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अतिक्रमण ने निकाली सई नदी की जान, मिट रही पहचान

Sun, 19 May 2019 01:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 19 May 2019 01:51 AM IST
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अतिक्रमण ने निकाली सई नदी की जान, मिट रही पहचान
जंगबहादुरगंज (लखीमपुर खीरी)। पसगवां ब्लॉक के पनई गांव के पास से निकली सई नदी का उद्गम स्थल सूख गया है। नदी पर अतिक्रमण के चलते सई नदी की पहचान और वजूद संकट में है। जिले में यह नदी भैेंसता नाला के नाम से जानी जाती है। यह नाला पनई, जलालपुर, अल्लीपुर, नेवादा गांवों में जाकर विशाल झाबर के रूप में तब्दील हो गया है। नदी और झाबर पर अतिक्रमण और खनन से इसका प्राकृतिक स्वरूप ही बिगड़ रहा है। बाईपास रोड बनने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह ही रोक दिया गया। हालत यह है कि नदी दम तोड़ती नजर आ रही है।
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सई नदी गोमती की सहायक नदी है। सई नदी का जिक्र गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में भी किया है। श्रीराम वनवास काल पूरा करके जब आए तो उन्होंने इस नदी में भी स्नान किया था। वाल्मीकि रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। सई नदी का उद्गम पसगवां ब्लॉक के पनई गांव में है। हालांकि यह उद्गम स्थल और इसके जलस्त्रोत अब सूख चुके है। भैंसता गांव के नाम पर जिले में इस नदी का नाम भैंसता नाला कब पड़ गया कोई नहीं जानता। यह नाला पनई, जलालपुर, अल्लीपुर, नेवादा आदि गांवों में जाकर विशाल झाबर के रूप में तब्दील हो गया। पनई से भैसता नाला हरदोई के ब्लॉक पिहानी में जाकर पिहानी हरियावां, टडियावां के पास सई नदी के रूप में तब्दील हो जाता है।
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सई नदी का ये है भूगोल
विधान परिषद के पूर्व सदस्य विंध्यवासिनी कुमार ने अपने अध्ययन के अनुसार दावा किया है कि भैसता का उद्गम स्थल ही सई नदी का उद्गम स्थल है, जो पनई गांव के पास है। पसगवां ब्लॉक के भैसता के पास इस नाले का स्वरूप खासा विकराल हो जाता है। हरदोई जिले में भैसता नदी सई नदी में मिल जाती हैं सई नदी जौनपुर में गोमती नदी में मिल जाती है।
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नदी के हिस्से में कब्जा कर लोग कर रहे हैं खेती
पूर्व प्रधान बंधा लाल, प्रधान नन्हे, ग्राम मस्तीपुर के बलराम सिंह का कहना है कि नदी का झावर कई गांवों में फैला हुआ था। इसमे पशु, पक्षी पानी पीते थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका स्वरूप विगाड़ दिया। झाबर पर कब्जा कर लोग खेती कर रहे हैं। नाले में खनन से इसमें गहरे गहरे गड्ढे हो गए हैं। बाईपास रोड बनाने में इसी झाबर की मिट्टी इस्तेमाल की गई। जिस नाले और झाबर में पूरे साल पानी नहीं सूखता था, वहां कहीं कहीं पानी के नाम पर थोड़ा सा कीचड़ ही दिखाई देता है।


नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण से भी रुका जल प्रवाह
राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के चौड़ीकरण और बाईपास के निर्माण के नाम पर झाबर से भैसता नदी में जल प्रवाह रोककर नदी के प्राकृतिक स्वरूप को समाप्त कर दिया गया है। पूर्व विधान परिषद सदस्य विंध्यवासिनी कुमार का मानना है कि सई नदी मूलत: अवध क्षेत्र से निकली गोमती के साथ ही गंगा की सहायक नदी हैं। उन्होंने बताया कि यहां का तालाब 600 एकड़ भूमि में फैला था जो अब 200 एकड़ रह गया है। उन्होंने बताया कि पनई जलालपुर में विशाल झाबर के किनारे एक शिव मंदिर भी है। जहां यह नदी गोमती में मिलती है। पूर्व विधान परिषद सदस्य विंध्यवासिनी कुमार दो साल से सई नदी के संरक्षण और इसे अविरल बनाने की मुहिम चला रहे हैं।
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