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ब्रेन स्टार्मिंग सेशन और पोस्टर प्रतियोगिता हुई
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लखीमपुर खीरी। युवराजदत्त महाविद्यालय के शिक्षक शिक्षा विभाग में दो दिवसीय हमारा पर्यावरण विषय पर ब्रेन स्टार्मिंग सेशन एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डीएन मालपानी और शिक्षक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल द्विवेदी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। सरस्वती वंदना बीएड की छात्रा लक्ष्मी और सृष्टि निगम ने की।
कार्यक्रम में मयंक चड्ढा ने भूमंडलीय उष्णता पर अपने विचार रखे। आदित्य शर्मा ने वायु प्रदूषण की समस्या जैसे मानव स्वास्थ्य और वन्यजीवों पर इसके दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला। इसी क्रम में शशि शेखर शुक्ला ने बताया कि अधिक से अधिक पेड़ लगाकर प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है। लवकुश पांडेय प्राकृतिक संसाधनों के कम दोहन और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। लक्ष्मी कश्यप ने पराबैगनी किरणें और उनसे होने वाली हानि के बारे में बताया।
वनस्पति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर सत्येंद्र पाल सिंह वायु, जल, मृदा और रेडियोधर्मी प्रदूषण पर चर्चा की। अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपक बाजपेई ने सतत विकास, ग्रीन डीजीपी पर प्रकाश डाला। राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार ने ईवोल्यूशन, इकोलॉजी इन्वायरमेंट बिंदुओं पर चर्चा की। शिक्षक शिक्षा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मनोज मिश्र ने भारतीय परंपराओं के पर्यावरण के संबंध में वैदिक मंत्रों में पर्यावरण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. सत्यनाम ने बताया कि दर्शन की उत्पत्ति आश्चर्य से होती है। भौतिक विज्ञान के विभागाघ्यक्ष डॉ. ईष्टविभु ने पर्यावरण के भौतिक, जैविक और ऊर्जा संबंधों पर प्रकाश डाला। प्राचार्य डॉ. डीएन मालपानी ने बताया कि सोच में परिवर्तन बहुत जरूरी है। उन्होंने पर्यावरणीय समस्याओं के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
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कार्यक्रम के अंत में शिक्षक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल द्विवेदी ने भगवत गीत में वर्णित कर्म, अकर्म, एवं विकर्म में भेद बताते हुए अच्छे कर्म अपनाने पर बल दिया। जिससे स्वस्थ पर्यावरण का विकास हो सके।
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कार्यक्रम में मयंक चड्ढा ने भूमंडलीय उष्णता पर अपने विचार रखे। आदित्य शर्मा ने वायु प्रदूषण की समस्या जैसे मानव स्वास्थ्य और वन्यजीवों पर इसके दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला। इसी क्रम में शशि शेखर शुक्ला ने बताया कि अधिक से अधिक पेड़ लगाकर प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है। लवकुश पांडेय प्राकृतिक संसाधनों के कम दोहन और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। लक्ष्मी कश्यप ने पराबैगनी किरणें और उनसे होने वाली हानि के बारे में बताया।
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वनस्पति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर सत्येंद्र पाल सिंह वायु, जल, मृदा और रेडियोधर्मी प्रदूषण पर चर्चा की। अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपक बाजपेई ने सतत विकास, ग्रीन डीजीपी पर प्रकाश डाला। राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार ने ईवोल्यूशन, इकोलॉजी इन्वायरमेंट बिंदुओं पर चर्चा की। शिक्षक शिक्षा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मनोज मिश्र ने भारतीय परंपराओं के पर्यावरण के संबंध में वैदिक मंत्रों में पर्यावरण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. सत्यनाम ने बताया कि दर्शन की उत्पत्ति आश्चर्य से होती है। भौतिक विज्ञान के विभागाघ्यक्ष डॉ. ईष्टविभु ने पर्यावरण के भौतिक, जैविक और ऊर्जा संबंधों पर प्रकाश डाला। प्राचार्य डॉ. डीएन मालपानी ने बताया कि सोच में परिवर्तन बहुत जरूरी है। उन्होंने पर्यावरणीय समस्याओं के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
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कार्यक्रम के अंत में शिक्षक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल द्विवेदी ने भगवत गीत में वर्णित कर्म, अकर्म, एवं विकर्म में भेद बताते हुए अच्छे कर्म अपनाने पर बल दिया। जिससे स्वस्थ पर्यावरण का विकास हो सके।