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902 ग्राम पंचायतों को मिलने वाली धनराशि पर लगा ब्रेक
Lakhimpur
Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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ग्राम निधि की खर्च हुई रकम का नहीं मिल रहा हिसाब
वीडीओ और एडीओ पंचायत के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
अफसर मुश्किल में, करोड़ों रुपये के घालमेल की आशंका
लखीमपुर खीरी। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए राज्य वित्त आयोग और 14वें वित्त आयोग से करोड़ों की रकम मिली थी। ताकि गांवों की तस्वीर बदले और ग्रामीणों को सुविधाएं मिलें। इस रकम को समय सीमा के अंदर ही खर्च किया जा चुका है, लेकिन इसका हिसाब विभागीय अधिकारियों को नहीं मिल पा रहा है। हालांकि विभाग ने कई बार ग्राम पंचायत अधिकारियों को चेताया। अब शासन से मिले कड़े आदेशों के बाद अफरातफरी मच गई है, क्योंकि ब्यौरा न देने वाली ग्राम पंचायतों की धनराशि रोक दी गई है। डीपीआरओ ने 50 ग्राम पंचायत अधिकारियों का इंक्रीमेंट रोकते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2011-12 में खर्च हुई रकम के बिल-बाउचर प्रिया साफ्टवेयर पर 31 मई 2012 तक अपलोड करने के आदेश दिए हैं।
शासन ने बीते वित्तीय वर्ष 2010-11 से ऑनलाइन सिस्टम प्रिया साफ्टवेयर पर ग्राम निधि से खर्च की जाने वाली रकम के बिल-बाउचर इंट्री करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके ग्राम पंचायतों ने ब्यौरा नहीं दिया और हालात यह हैं कि ऐसी ग्राम पंचायतो को डिफाल्टर मानते हुए शासन ने वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि की दूसरी किस्त पर रोक लगा दी है। जिले में कुल 995 ग्राम पंचायतें हैं, जिसमें 902 ग्राम पंचायतों के खर्च का ब्यौरा अपलोड नहीं है। लिहाजा इन ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राज्य वित्त आयोग की दूसरी किस्त पर रोक लग गई है। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2010-11 की इंट्री अभी तक 902 ग्राम पंचायतों की पूरी नहीं हो सकी है। वहीं वर्ष 2011-12 के बिल-बाउचर की इंट्री प्रिया साफ्टवेयर पर शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में तय समय सीमा यानी 31 मई 2012 तक इंट्री करना ग्राम पंचायत अधिकारियों के साथ ही अफसरों के लिए चुनौती से कम नहीं है।
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बिल-बाउचर बने मुसीबत
विकास कार्य के नाम पर खर्च की गई रकम का ब्यौरा प्रिया साफ्टवेयर पर न देने से 902 ग्राम पंचायतों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी और एडीओ पंचायत पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। प्रिया साफ्टवेयर के लागू होने से पहले भी उपभोग प्रमाण देना होता था, जिसे जमा करने में कभी रुचि नहीं ली गई। अब प्रिया साफ्टवेयर पर सारी सूचनाएं-ब्यौरे की इंट्री ऑनलाइन होती है, जो ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। सूत्र बताते हैं कि बैंक से रुपये निकालकर अन्य कार्यों में खर्च कर लिए, जिसके चलते बिल-बाउचर हासिल करने में दिक्कत पेश आ रही है। मसलन बैक डेट के बिल बाउचर हासिल करने के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी पंजीकृत कारोबारियों से जुगाड़ भिड़ा रहे हैं, लेकिन बैकडेट के नाम पर वे भी पीछे हट गए हैं। ऐसे में फर्जी बिल-बाउचर हासिल करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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प्रिया साफ्टवेयर पर इंट्री पूर्ण कराने के लिए कई बार चेतावनी दी जा चुकी है। इंट्री शुरू न करने वाली 145 ग्राम पंचायतों के खातों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। अब दूसरी किस्त शासन ने रोक दी है, जिससे 902 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। 31 मई 2012 तक इंट्री पूर्ण करने के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद शासन के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-बीडी पांडे, डीपीआरओ
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वीडीओ और एडीओ पंचायत के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
अफसर मुश्किल में, करोड़ों रुपये के घालमेल की आशंका
लखीमपुर खीरी। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए राज्य वित्त आयोग और 14वें वित्त आयोग से करोड़ों की रकम मिली थी। ताकि गांवों की तस्वीर बदले और ग्रामीणों को सुविधाएं मिलें। इस रकम को समय सीमा के अंदर ही खर्च किया जा चुका है, लेकिन इसका हिसाब विभागीय अधिकारियों को नहीं मिल पा रहा है। हालांकि विभाग ने कई बार ग्राम पंचायत अधिकारियों को चेताया। अब शासन से मिले कड़े आदेशों के बाद अफरातफरी मच गई है, क्योंकि ब्यौरा न देने वाली ग्राम पंचायतों की धनराशि रोक दी गई है। डीपीआरओ ने 50 ग्राम पंचायत अधिकारियों का इंक्रीमेंट रोकते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2011-12 में खर्च हुई रकम के बिल-बाउचर प्रिया साफ्टवेयर पर 31 मई 2012 तक अपलोड करने के आदेश दिए हैं।
शासन ने बीते वित्तीय वर्ष 2010-11 से ऑनलाइन सिस्टम प्रिया साफ्टवेयर पर ग्राम निधि से खर्च की जाने वाली रकम के बिल-बाउचर इंट्री करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके ग्राम पंचायतों ने ब्यौरा नहीं दिया और हालात यह हैं कि ऐसी ग्राम पंचायतो को डिफाल्टर मानते हुए शासन ने वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि की दूसरी किस्त पर रोक लगा दी है। जिले में कुल 995 ग्राम पंचायतें हैं, जिसमें 902 ग्राम पंचायतों के खर्च का ब्यौरा अपलोड नहीं है। लिहाजा इन ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राज्य वित्त आयोग की दूसरी किस्त पर रोक लग गई है। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2010-11 की इंट्री अभी तक 902 ग्राम पंचायतों की पूरी नहीं हो सकी है। वहीं वर्ष 2011-12 के बिल-बाउचर की इंट्री प्रिया साफ्टवेयर पर शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में तय समय सीमा यानी 31 मई 2012 तक इंट्री करना ग्राम पंचायत अधिकारियों के साथ ही अफसरों के लिए चुनौती से कम नहीं है।
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बिल-बाउचर बने मुसीबत
विकास कार्य के नाम पर खर्च की गई रकम का ब्यौरा प्रिया साफ्टवेयर पर न देने से 902 ग्राम पंचायतों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी और एडीओ पंचायत पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। प्रिया साफ्टवेयर के लागू होने से पहले भी उपभोग प्रमाण देना होता था, जिसे जमा करने में कभी रुचि नहीं ली गई। अब प्रिया साफ्टवेयर पर सारी सूचनाएं-ब्यौरे की इंट्री ऑनलाइन होती है, जो ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। सूत्र बताते हैं कि बैंक से रुपये निकालकर अन्य कार्यों में खर्च कर लिए, जिसके चलते बिल-बाउचर हासिल करने में दिक्कत पेश आ रही है। मसलन बैक डेट के बिल बाउचर हासिल करने के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी पंजीकृत कारोबारियों से जुगाड़ भिड़ा रहे हैं, लेकिन बैकडेट के नाम पर वे भी पीछे हट गए हैं। ऐसे में फर्जी बिल-बाउचर हासिल करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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प्रिया साफ्टवेयर पर इंट्री पूर्ण कराने के लिए कई बार चेतावनी दी जा चुकी है। इंट्री शुरू न करने वाली 145 ग्राम पंचायतों के खातों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। अब दूसरी किस्त शासन ने रोक दी है, जिससे 902 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं। 31 मई 2012 तक इंट्री पूर्ण करने के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद शासन के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-बीडी पांडे, डीपीआरओ