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सांई बाबा को नहीं चढ़ेगा खोया-बेसन का प्रसाद
Lakhimpur
Updated Sat, 15 Jun 2013 05:31 AM IST
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कमेटी ने बदला प्रसाद का स्वरूप, नए निर्देश जारी
प्रसाद में लाई, चना, मिश्री फल-फूल ही चढ़ेंगे
लखीमपुर। शहर के मोहल्ला सिकटिहा स्थित सांई पावन धाम आने वाले श्रद्धालुओं को अब अपने प्रसाद में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। भक्त अब यहां खोया, बेसन या मिठाई निर्मित कोई भी सामग्री प्रसाद रूप में नहीं चढ़ा पाएगा। यह नया निर्देश यहां की कमेटी ने जारी किया है। नए निर्देश के तहत प्रसाद के रूप में अब लोगों को लाई, चना, मिश्री और फल ही चढ़ाने होंगे। कमेटी के अध्यक्ष विजय मिश्रा का तर्क है कि अब तक यहां चढ़ते आए प्रसाद से मूर्ति का रंग फीका होता जा रहा था। साथ ही चीटियां भी आ जाती थीं। विजय ने बताया कि इधर-उधर बिकने वाले प्रसाद में केमिकल की मिलावट की वजह से साईं मूर्ति में कुछ जगह धब्बे पड़ गए हैं। कुछ इन्हीं कारणों से मिठाई, खोए, बेसन से बनी प्रसाद सामग्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बताया कि नए निर्देश के बाबत पर्चे छपवाकर बांटे जा रहे हैं।
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प्रसाद विक्रेताओं में रोष
कमेटी के नए निर्देश से सांई मंदिर के आस-पास ठेला लगाकर प्रसाद बेचने वालों में रोष पैदा हो गया है। प्रसाद व्यवसाय में जुड़े लोगों की मानें तो नए निर्देश से उनके परिवारों के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। मंदिर के निकट प्रसाद बेचने वाले अर्जुनपुरवा निवासी पप्पू, सिकटिहा निवासी अंशू कश्यप, रामू, मुकेश एवं बहादुर नगर निवासी गप्पू ने बताया कि श्रद्धालुओं की मांग पर अब तक खोया एवं बेसन निर्मित प्रसाद ही बेचते आए हैं। बताया कि कमाई भी ठीक-ठाक हो जाती है। अब नए निर्देश से बिक्री पर काफी असर पड़ सकता है। बताते चलें कि अकेले सिकटिहा स्थित सांई पावन धाम पर ही करीब दो दर्जन प्रसाद की दुकानें लगती आई हैं।
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प्रसाद में लाई, चना, मिश्री फल-फूल ही चढ़ेंगे
लखीमपुर। शहर के मोहल्ला सिकटिहा स्थित सांई पावन धाम आने वाले श्रद्धालुओं को अब अपने प्रसाद में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। भक्त अब यहां खोया, बेसन या मिठाई निर्मित कोई भी सामग्री प्रसाद रूप में नहीं चढ़ा पाएगा। यह नया निर्देश यहां की कमेटी ने जारी किया है। नए निर्देश के तहत प्रसाद के रूप में अब लोगों को लाई, चना, मिश्री और फल ही चढ़ाने होंगे। कमेटी के अध्यक्ष विजय मिश्रा का तर्क है कि अब तक यहां चढ़ते आए प्रसाद से मूर्ति का रंग फीका होता जा रहा था। साथ ही चीटियां भी आ जाती थीं। विजय ने बताया कि इधर-उधर बिकने वाले प्रसाद में केमिकल की मिलावट की वजह से साईं मूर्ति में कुछ जगह धब्बे पड़ गए हैं। कुछ इन्हीं कारणों से मिठाई, खोए, बेसन से बनी प्रसाद सामग्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बताया कि नए निर्देश के बाबत पर्चे छपवाकर बांटे जा रहे हैं।
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प्रसाद विक्रेताओं में रोष
कमेटी के नए निर्देश से सांई मंदिर के आस-पास ठेला लगाकर प्रसाद बेचने वालों में रोष पैदा हो गया है। प्रसाद व्यवसाय में जुड़े लोगों की मानें तो नए निर्देश से उनके परिवारों के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। मंदिर के निकट प्रसाद बेचने वाले अर्जुनपुरवा निवासी पप्पू, सिकटिहा निवासी अंशू कश्यप, रामू, मुकेश एवं बहादुर नगर निवासी गप्पू ने बताया कि श्रद्धालुओं की मांग पर अब तक खोया एवं बेसन निर्मित प्रसाद ही बेचते आए हैं। बताया कि कमाई भी ठीक-ठाक हो जाती है। अब नए निर्देश से बिक्री पर काफी असर पड़ सकता है। बताते चलें कि अकेले सिकटिहा स्थित सांई पावन धाम पर ही करीब दो दर्जन प्रसाद की दुकानें लगती आई हैं।
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