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222.53 करोड़ के प्रस्तावों को मिली मंजूरी

Sun, 20 Jul 2014 05:30 AM IST
Lakhimpur
Lakhimpur Updated Sun, 20 Jul 2014 05:30 AM IST
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कृषि विभाग की आइसोपाम योजना बंद
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लखीमपुर खीरी। जिला योजना समिति की बैठक में पिछले वर्र्ष की भांति वर्र्ष 2014-15 के लिए भी 222.53 करोड़ की योजना के प्रस्तावों पर अध्यक्ष और ऊर्जा राज्यमंत्री यासर शाह ने मुहर लगाई। इसके साथ ही बैठक में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) मद से 50.55 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी मिली है। कुछ विभागों को इस बार भी बजट का प्रस्ताव नहीं हुआ। वहीं सत्तारुढ़ दल समेत विपक्षी दलों के कई जनप्रतिनिधि बैठक में नहीं पहुंचे। चर्चा के दौरान बसपा विधायक बालाप्रसाद अवस्थी और भूमि संरक्षण विभाग ट्रांस गोमती के अधिकारी कमलेश त्रिपाठी के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। कुछ अन्य मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को घेरने का प्रयास किया, जिस पर डीएम ने उन अधिकारियों का बचाव कर स्थिति को संभाला।
कलक्ट्रेट सभागार में दिन में 11 बजे से जिला योजना समिति के यासर शाह की अध्यक्षता में बैठक प्रारंभ हुई, जिसमें डीएम गौरव दयाल ने कार्यवाही की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि इस बार कृषि विभाग की आइसोपाम योजना मद में बजट का प्रावधान नहीं किया गया हैै। इसके बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों ने प्रस्तावित योजनाओं के बारे में जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि कुल 8.18 करोड़ के प्रस्ताव हैं, जिसमें बीज उपचार, बीज वितरण पर किसानों को अनुदान, पौधशाला के उत्पादन आदि मदों पर व्यय किया जाएगा। उद्यान विभाग के अधिकारी ने अपने प्रस्तावों के बारे में जानकारी देनी शुरू की तो जिला पंचायत सदस्य राजीव गुप्ता ने जनप्रतिनिधियों को जानकारी न देकर गुपचुप तरीके से खास लोगों को योजनाओं का लाभ देने का आरोप लगाया। वहीं जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र सिंह ने पीडब्ल्यूडी को पिछले वर्र्ष दिए प्रस्ताव को जिला योजना में शामिल न करने का आरोप लगाया। इस पर अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। जिला पशु चिकित्साधिकारी ने जैसे ही बोलना शुरू किया, तो पसगवां और फूलबेहड़ क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्यों ने डॉक्टर के गैरहाजिर रहने और बाढ़ के दौरान टीकाकरण न कराने का आरोप लगाया। डीएफओ ने अपने लक्ष्य के बारे में बोलना शुरू किया तो बसपा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने किसानों को सेमल की पौध न देने पर सवाल दागे। वहीं राजीव गुप्ता ने निघासन क्षेत्र में जंगली हाथियों द्वारा किए जा रहे जानमाल के नुकसान को रोकने संबंधी उपायों पर सवाल उठाए। डीएफओ ने जल्द ही समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया और साथ ही रिजर्र्व फारेस्ट एरिया की वजह से आ रही दिक्कतों के बारे में अवगत कराया। भूमि संरक्षण विभाग ट्रांस गोमती क्षेत्र के अधिकारी कमलेश त्रिपाठी ने मोहम्मदी और पसगवां क्षेत्र में कराए जा रहे कार्यों के बारे में बताया, जिस पर बसपा विधायक बाला प्रसाद समेत जिला पंचायत सदस्यों ने उनके द्वारा कराए गए कार्यों की जांच कराने की मांग की और कहा कि इसे न वह पहचानते हैैं और न ही वह उन्हें जानता है। इसके बाद विधायक और अधिकारी के बीच नोकझोंक हो गई, जिसमें बसपा विधायक ने माना कि अधिकारी ने उन्हें फोन कर आमंत्रित किया था। करीब दो घंटे तक चली बैैठक के समापन पर यासर शाह ने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप कार्र्य करें, जिससे जनता को अधिक से अधिक लाभ मिले। कोई ऐसी गलती न करें, जिससे उन्हें बचाया न जा सके।
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बैठक में सांसद अजय मिश्र टेनी, सपा विधायक उत्कर्ष वर्मा, विधायक रामसरन, सुनील भार्गव, सीडीओ नितीश कुमार, पीडी दिनेश कुमार, डीएसटीओ एसपी वर्मा, एमएलसी कांति सिंह के प्रतिनिधि संजय वर्मा, जिला पंचायत सदस्य क्रांति सिंह समेत अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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दो सांसद नदारद
जिला योजना समिति की बैठक से कई जनप्रतिनिधि नदारद रहे, तो कुछ काफी देर से पहुंचे। बसपा राज्यसभा सांसद जुगुल किशोर, भाजपा सांसद रेखा वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष कमल पाल, विधायक आरएस कुशवाहा, शमशेर बहादुर सिंह, रोमी साहनी आदि नहीं पहुंचे। जबकि सपा विधायक सुनील भार्गव बैैठक शुरू होने के करीब एक घंटे बाद पहुंचे। जबकि भाजपा सांसद अजय मिश्र टेनी बैैठक के परवान चढ़ने से पहले ही निकल गए।
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बीआरजीएफ में 50.55 करोड़ के प्रस्ताव पास
पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि से कुल 50.55 करोड़ के प्रस्तावों में नगर पालिका परिषद के लिए 3.87 करोड़, नगर पंचायत के लिए 1.81 करोड़, ग्राम पंचायत के लिए 23.36 करोड़, क्षेत्र पंचायत के लिए 5.28 करोड़ और जिला पंचायत के लिए करीब 16.21 करोड़ के प्रस्ताव शामिल हैं।

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डांगा नहीं बेलरायां में बनेगी पीएचसी
पिछले वर्ष की बैठक में डांगा गांव में पीएचसी बनाने का प्रस्ताव था, भागौलिक परिस्थितियों के आधार पर जिला पंचायत सदस्य राजीव गुप्ता ने बेलरायां में बनाने की मांग रखी थी। इस बार भी डांगा में प्रस्ताव किया गया था, जिसे आपत्ति के बाद बेलरायां में बनाने का प्रस्ताव पास हुआ।
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