{"_id":"631f81ff9c18417cf20d16d9","slug":"80-old-people-forced-to-live-lonely-life-in-old-age-ashram-lakhimpur-news-bly497395177","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीते जी मां-बाप की उपेक्षा, मरने के बाद करेंगे श्राद्ध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीते जी मां-बाप की उपेक्षा, मरने के बाद करेंगे श्राद्ध
विज्ञापन
वृद्धा आश्रम में बैठे घर से निष्कासित वृद्ध्
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। पितृपक्ष चल रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐेसे भी हैं, जिन्होंने माता-पिता से सब कुछ छीनकर उन्हें घर से निकाल दिया है। ऐसे वृद्ध अपना भरापूरा परिवार छोड़कर वृद्धाश्रम में एकाकी जीवन जी रहे हैं।
ऐरा रोड पर सलेमपुर कोन में संचालित वृद्घा आश्रम में कुल 80 वृद्घ हैं। जिसमें 32 महिलाएं और 48 पुरुष हैं। यह सभी अपने परिजन की उपेक्षा व तिरस्कार के कारण यहां रहने को विवश हैं। यहां लखीमपुर के अलावा सीतापुर जिले के लोग भी हैं। मोहल्ला शिवपुरी निवासी एक वृद्घ महिला तीन साल से यहां रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि उनका एक जवान बेटा है, लेकिन वह नशे का आदी है। वह आए-दिन झगड़ा करता है। उनकी पेंशन का पैसा भी ले लेता है। परेशान होकर वह वृद्घा आश्रम में आकर रहने लगीं।
छाउछ निवासी वृद्घ महिला की एक बेटी की शादी होने के बाद उसके देवर आदि ने घर बेच दिया और उसे लाचार अवस्था में रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने रेस्क्यू कर उन्हें वृद्ध आश्रम भेजा। राजगढ़ निवासी महिला का मकान उसके पति ने बेच दिया। पति की मृत्यु के बाद से वह वृद्घा आश्रम में जीवन व्यतीत कर रही हैं।
विज्ञापन
चार साल से आश्रम में रह रहे खीरी थाना क्षेत्र के गांव चौफेरी निवासी वृद्घ के दो लड़केेे हैं। जिन्होंने अपने पिता के साथ मारपीट करके जमीन बेच डाली। इसके बाद पिता को घर से निकाल दिया। शहर से सटे गांव मीरपुर निवासी वृद्घ की बेटी ने अपने पिता के साथ ही धोखाधड़ी कर डाली। रुंधे गले से वृद्घ ने बताया कि उसका घर बेटी ने ही बेच दिया। इसके बाद से वह वृद्घ आश्रम में रहने आ गए।
‘यहां रह रहे वृद्घ जनों में लखीमपुर के अलावा सीतापुर के लोग भी हैं। इन्हें समाजसेवी यहां छोड़ गए हैं या फिर पुलिस द्वारा रेस्क्यू कर आश्रम में लाए गए हैं। कई वृद्घ जन ऐसे हैं, जो अपने घर का पता भी नहीं बता पा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा मिलने वाले फंड से इनके दैनिक उपयोगी वस्तुएं व दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। कभी कभार समाजसेेवी भी सहयोग कर देते हैं।’
- पंकज भदौरिया, संचालक, वृद्घा आश्रम
विज्ञापन
ऐरा रोड पर सलेमपुर कोन में संचालित वृद्घा आश्रम में कुल 80 वृद्घ हैं। जिसमें 32 महिलाएं और 48 पुरुष हैं। यह सभी अपने परिजन की उपेक्षा व तिरस्कार के कारण यहां रहने को विवश हैं। यहां लखीमपुर के अलावा सीतापुर जिले के लोग भी हैं। मोहल्ला शिवपुरी निवासी एक वृद्घ महिला तीन साल से यहां रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि उनका एक जवान बेटा है, लेकिन वह नशे का आदी है। वह आए-दिन झगड़ा करता है। उनकी पेंशन का पैसा भी ले लेता है। परेशान होकर वह वृद्घा आश्रम में आकर रहने लगीं।
विज्ञापन
छाउछ निवासी वृद्घ महिला की एक बेटी की शादी होने के बाद उसके देवर आदि ने घर बेच दिया और उसे लाचार अवस्था में रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने रेस्क्यू कर उन्हें वृद्ध आश्रम भेजा। राजगढ़ निवासी महिला का मकान उसके पति ने बेच दिया। पति की मृत्यु के बाद से वह वृद्घा आश्रम में जीवन व्यतीत कर रही हैं।
विज्ञापन
चार साल से आश्रम में रह रहे खीरी थाना क्षेत्र के गांव चौफेरी निवासी वृद्घ के दो लड़केेे हैं। जिन्होंने अपने पिता के साथ मारपीट करके जमीन बेच डाली। इसके बाद पिता को घर से निकाल दिया। शहर से सटे गांव मीरपुर निवासी वृद्घ की बेटी ने अपने पिता के साथ ही धोखाधड़ी कर डाली। रुंधे गले से वृद्घ ने बताया कि उसका घर बेटी ने ही बेच दिया। इसके बाद से वह वृद्घ आश्रम में रहने आ गए।
‘यहां रह रहे वृद्घ जनों में लखीमपुर के अलावा सीतापुर के लोग भी हैं। इन्हें समाजसेवी यहां छोड़ गए हैं या फिर पुलिस द्वारा रेस्क्यू कर आश्रम में लाए गए हैं। कई वृद्घ जन ऐसे हैं, जो अपने घर का पता भी नहीं बता पा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा मिलने वाले फंड से इनके दैनिक उपयोगी वस्तुएं व दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। कभी कभार समाजसेेवी भी सहयोग कर देते हैं।’
- पंकज भदौरिया, संचालक, वृद्घा आश्रम

वृद्धा आश्रम में बैठी वृद्ध् महिलाएं- फोटो : LAKHIMPUR