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पीसीएफ के क्रय केन्द्रों की जांच के आदेश
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:20 AM IST
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किसानों का 300 लाख रुपये भुगतान एजेंसी पर अटका
पीसीएफ के क्रय केन्द्रों की जांच के आदेश
19006 क्विंटल गेहूं की डिलीवरी न करने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। किसानों का गेहूं खरीदकर उसे एफसीआई में डिलीवरी न किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने सरकारी एजेंसी पीसीएफ के क्रय केन्द्रों की जांच के आदेश दिए हैं। डिलीवरी करने को शेष 19006 क्विंटल गेहूं की कीमत तीन करोड़ 32 लाख 60 हजार 500 रुपये है, जबकि किसानों का 300 लाख (तीन करोड़) रुपये भुगतान पीसीएफ पर बकाया है।
रबी विपणन वर्ष 2018-19 में सरकारी एजेंसियों ने लक्ष्य दो लाख सात सौ मीट्रिक टन के सापेक्ष दो लाख दो हजार 72 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। किसानों से गेहूं खरीद 15 जून 2018 को बंद हो गई थी। इसके बाद पीसीएफ को छोड़कर अन्य एजेंसियों ने खरीदे गेहूं की डिलीवरी केंद्रीय पूल की एजेंसी एफसीआई को कर दी है। पीसीएफ ने 19006 क्विंटल गेहूं की डिलीवरी एफसीआई में नहीं की है और न ही उनके क्रय केंद्रों पर गेहूं रखा है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय द्वारा कई बार नोटिसों के बावजूद पीसीएफ ने कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। क्रय केन्द्रों की सूची उपलब्ध कराने में काफी टाल मटोल की, जिससे मामला लखनऊ स्तर के अधिकारियों के संज्ञान में आ गया। जबकि जिले के कुछ अधिकारी मामले को किसी तरह दबाने में जुटे रहे, ताकि कोई कार्रवाई होने से पहले पीसीएफ बकाया गेहूं को डिलीवर कर सके। गेहूं की डिलीवरी में विफल होने पर आखिरकार पीसीएफ पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है, क्योंकि डीएम ने क्रय केन्द्रों पर खरीदे गए गेहूं और भुगतान समेत अन्य बिंदुओं पर विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
दो तरह की टीमें करेंगी जांच
पीसीएफ के क्रय केंद्रों की जांच के लिए दो तरह की टीमें बनाई गई हैं। पहली टीम में क्षेत्रीय विपणन अधिकारी (एएमओ) और एसडीएम को शामिल किया गया है, जिसमें एसडीएम अपनी ओर से नायब तहसीलदार को नामित कर सकते हैं। दूसरी टीम एआर कोआपरेटिव मंगल सिंह के नेतृत्व में जांच करेगी, जिसमें एडीसीओ और जिला प्रबंधक पीसीएफ शामिल होंगे। दोनों टीमों को एक सप्ताह में जांच करके रिपोर्ट डीएम को उपलब्ध करानी होगी।
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वर्जन.........
गेहूं की डिलीवरी एफसीआई डिपो में किए जाने की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद पीसीएफ ने करीब 19 हजार क्विंटल गेहूं का उतार नहीं कराया है। इसलिए क्रय केंद्रों की जांच कराई जा रही है कि आखिर गेहूं गया कहां। जांच रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, जिसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अरुण कुमार सिंह, एडीएम/जिला खरीद अधिकारी
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पीसीएफ के क्रय केन्द्रों की जांच के आदेश
19006 क्विंटल गेहूं की डिलीवरी न करने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। किसानों का गेहूं खरीदकर उसे एफसीआई में डिलीवरी न किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने सरकारी एजेंसी पीसीएफ के क्रय केन्द्रों की जांच के आदेश दिए हैं। डिलीवरी करने को शेष 19006 क्विंटल गेहूं की कीमत तीन करोड़ 32 लाख 60 हजार 500 रुपये है, जबकि किसानों का 300 लाख (तीन करोड़) रुपये भुगतान पीसीएफ पर बकाया है।
रबी विपणन वर्ष 2018-19 में सरकारी एजेंसियों ने लक्ष्य दो लाख सात सौ मीट्रिक टन के सापेक्ष दो लाख दो हजार 72 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। किसानों से गेहूं खरीद 15 जून 2018 को बंद हो गई थी। इसके बाद पीसीएफ को छोड़कर अन्य एजेंसियों ने खरीदे गेहूं की डिलीवरी केंद्रीय पूल की एजेंसी एफसीआई को कर दी है। पीसीएफ ने 19006 क्विंटल गेहूं की डिलीवरी एफसीआई में नहीं की है और न ही उनके क्रय केंद्रों पर गेहूं रखा है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय द्वारा कई बार नोटिसों के बावजूद पीसीएफ ने कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। क्रय केन्द्रों की सूची उपलब्ध कराने में काफी टाल मटोल की, जिससे मामला लखनऊ स्तर के अधिकारियों के संज्ञान में आ गया। जबकि जिले के कुछ अधिकारी मामले को किसी तरह दबाने में जुटे रहे, ताकि कोई कार्रवाई होने से पहले पीसीएफ बकाया गेहूं को डिलीवर कर सके। गेहूं की डिलीवरी में विफल होने पर आखिरकार पीसीएफ पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है, क्योंकि डीएम ने क्रय केन्द्रों पर खरीदे गए गेहूं और भुगतान समेत अन्य बिंदुओं पर विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
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दो तरह की टीमें करेंगी जांच
पीसीएफ के क्रय केंद्रों की जांच के लिए दो तरह की टीमें बनाई गई हैं। पहली टीम में क्षेत्रीय विपणन अधिकारी (एएमओ) और एसडीएम को शामिल किया गया है, जिसमें एसडीएम अपनी ओर से नायब तहसीलदार को नामित कर सकते हैं। दूसरी टीम एआर कोआपरेटिव मंगल सिंह के नेतृत्व में जांच करेगी, जिसमें एडीसीओ और जिला प्रबंधक पीसीएफ शामिल होंगे। दोनों टीमों को एक सप्ताह में जांच करके रिपोर्ट डीएम को उपलब्ध करानी होगी।
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गेहूं की डिलीवरी एफसीआई डिपो में किए जाने की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद पीसीएफ ने करीब 19 हजार क्विंटल गेहूं का उतार नहीं कराया है। इसलिए क्रय केंद्रों की जांच कराई जा रही है कि आखिर गेहूं गया कहां। जांच रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, जिसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अरुण कुमार सिंह, एडीएम/जिला खरीद अधिकारी