{"_id":"5b0081d94f1c1beb7e8b4747","slug":"91526759897-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न डिग्री, न पंजीकरण, धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न डिग्री, न पंजीकरण, धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल
Updated Sun, 20 May 2018 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
19 एलकेएच 453 और 454
न डिग्री, न पंजीकरण, धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल
अधिकारियों की मिलीभगत से मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
ठंडे बस्ते में गया फर्जी अस्पताल के खिलाफ शुरू हुआ अभियान
शिकायतों के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। प्रदेश सरकार मरीजों को सुविधा देने के लिए जहां सख्ती कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से अस्पताल चल रहे हैं। यहीं वजह है कि जिले में फर्जी अस्पतालों का अवैध धंधा फलफूल रहा है। कुछ का पंजीकरण क्लीनिक के नाम पर है तो कुछ बगैर पंजीकरण के ही चल रहे हैं और सभी जगह ओपीडी के साथ प्रसव भी कराए जाते हैं। इन अस्पताल के बोर्डों पर एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम तो अंकित हैं, लेकिन मरीजों का इलाज झोलाछाप ही करते हैं। अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिए करीब छह माह पूर्व सीएचसी अधीक्षकों को इनकी सूची तैयार करने के लिए निर्देशित किया गया था, लेकिन अधीक्षकों ने निरीक्षण मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
.......
जिले में पंजीकृत अस्पताल-115
अवैध रूप से चल रहे अस्पताल- 350
...........
किराए पर डिग्री दे रहे डॉक्टर
एमबीबीएस डॉक्टर ही अस्पताल का पंजीकरण करा सकता है। ऐसे में कुछ लोग एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री लगाकर पंजीकरण करा लेते, जिसके बदले में संबंधित डॉक्टर द्वारा अस्पताल संचालक से महीने व साल में धनराशि वसूली की जाती है। जबकि प्रसव आदि कराने के लिए एमबीबीएस महिला डॉक्टर का होना अनिवार्य है। हांलाकि प्रशिक्षित स्टाफ नर्स से भी काम चल सकता है।
छप्पर में भी चल रहे हैं कई अस्पताल
क्षेत्र में कई अस्पताल ऐसे भी हैं जो छप्पर में चल रहे हैं। यह गंभीर बीमारियों से लेकर आपरेशन तक का ठेका लेते हैं। रानीगंज स्थित एक झोला छाप डाक्टर ने करीब सात साल पहले गोविंदपुर फार्म निवासी एक 55 वर्षीय व्यक्ति का हार्निया के आपरेशन के दौरान उसकी मौत हो गई थी। झंडी में भी एक छप्पर में अस्पताल चल रहा है। वहां के एक बंगाली डाक्टर के इलाज से दो लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में बंगाली डाक्टर तीन दिन हवालात में भी बंद रहे थे।
विज्ञापन
खोखे में चल रहे मेडिकल स्टोर और अस्पताल
अदलाबाद से टहारा बंधा मार्ग पर सड़क किनारे स्थित मूड़ा चौराहे पर कई मेडिकल स्टोर खोखे में चल रहे हैं। यह लोग उसी में बैठकर मरीजों का इलाज भी करते हैं। मजे की बात तो यह है कि कई लोगों ने इन तथाकथित लोगों की शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताते हैं कि यह मेडिकल स्टोर मानकों को भी पूरा नहीं कर रहे हैं, और न ही उनका लाइसेंस है।
ढखेरवा के एक अस्पताल में पड़ा छापा, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
ढखेरवा के एक अस्पताल में करीब छह माह पहले रमियाबेहड सीएचसी प्रभारी डाक्टर सुभाष ने राय हास्पिटल में छापा मारा था। इस दौरान एक आशा बहू प्रसव कराते हुए रंगेहांथ पकड़ी गई थी। अस्पताल के कागज भी नहीं थे, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
--------
फार्मेसिस्ट भी चला रहे कई अस्पताल
रमियाबेहड़ के एक पीएचसी में तैनात एक फार्मेसिस्ट का कस्बा समेत ढखेरवा में आलीशान इमारत में अस्पताल चल रहा है। वह डॉक्टर बनकर दोनों स्थानों पर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। अस्पताल वाली इमारत को बाहर से देखने में घर लगता है। जब अंदर जाकर देखो तो वहां पर करीब आठ बेड पड़े हैं और उनके कंपाउडर उनकी गैरमौजूगी में इलाज करते हैं।
...
पंजीकरण क्लीनिक का, कराते हैं प्रसव
बहुत से अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पंजीकरण क्लीनिक का करवा रखा है। वहां पर ओपीडी के साथ प्रसव भी होता है। इनमें गांव की दाईयां प्रसव कराती है। हांलाकि कई बार असुरक्षित प्रसव होने के कारण जच्चा बच्चा की मौत के भी कई मामले हो चुके हैं।
आशाओं की भी रहती है संलिप्तता
आशाओं को भले ही गर्भवती महिलाओं की देखरेख करने के लए रखा गया हो, लेनिक मोटे कमीशन के लालच में आशाएं गांव की भोली भाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज का झांसा देकर फर्जी अस्पतालों में ले जाती है, जिसमें उन्हें मोटा कमीशन मिलता है।
यह है अस्पताल का मानक
रजिस्ट्रेशन एमबीबीएस डिग्री धारक डॉक्टर के नाम पर होता है। प्रसव के लिए एमबीबीएस महिला डॉक्टर या फिर प्रशिक्षित स्टाफ नर्स, फायर बिग्रेड और प्रदूषण बोर्ड से एनओसी, बिल्डिंग का नक्शा, किराया नामा या मालिकाना हक, कचरा प्रबंध के लिए अलग अलग रंग की बाल्टी आदि होनी चाहिए। मेडिकल स्टोर होने की स्थित में उसका भी पंजीकरण होना चाहिए।
इन लोगों ने की शिकायत
गांव मंझिली पुरवा निवासी सुमनए भगौतीए ?बबियारी निवासी रामसहायए नौगवां निवासी सुलेमानए बिहारी पुरवा निवासी दशरथ समेत कई लोगों ने शिकायत डीएम और सीएमओ समेत कई अधिकारियों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
5555555555555-----------
वर्जन
फर्जी अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिए जल्द ही रणनीति बनाई जाएगी। रही बात सीएचसी अधीक्षकों द्वारा सूची तैयार किए जाने की तो अभी हाल में ही ज्वाइन किया है। सीएचसी अधीक्षकों से जानकारी करके सूची मंगवाई जाएगी, जिससे कार्रवाई की जा सके।
- डॉ.मनोज अग्रवाल, सीएमओ
विज्ञापन
न डिग्री, न पंजीकरण, धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल
अधिकारियों की मिलीभगत से मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
ठंडे बस्ते में गया फर्जी अस्पताल के खिलाफ शुरू हुआ अभियान
शिकायतों के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। प्रदेश सरकार मरीजों को सुविधा देने के लिए जहां सख्ती कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से अस्पताल चल रहे हैं। यहीं वजह है कि जिले में फर्जी अस्पतालों का अवैध धंधा फलफूल रहा है। कुछ का पंजीकरण क्लीनिक के नाम पर है तो कुछ बगैर पंजीकरण के ही चल रहे हैं और सभी जगह ओपीडी के साथ प्रसव भी कराए जाते हैं। इन अस्पताल के बोर्डों पर एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम तो अंकित हैं, लेकिन मरीजों का इलाज झोलाछाप ही करते हैं। अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिए करीब छह माह पूर्व सीएचसी अधीक्षकों को इनकी सूची तैयार करने के लिए निर्देशित किया गया था, लेकिन अधीक्षकों ने निरीक्षण मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
.......
जिले में पंजीकृत अस्पताल-115
अवैध रूप से चल रहे अस्पताल- 350
...........
किराए पर डिग्री दे रहे डॉक्टर
एमबीबीएस डॉक्टर ही अस्पताल का पंजीकरण करा सकता है। ऐसे में कुछ लोग एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री लगाकर पंजीकरण करा लेते, जिसके बदले में संबंधित डॉक्टर द्वारा अस्पताल संचालक से महीने व साल में धनराशि वसूली की जाती है। जबकि प्रसव आदि कराने के लिए एमबीबीएस महिला डॉक्टर का होना अनिवार्य है। हांलाकि प्रशिक्षित स्टाफ नर्स से भी काम चल सकता है।
विज्ञापन
छप्पर में भी चल रहे हैं कई अस्पताल
क्षेत्र में कई अस्पताल ऐसे भी हैं जो छप्पर में चल रहे हैं। यह गंभीर बीमारियों से लेकर आपरेशन तक का ठेका लेते हैं। रानीगंज स्थित एक झोला छाप डाक्टर ने करीब सात साल पहले गोविंदपुर फार्म निवासी एक 55 वर्षीय व्यक्ति का हार्निया के आपरेशन के दौरान उसकी मौत हो गई थी। झंडी में भी एक छप्पर में अस्पताल चल रहा है। वहां के एक बंगाली डाक्टर के इलाज से दो लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में बंगाली डाक्टर तीन दिन हवालात में भी बंद रहे थे।
विज्ञापन
खोखे में चल रहे मेडिकल स्टोर और अस्पताल
अदलाबाद से टहारा बंधा मार्ग पर सड़क किनारे स्थित मूड़ा चौराहे पर कई मेडिकल स्टोर खोखे में चल रहे हैं। यह लोग उसी में बैठकर मरीजों का इलाज भी करते हैं। मजे की बात तो यह है कि कई लोगों ने इन तथाकथित लोगों की शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताते हैं कि यह मेडिकल स्टोर मानकों को भी पूरा नहीं कर रहे हैं, और न ही उनका लाइसेंस है।
ढखेरवा के एक अस्पताल में पड़ा छापा, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
ढखेरवा के एक अस्पताल में करीब छह माह पहले रमियाबेहड सीएचसी प्रभारी डाक्टर सुभाष ने राय हास्पिटल में छापा मारा था। इस दौरान एक आशा बहू प्रसव कराते हुए रंगेहांथ पकड़ी गई थी। अस्पताल के कागज भी नहीं थे, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
--------
फार्मेसिस्ट भी चला रहे कई अस्पताल
रमियाबेहड़ के एक पीएचसी में तैनात एक फार्मेसिस्ट का कस्बा समेत ढखेरवा में आलीशान इमारत में अस्पताल चल रहा है। वह डॉक्टर बनकर दोनों स्थानों पर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। अस्पताल वाली इमारत को बाहर से देखने में घर लगता है। जब अंदर जाकर देखो तो वहां पर करीब आठ बेड पड़े हैं और उनके कंपाउडर उनकी गैरमौजूगी में इलाज करते हैं।
...
पंजीकरण क्लीनिक का, कराते हैं प्रसव
बहुत से अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पंजीकरण क्लीनिक का करवा रखा है। वहां पर ओपीडी के साथ प्रसव भी होता है। इनमें गांव की दाईयां प्रसव कराती है। हांलाकि कई बार असुरक्षित प्रसव होने के कारण जच्चा बच्चा की मौत के भी कई मामले हो चुके हैं।
आशाओं की भी रहती है संलिप्तता
आशाओं को भले ही गर्भवती महिलाओं की देखरेख करने के लए रखा गया हो, लेनिक मोटे कमीशन के लालच में आशाएं गांव की भोली भाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज का झांसा देकर फर्जी अस्पतालों में ले जाती है, जिसमें उन्हें मोटा कमीशन मिलता है।
यह है अस्पताल का मानक
रजिस्ट्रेशन एमबीबीएस डिग्री धारक डॉक्टर के नाम पर होता है। प्रसव के लिए एमबीबीएस महिला डॉक्टर या फिर प्रशिक्षित स्टाफ नर्स, फायर बिग्रेड और प्रदूषण बोर्ड से एनओसी, बिल्डिंग का नक्शा, किराया नामा या मालिकाना हक, कचरा प्रबंध के लिए अलग अलग रंग की बाल्टी आदि होनी चाहिए। मेडिकल स्टोर होने की स्थित में उसका भी पंजीकरण होना चाहिए।
इन लोगों ने की शिकायत
गांव मंझिली पुरवा निवासी सुमनए भगौतीए ?बबियारी निवासी रामसहायए नौगवां निवासी सुलेमानए बिहारी पुरवा निवासी दशरथ समेत कई लोगों ने शिकायत डीएम और सीएमओ समेत कई अधिकारियों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
5555555555555-----------
वर्जन
फर्जी अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिए जल्द ही रणनीति बनाई जाएगी। रही बात सीएचसी अधीक्षकों द्वारा सूची तैयार किए जाने की तो अभी हाल में ही ज्वाइन किया है। सीएचसी अधीक्षकों से जानकारी करके सूची मंगवाई जाएगी, जिससे कार्रवाई की जा सके।
- डॉ.मनोज अग्रवाल, सीएमओ