के समय उपलब्ध संसाधनों का मानचित्रण किया जा रहा है। इसमें पक्के शेल्टर होम, ऊंचे सुरक्षित स्थान, पेयजल स्रोत, सरकारी व निजी नाव, ट्रैक्टर, जेसीबी और जनरेटर आदि शामिल हैं। लेखपाल और सचिव जियो-स्टैंपिंग व फोटो से स्थलवार सूचनाएं पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं।
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संभावित बाढ़ व जलभराव वाले क्षेत्रों, सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की पहचान की जाएगी। आवश्यक संसाधनों और संवेदनशील आबादी की सूची बनेगी। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों, गंभीर रोगियों और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्षतिग्रस्त आवास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और मूलभूत सुविधाओं की बहाली के साथ प्रभावित लोगों को राहत व सहायता देने की कार्ययोजना भी तैयार होगी। एसडीएम और तहसीलदार योजना की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
संभावित बाढ़ एवं जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का निर्धारण, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा संवेदनशील आबादी की सूची तैयार की जाएगी। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों, गंभीर रोगियों और दिव्यांगजनों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। आपदा से क्षतिग्रस्त आवास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और मूलभूत सुविधाओं की बहाली के साथ प्रभावित लोगों को राहत एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इधर, एसडीएम और तहसीलदार योजना की नियमित समीक्षा की जा रही है।