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भयानक रूप ले रहा इंसान और वन्यजीवों का संघर्ष

Tue, 25 Feb 2014 05:31 AM IST
Lakhimpur
Lakhimpur Updated Tue, 25 Feb 2014 05:31 AM IST
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दुधवा नेशनल पार्क के बफर
जोन में बढ़ रहा है इंसानी दखल

लखीमपुर खीरी। वन एवं वन्यजीवों से समृद्ध खीरी जिले में इंसानों और वन्यजीवों के बीच चल रहा संघर्ष भयानक रूप लेता जा रहा है। वन्यजीव अपने बफर जोन में इंसानी दखल कतई बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। वहीं वनक्षेत्र में आबादी और खेती का बढ़ता दबाव वन्यजीवों के लिए मुसीबत खड़ा कर रहा है।
खीरी जिले में वर्ष 2000 के बाद से इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष शुरू हो गया था। उस समय जंगलों के निकट गन्ने के खेतों में बाघिन और उसके पीछे-पीछे बाघ चले आते थे, जब लोगों को बाघ के आने का पता चलता था तब वे खेतों की ओर जाने से कतराते थे, बाघों के हमले की घटनाओं में वर्ष 2005 के बाद इजाफा होता गया। वर्ष 2007 में भीरा रेंज के कांपटांडा गांव में बाघ ने एक के बाद एक पांच लोगों की जान लेली थी। बाघ के हमले में चार लोग जख्मी भी हो गए थे। संघर्ष के इसी क्रम में वर्ष 2008 में पलिया के परसपुर में कुछ लोगों ने बाघ को बिजली का करंट देकर मौत के घाट उतार दिया था। इसी साल धौरहरा रेंज में बस्ती में घुस आए तेंदुए को लोगों ने पीट-पीट कर मार डाला था। जबकि मैलानी में एक हष्ट-पुष्ट बाघ का शव बांकेगंज के पास नहर से बरामद हुआ। बाघ और तेंदुए की मौत के बाद जंगलों के समीप बसे बस्तियों में इंसानी शिकार की घटनाएं बढ़ने लगीं।
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क्या है इस संघर्ष का मुख्य कारण
वन विभाग की जमीन पर कई लोग 1980 के दशक से कब्जा जमाए हुए हैं। जंगलों और खाली पड़ी जमीनों पर कब्जे का यह सिलसिला वर्ष 2000 के बाद तेजी से बढ़ने लगा। मौजूदा समय में पलिया, बेलरायां, मझगई, संपूर्णानगर, धौरहरा, दक्षिण निघासन के क्षेत्रों में करीब सात हजार हेक्टेयर जमीन पर लोगों का कब्जा है। कब्जे वाला इलाका दुधवा पार्क और उत्तर खीरी के जंगलों से सटा हुआ है। इस जमीन को खाली कराने के लिए पिछले सालों में कई बार वन विभाग और कब्जेदारों के बीच संघर्ष हो चुका है। पिछले तीन सालों में वन विभाग की कार्रवाइयों पर गौर करें तो अधिकारियों की ओर से वनभूमि को खाली कराने के लिए पत्राचार के अलावा कोई प्रयास नहीं किया गया है।
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मुख्य बात यह है कि वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ा क्यों? दरअसल जंगलों में इंसानी दखल बढ़ रहा है और वन्यजीवों का क्षेत्र सिकुड़ रहा है। वन विभाग ने वन्यजीवों की जमीन को कई बार खाली कराने का प्रयास किया। इलाकाई अधिकारी लोगों को समझाया कि वन्यजीवों के क्षेत्र में वह प्रवेश न करें, लेकिन स्थितियां दिनोंदिन कठिन होती जा रहीं हैं।
-केके पांडे, डीएफओ उत्तर खीरी वन प्रभाग
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