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देखरेख का अभाव, बहुमूल्य विरासत संकट में

Thu, 18 Apr 2013 05:30 AM IST
Lakhimpur
Lakhimpur Updated Thu, 18 Apr 2013 05:30 AM IST
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विश्व विरासत दिवस पर विशेष
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इतिहास के हर युग की विरासत संजोए हुआ है जिला
अशोक निगम
लखीमपुर खीरी। जिले की बहुमूल्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत देखरेख और रखरखाव के अभाव में अपना प्राचीन गौरव और मूल स्वरूप खोती जा रही है। खीरी जिला रामायण और महाभारत काल से लेकर गुप्त काल तक तमाम ऐतिहासिक, पौराणिक विरासत अपने अंतर में संजोए है।
वास्तुकला के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण कई भवन उचित रखरखाव के अभाव में नष्ट होने की स्थिति में हैं। पुरातात्विक महत्व की इन इमारतों पर लोग तरह-तरह की इबारतें लिखकर उन्हें बदसूरत बना रहे हैं। कई इमारतों की अवैज्ञानिक ढंग से मरम्मत कराए जाने से उनका मूल स्वरूप ही बिगड़ गया है। कई ऐतिहासिक भवन तो अपना अस्तित्व ही खोने के कगार पर पहुंच गए है। जिले की इस बहुमूल्य विरासत के संरक्षण और इनके बारे में लोगों को जानकारी देने का बीड़ा इंटेक नामक एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था ने उठा रखा है।
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वास्तुकला का अद्भुत नमूना है मेढक मंदिर
ओयल कस्बे में स्थित मेढक मंदिर मंडूक तंत्र और श्रीयंत्र के आधार पर निर्मित है। मंदिर का निर्माण कपिला के महान तांत्रिकों और वाराणसी के महान विद्वानों की देखरेख में कराया गया था। मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी के अंत में राजा बख्त सिंह ने शुरू कराया था। इसको पूरा कराने का श्रेय राजा अनिरुद्ध सिंह को जाता है। मंदिर वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। पूरी दुनिया में अपनी तरह का अकेला मंदिर है।
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सिंगाही का भूलभुलैया शिव मंदिर
खैरीगढ़ स्टेट की राजधानी रहे सिंगाही कस्बे से तीन किलोमीटर दूर सरजू नदी के तट पर बना भूलभुलैया शिव मंदिर भी वास्तुकला के दृष्टिकोण से अत्यंत विलक्षण हैं। मंदिर प्राकृतिक परिवेश में स्थित है। मंदिर एक विशाल चबूतरे पर निर्मित है। चबूतरे के नीचे भूलभुलैया है। मंदिर का निर्माण संवत 1927 में सिंगाही की महारानी सुरथ कुंवरि ने कराया था।
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सिंगाही का भव्य राजमहल
खैरीगढ़ स्टेट की राजधानी रहे सिंगाही कस्बे के बीचोबीच भव्य राजमहल स्थित है। राजमहल का निर्माण 1880 से 1920 के बीच हुआ। 260 लंबाई और 195 फिट चौड़ाई में बने इस महल में 12 प्रवेश द्वार और बीस बीथिकाएं हैं। मंदिर के सामने भव्य काली और सूर्य मंदिर है। इसके बीच रानी सुरथ कुंवरि की मंदिर की ओर मुख किए आदमकद प्रतिमा है।
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और ध्वस्त हो गया खैरीगढ़ का किला गौरी
आइने अकबरी के मुताबिक जंगल के बीच स्थित किला गौरीशाह का निर्माण सन् 1379 में हुआ, जबकि स्थानीय लोग इस किले को महाभारत कालीन मानते हैं। किला पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। इस किले के पास खुदाई के दौरान गुप्तकालीन पूर्ण आकार पत्थर का घोड़ा मिला जो लखनऊ के राज्य संग्रहालय में सुरक्षित है। यह किला कभी सीमा की सुरक्षा पंक्ति का महत्वपूर्ण किला था।
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यहां और भी है बहुत कुछ
- गोला में रावण द्वारा स्थापित प्राचीन शिवलिंग, राजा जन्मेजय की नाग यज्ञ स्थली देवकली, पांडवों की अज्ञातवास स्थली बालमियां बरखर, संकटा देवी मंदिर, शीतला देवी मंदिर, गजमोचन नाथ मंदिर, लिलौटी नाथ, जंगली नाथ, भुइफोरवानाथ मंदिर, प्रोटेस्टेंट चर्च, औरंगाबाद की मस्जिद और सुनहरी मस्जिद।

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संरक्षण के लिए हो रहे यह उपाय
विरासत के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाली राष्ट्रीय संस्था इंटेक के क्षेत्रीय अध्याय ने जिले की विरासत को बचाने का बीड़ा उठाया है। इसके तहत इंटेक ने जिले के ढाई सौ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का सूचीबद्ध कराया है। अब इनके संरक्षण के लिए संस्था विस्तृत कार्ययोजना बना रही है।
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