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पाइप पेयजल परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी
Lakhimpur
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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आर्सेनिक प्रभावित ग्रामीणों को अभी करना होगा और इंतजार!
पेयजल स्वच्छता मिशन में चयनित 44 जिलों में खीरी भी
कार्यालय स्थापना को मिल चुके हैं पांच लाख
अभी तक नहीं खरीदा गया साजो-सामान
लखीमपुर खीरी। आर्सेनिक प्रभावित गांवों में पाइप पेयजल परियोजना पर कार्य शुरू नहीं हो सका है। पेयजल स्वच्छता मिशन के तहत चयनित 44 जिलों में लखीमपुर खीरी भी शामिल हैं, जहां सबसे ज्यादा एरिया आर्सेनिक प्रभावित है। आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में पाइप पेयजल परियोजना के तहत कार्य कराए जाने हैं, जिससे लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो सके। चालू वित्तीय वर्ष के करीब सात माह बीत जाने के बावजूद प्रगति शून्य से आगे नहीं बढ़ सकी है।
बता दें कि निर्मल भारत मिशन के तहत संपूर्ण स्वच्छता अभियान चालू है। इसी के बतौर पार्ट आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए जिला पेयजल स्वच्छता मिशन की शुरुआत अप्रैल 2012 से हुई है, जिसका नोडल अधिकारी, जिला विकास अधिकारी को बनाया गया है। इसके कार्यालय स्थापना के लिए 4.96 लाख रुपये का बजट भी मिल चुका है। हालांकि अब तक बजट का उपयोग नहीं किया गया, जिससे कार्यालय के लिए आवश्यक इंफ्रास्टक्चर उपलब्ध नहीं है। ग्राम पंचायतों में ग्राम पेयजल स्वच्छता समितियों का गठन भी नहीं हुआ है, जिससे पाइप पेयजल परियोजना के लिए कोई प्रस्ताव नहीं बनाया जा सका है। विभागीय सूत्रों की माने तो कार्यालय की स्थापना के साथ ही अलग स्टाफ नामित किया जाना है, जिसमें सलाहकार से लेकर डाटा इंट्री आपरेटर का चयन होना है। योजना के क्रियान्वयन में अफसरों की हीलाहवाली से आर्सेनिक प्र्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताते चलें कि जिले की तीन तहसीलें धौरहरा, पलिया और निघासन के दर्जनों गांवों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा मानक से कहीं अधिक पाई गई है, जिससे लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। क्योंकि भारत सरकार ने पहले से ही हैंडपंप परियोजना पर रोक लगा दी है।
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महीनों से डीडीओ की कुर्सी खाली
इस योजना में नोडल अधिकारी बनाए गए जिला विकास अधिकारी की कुर्सी करीब चार महीने से खाली है। अब तक नई तैनाती नहीं हो सकी है। लिहाजा कुछ चार्ज परियोजना निदेशक के पास हैं, तो पाइप पेयजल परियोजना का चार्ज मुख्य विकास अधिकारी के जिम्मे है। सूत्रों की माने तो व्यस्तता के चलते अफसरों का ध्यान इस महत्वपूर्ण परियोजना की ओर नहीं है, जिससे निर्मल भारत का सपना साकार होता नहीं दिख रहा।
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डीडीओ की तैनाती न होने की वजह से परियोजना के क्रियान्वयन में देरी हुई है। हालांकि परियोजना को जल्द चालू कर गांवों से प्रस्ताव आमंत्रित करने की दिशा में कार्य शुरू किया जा रहा है। कार्यालय स्थापना की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
-सुरेंद्र विक्रम, मुख्य विकास अधिकारी
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पेयजल स्वच्छता मिशन में चयनित 44 जिलों में खीरी भी
कार्यालय स्थापना को मिल चुके हैं पांच लाख
अभी तक नहीं खरीदा गया साजो-सामान
लखीमपुर खीरी। आर्सेनिक प्रभावित गांवों में पाइप पेयजल परियोजना पर कार्य शुरू नहीं हो सका है। पेयजल स्वच्छता मिशन के तहत चयनित 44 जिलों में लखीमपुर खीरी भी शामिल हैं, जहां सबसे ज्यादा एरिया आर्सेनिक प्रभावित है। आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में पाइप पेयजल परियोजना के तहत कार्य कराए जाने हैं, जिससे लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो सके। चालू वित्तीय वर्ष के करीब सात माह बीत जाने के बावजूद प्रगति शून्य से आगे नहीं बढ़ सकी है।
बता दें कि निर्मल भारत मिशन के तहत संपूर्ण स्वच्छता अभियान चालू है। इसी के बतौर पार्ट आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए जिला पेयजल स्वच्छता मिशन की शुरुआत अप्रैल 2012 से हुई है, जिसका नोडल अधिकारी, जिला विकास अधिकारी को बनाया गया है। इसके कार्यालय स्थापना के लिए 4.96 लाख रुपये का बजट भी मिल चुका है। हालांकि अब तक बजट का उपयोग नहीं किया गया, जिससे कार्यालय के लिए आवश्यक इंफ्रास्टक्चर उपलब्ध नहीं है। ग्राम पंचायतों में ग्राम पेयजल स्वच्छता समितियों का गठन भी नहीं हुआ है, जिससे पाइप पेयजल परियोजना के लिए कोई प्रस्ताव नहीं बनाया जा सका है। विभागीय सूत्रों की माने तो कार्यालय की स्थापना के साथ ही अलग स्टाफ नामित किया जाना है, जिसमें सलाहकार से लेकर डाटा इंट्री आपरेटर का चयन होना है। योजना के क्रियान्वयन में अफसरों की हीलाहवाली से आर्सेनिक प्र्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताते चलें कि जिले की तीन तहसीलें धौरहरा, पलिया और निघासन के दर्जनों गांवों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा मानक से कहीं अधिक पाई गई है, जिससे लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। क्योंकि भारत सरकार ने पहले से ही हैंडपंप परियोजना पर रोक लगा दी है।
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महीनों से डीडीओ की कुर्सी खाली
इस योजना में नोडल अधिकारी बनाए गए जिला विकास अधिकारी की कुर्सी करीब चार महीने से खाली है। अब तक नई तैनाती नहीं हो सकी है। लिहाजा कुछ चार्ज परियोजना निदेशक के पास हैं, तो पाइप पेयजल परियोजना का चार्ज मुख्य विकास अधिकारी के जिम्मे है। सूत्रों की माने तो व्यस्तता के चलते अफसरों का ध्यान इस महत्वपूर्ण परियोजना की ओर नहीं है, जिससे निर्मल भारत का सपना साकार होता नहीं दिख रहा।
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डीडीओ की तैनाती न होने की वजह से परियोजना के क्रियान्वयन में देरी हुई है। हालांकि परियोजना को जल्द चालू कर गांवों से प्रस्ताव आमंत्रित करने की दिशा में कार्य शुरू किया जा रहा है। कार्यालय स्थापना की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
-सुरेंद्र विक्रम, मुख्य विकास अधिकारी