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दुधवा में घास के मैदानों का हो रहा वैज्ञानिक प्रबंधन

Tue, 15 Jan 2019 04:53 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jan 2019 04:53 PM IST
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दुधवा में घास के मैदानों का हो रहा वैज्ञानिक प्रबंधन

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दुधवा में खाद्य शृंखला मजबूत करने की मुहिम शुरू

लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के प्राकृतिकवास में सुधार लाने और वन्यजीवों की खाद्य शृंखला मजबूत बनाने के लिए फाटा प्रबंधन का काम तेज हो गया है। हाल ही में हुई घास मैदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर हुई कार्यशाला में विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर फाटा प्रबंधन किया जा रहा है। पहले चरण में किशनपुर सेंक्चुरी टाइगर रिजर्व के सभी घास मैदानों में मिलने वाली विभिन्न घास प्रजातियों के अध्ययन के बाद उनके वैज्ञानिक प्रबंधन का काम शुरू किया गया है।
फाटा प्रबंधन के पहले चरण में घास के मैदानों को सूचीबद्ध कर उनमें से एक एक हिस्से का प्रबंधन के लिए चयन किया गया। घास मैदान में मिलने वाली उपयोगी और अनुपयोगी घास प्रजातियों को चिह्नित कर अनुपयोगी घासों को हटाने और उपयोगी घासों को बढ़ाने का काम शुरू किया गया है। इसके लिए घास काटने के बाद मैदानों की ट्रैक्टर से जुताई की जा रही है। मैदान जुताई के बाद उगने वाली घासों का अध्ययन करने के बाद अनुपयोगी घासें हटाने का काम शुरू होगा।
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किशनपुर सेंक्चुरी के रेशम फांटा, नाचन फांटा, झादीताल फांटा, बेलडंडा, किशनपुर नंबर रोड फांटा, मचान रोड फांटा, कठपुलिया फाटा, चलतुआ फाटा, उल्ल कंट्रोल फांटा, सुल्तानपुर फाटा, फूटाकुंआ फाटा आदि घास के मैदानों में घास कटाई का काम पूरा हो चुका है। अब इन मैदानों की ट्रैक्टर से जुताई का काम चल रहा है। फाटा प्रबंधन के अगले चरण में जुताई के बाद घास उगने पर अनुपयोगी घासों को हटाने का काम शुरू किया जाएगा।
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दुधवा में हैं घास की कुल 77 प्रजातियां
दुधवा टाइगर रिजर्व के कुल 20 फीसदी हिस्से में घास के मैदान हैं। इनमें 77 प्रजातियों की घासें पाई जाती हैं। इन घासों को दो श्रेणियों में रखा गया है। अपलैंड ग्रास और लोलैंड ग्रास, लोलैंड ग्रास को वेटग्रास भी कहा जाता है। लोलैंड ग्रास को शाकाहारी जीव ज्यादा पसंद करते हैं। लोलैंड ग्रास की अधिकता के कारण ही यहां हिरन की विभिन्न प्रजातियों की बहुतायत है। अपलैंड ग्रास कांस, मूंज और नरकुल आदि शामिल हैं। यह घासें बाघों का पसंदीदा प्राकृतिक आवास होती हैं। हाथी जैसे बड़े जीव इन घासों को चाव से खाते हैं।

अनुपयोगी घासों को तेजी से होता है फैलाव
दुधवा टाइगर रिजर्व में पार्थेनियम जैसी घासों का तेजी से विस्तार हो रहा है। पार्थेनियम घास और लेंटाना जैसी झाड़ियों को शाकाहारी जीव नहीं खाते। यह घासें दूसरी घासों के विस्तार में बाधक होती हैं। फाटा के वैज्ञानिक प्रबंधन के तहत इन घासों को हटाया जाना है। उनकी जगह उपयोगी घासों को उगाने का प्रयास होगा।


दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की खाद्य श्रंखला को मजबूत ेकरने के लिए वैज्ञानिक ढंग से फाटा प्रबंधन किया जा रहा है। इससे दुधवा टाइगर रिजर्व की खाद्य शृंखला तो मजबूत होगी ही साथ मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं में भी कमी लाई जा सकेगी।
- रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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