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मड़हा कोठी को बनाया जाए पर्यटक आवास
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज (वन्यजीव विहार) में मड़हा सेक्शन में बनी आलीशन कोठी को पर्यटक आवास बनाने बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मड़हा कोठी के आसपास का जंगल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। इसके अलावा यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर में क्षेत्र ही नहीं कई जिलों के भक्तों की अपार आस्था है। यहां बाघ,तेंदुओं के अलावा बारासिंगा, चीतल, पाड़ा आदि हिरन की पांच प्रजातियां बहुतायत में मिलतीं हैं। मड़हा कोठी को पर्यटक आवास बनाए जाने से आसपास के गांवों का तेजी से विकास होगा।
मालूम हो कि ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज हुक्मरानों ने यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध जैव विविधतता को देखते हुए शिकारगाह के रूप में यहां आलीशान गेस्ट हाउस बनाया था। इस गेस्ट हाउस में अंग्रेज हुक्मरानों के अलावा राजा-महराजा भी आकर ठहरते थे, जो जंगल का प्राकृतिक आनंद उठाने के साथ-साथ शिकार का शौक भी पूरा करते थे। अब यह कोठी निष्प्रोज्य पड़ी है। यहां कभी-कभार वन विभाग के अफसर आकर चंद घंटे गुजारते हैं। ग्रंट नंबर 10 प्रधान वीरेंद्र कुमार भार्गव, महुरेना गजराम सिंह, ढ़ाका रामकिशुन विनोद गोयल, हरीकिशन अग्रवाल, गोल्डी गोयल आदि का कहना है कि अगर इसको पर्यटक आवास के रूप में विकसित कर दिया जाए तो वन विभाग की आय बढ़ने के साथ-साथ आसपास के गांवों का विकास भी तेज हो जाएगा। ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा और सैलानी यहां के खूबसूरत नजारे का आनंद ले सकेंगे।
डीटीआर की किशनपुर संरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण यहां कोई पर्यटक आवास नहीं बनाया जा सकता है। मड़हा में बनी वन विभाग की कोठी वन अधिकारियों के ठहरने में इस्तेमाल होती है। जहां रुककर अफसर जंगल गश्त, दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा और शिकारियों की निगहबानी करते हैं।
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- रमेश कुमार पांडे,फील्ड डाइरेक्टर,दुधवा टाइगर रिजर्व।
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मालूम हो कि ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज हुक्मरानों ने यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध जैव विविधतता को देखते हुए शिकारगाह के रूप में यहां आलीशान गेस्ट हाउस बनाया था। इस गेस्ट हाउस में अंग्रेज हुक्मरानों के अलावा राजा-महराजा भी आकर ठहरते थे, जो जंगल का प्राकृतिक आनंद उठाने के साथ-साथ शिकार का शौक भी पूरा करते थे। अब यह कोठी निष्प्रोज्य पड़ी है। यहां कभी-कभार वन विभाग के अफसर आकर चंद घंटे गुजारते हैं। ग्रंट नंबर 10 प्रधान वीरेंद्र कुमार भार्गव, महुरेना गजराम सिंह, ढ़ाका रामकिशुन विनोद गोयल, हरीकिशन अग्रवाल, गोल्डी गोयल आदि का कहना है कि अगर इसको पर्यटक आवास के रूप में विकसित कर दिया जाए तो वन विभाग की आय बढ़ने के साथ-साथ आसपास के गांवों का विकास भी तेज हो जाएगा। ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा और सैलानी यहां के खूबसूरत नजारे का आनंद ले सकेंगे।
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डीटीआर की किशनपुर संरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण यहां कोई पर्यटक आवास नहीं बनाया जा सकता है। मड़हा में बनी वन विभाग की कोठी वन अधिकारियों के ठहरने में इस्तेमाल होती है। जहां रुककर अफसर जंगल गश्त, दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा और शिकारियों की निगहबानी करते हैं।
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- रमेश कुमार पांडे,फील्ड डाइरेक्टर,दुधवा टाइगर रिजर्व।