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अग्निकांडों में झुलस कर मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई चार
Updated Tue, 15 May 2018 06:56 PM IST
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15 एलकेएच 20
अग्निकांड में तीन और लोगों की जान गई
सोमवार को भी हुई थी एक ग्रामीण की जलकर मौत
आंधी के दौरान नरई फूंकने के आरोपी पिता, उसके दो पुत्रों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
तिकुनियां। कोतवाली क्षेत्र के तीन गांवों में रविवार की शाम लगी आग में झुलसे एक दंपति और एक दिव्यांग की आधी रात मौत हो गई। अब इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। उधर कोतवाली तिकुनियां पुलिस ने गेहूं के खेत में नरई फूंकने के आरोपी किसान और उसके दो पुत्रों के खिलाफ आगजनी समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मंगलवार को चालान कर दिया।
रविवार की रात आई तेज आंधी के दौरान गांव खमरिया कोईलार, सुथना बरसोला और केवटली में भीषण आग लगी थी। रात होने के कारण सभी ग्रामीण अपने घरों में थे। अचानक आग लगने से लोग कुछ समझ नहीं पाए। इससे समूचा गांव राख के ढेर में बदल गया। इस अग्निकांड में गांव खमरिया निवासी 55 वर्षीय मोहम्मद रफीक समेत 10 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। बड़ी संख्या में मुर्गी, बकरी व अन्य पशुओं की भी जलकर मौत हो गई थी। कई पशु गंभीर रूप से झुलस गए थे। झुलसे मोहम्मद रफीक ने जिला अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया था, जबकि अन्य झुलसे लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार की रात जिला अस्पताल में भर्ती गांव खमरिया निवासी 25 वर्षीय अहमद रसूल, उसकी 23 वर्षीय पत्नी कुसबुननिशा और गांव सुथना बरसोला निवासी दिव्यांग 65 वर्षीय श्रीकृष्ण की मौत हो गई। इससे अग्निकांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। एएसपी घनश्याम चौरसिया मोरचरी पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। कोतवाल अजय कुमार सिंह ने बताया कि अग्निपीड़ित रामनिवास की ओर से पुलिस ने गांव खमरिया निवासी सईद, गउस के पुत्र सुहेल और शोएब के खिलाफ धारा 336, 337, 338, 352, 304, 427 सहित अन्य कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। कोतवाल अजय कुमार सिंह ने बताया कि शोएब ने अपने खेत में खड़ी गेहूं की नरई में आग लगाई थी, इसी दौरान आई आंधी से दुर्घटना हो गई। आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने मंगलवार को चालान भेजा है।
15 एलकेएच 17 से 19
मौसम खराब देख ग्रामीणों ने नरई जलाने से किया था मना
अमर उजाला ब्यूरो
तिकुनिया। गांव सुथना बरसोला निवासी सईद अगर गांव के लोगों की बात मान लेते और खराब मौसम को देखते हुए नरई में आग न लगाते तो शायद अग्निकांड टाला जा सकता था, लेकिन खेत मालिक की जिद ने तीन गांवों को बर्बाद कर दिया। साथ ही चार लोगों की जिंदगी भी समाप्त कर दी।
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नरई से बढ़ रहे अग्निकांडों को देखते हुए सरकार ने भी नरई जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। नरई जलाने वाले लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई के भी निर्देश दे रखे हैं, लेकिन इन निर्देशों का पालन राजस्व और पुलिस महकमा नहीं करा पा रहा है। गांव सुथना बरसोला निवासी रामनिवास सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि रविवार की शाम मौसम काफी खराब था। शाम करीब सात बजे गांव का सईद अपने दो पुत्रों के साथ गांव से कुछ दूर स्थित खेत पर नरई जलाने पहुंचा, जिसका उन लोगों ने यह कहते हुए विरोध किया कि मौसम खराब है, इसे अभी न जलाएं। इस पर सईद मारपीट पर उतर आया। रात करीब आठ बजे अचानक आई तेज आंधी से खेत से उड़ी चिंगारी लोगों के घरों पर आ गिरी, जिससे भीषण अग्निकांड हुआ।
10 साल पहले अग्निकांड में गईं थी पांच जान
कोतवाली तिकुनियां क्षेत्र के तीन गांवों में लगी आग का मंजर देख लोग अब भी दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि करीब 10 साल पहले इसी कोतवाली तिकुनियां के सिसवारी गांव में भीषण आग लगी थी, जिसमें पांच लोगों की झुलसकर मौत हो गई थी। इसके बाद क्षेत्र में आग तो कई बार लगी, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं हुई। उधर इस अग्निकांड में दंपति समेत चार लोगों की मौत से क्षेत्र में मातमी सन्नाटा है।
कोई तालाब में तो कोई डेहरी के नीचे छिपा
ग्राम निबोरिया निवासी माता दीन ने बताया आंधी के समय लगी आग से बचने के लिए उनका 15 साल का किशोर रमेश डेहरिया के नीचे घुस गया। उसकी मां और भाई ने उसे बमुश्किल खोजा और घर के बाहर निकाला। खमरिया कोइलार गांव के बाहर पास में ही तालाब है। जब आग लगी तो लपटों से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागे। कई लोग तो तालाब में कूद गए, लेकिन गनीमत यह रही कि तालाब में पानी कम था, नहीं तो कई अन्य लोगों की जान जा सकती थी।
समाजसेवी संस्थाओं ने मदद को बढ़ाया हाथ
आग से हुई भारी तबाही और चार लोगों की मौत से सभी लोग आहत है। स्वंयसेवी संस्थानों ने अग्निपीड़ितों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया हैं। मंगलवार को कई लोग गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया। जिला पंचायत सदस्य सुरेश तलवार ने अग्निपीड़ितों को त्रिपाल दिए। गायत्री परिवार के लक्ष्मी नारायण वर्मा ने भोजन और वस्त्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
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अग्निकांड में तीन और लोगों की जान गई
सोमवार को भी हुई थी एक ग्रामीण की जलकर मौत
आंधी के दौरान नरई फूंकने के आरोपी पिता, उसके दो पुत्रों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
तिकुनियां। कोतवाली क्षेत्र के तीन गांवों में रविवार की शाम लगी आग में झुलसे एक दंपति और एक दिव्यांग की आधी रात मौत हो गई। अब इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। उधर कोतवाली तिकुनियां पुलिस ने गेहूं के खेत में नरई फूंकने के आरोपी किसान और उसके दो पुत्रों के खिलाफ आगजनी समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मंगलवार को चालान कर दिया।
रविवार की रात आई तेज आंधी के दौरान गांव खमरिया कोईलार, सुथना बरसोला और केवटली में भीषण आग लगी थी। रात होने के कारण सभी ग्रामीण अपने घरों में थे। अचानक आग लगने से लोग कुछ समझ नहीं पाए। इससे समूचा गांव राख के ढेर में बदल गया। इस अग्निकांड में गांव खमरिया निवासी 55 वर्षीय मोहम्मद रफीक समेत 10 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। बड़ी संख्या में मुर्गी, बकरी व अन्य पशुओं की भी जलकर मौत हो गई थी। कई पशु गंभीर रूप से झुलस गए थे। झुलसे मोहम्मद रफीक ने जिला अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया था, जबकि अन्य झुलसे लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार की रात जिला अस्पताल में भर्ती गांव खमरिया निवासी 25 वर्षीय अहमद रसूल, उसकी 23 वर्षीय पत्नी कुसबुननिशा और गांव सुथना बरसोला निवासी दिव्यांग 65 वर्षीय श्रीकृष्ण की मौत हो गई। इससे अग्निकांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। एएसपी घनश्याम चौरसिया मोरचरी पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। कोतवाल अजय कुमार सिंह ने बताया कि अग्निपीड़ित रामनिवास की ओर से पुलिस ने गांव खमरिया निवासी सईद, गउस के पुत्र सुहेल और शोएब के खिलाफ धारा 336, 337, 338, 352, 304, 427 सहित अन्य कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। कोतवाल अजय कुमार सिंह ने बताया कि शोएब ने अपने खेत में खड़ी गेहूं की नरई में आग लगाई थी, इसी दौरान आई आंधी से दुर्घटना हो गई। आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने मंगलवार को चालान भेजा है।
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मौसम खराब देख ग्रामीणों ने नरई जलाने से किया था मना
अमर उजाला ब्यूरो
तिकुनिया। गांव सुथना बरसोला निवासी सईद अगर गांव के लोगों की बात मान लेते और खराब मौसम को देखते हुए नरई में आग न लगाते तो शायद अग्निकांड टाला जा सकता था, लेकिन खेत मालिक की जिद ने तीन गांवों को बर्बाद कर दिया। साथ ही चार लोगों की जिंदगी भी समाप्त कर दी।
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नरई से बढ़ रहे अग्निकांडों को देखते हुए सरकार ने भी नरई जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। नरई जलाने वाले लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई के भी निर्देश दे रखे हैं, लेकिन इन निर्देशों का पालन राजस्व और पुलिस महकमा नहीं करा पा रहा है। गांव सुथना बरसोला निवासी रामनिवास सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि रविवार की शाम मौसम काफी खराब था। शाम करीब सात बजे गांव का सईद अपने दो पुत्रों के साथ गांव से कुछ दूर स्थित खेत पर नरई जलाने पहुंचा, जिसका उन लोगों ने यह कहते हुए विरोध किया कि मौसम खराब है, इसे अभी न जलाएं। इस पर सईद मारपीट पर उतर आया। रात करीब आठ बजे अचानक आई तेज आंधी से खेत से उड़ी चिंगारी लोगों के घरों पर आ गिरी, जिससे भीषण अग्निकांड हुआ।
10 साल पहले अग्निकांड में गईं थी पांच जान
कोतवाली तिकुनियां क्षेत्र के तीन गांवों में लगी आग का मंजर देख लोग अब भी दहशत में हैं। लोगों का कहना है कि करीब 10 साल पहले इसी कोतवाली तिकुनियां के सिसवारी गांव में भीषण आग लगी थी, जिसमें पांच लोगों की झुलसकर मौत हो गई थी। इसके बाद क्षेत्र में आग तो कई बार लगी, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं हुई। उधर इस अग्निकांड में दंपति समेत चार लोगों की मौत से क्षेत्र में मातमी सन्नाटा है।
कोई तालाब में तो कोई डेहरी के नीचे छिपा
ग्राम निबोरिया निवासी माता दीन ने बताया आंधी के समय लगी आग से बचने के लिए उनका 15 साल का किशोर रमेश डेहरिया के नीचे घुस गया। उसकी मां और भाई ने उसे बमुश्किल खोजा और घर के बाहर निकाला। खमरिया कोइलार गांव के बाहर पास में ही तालाब है। जब आग लगी तो लपटों से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागे। कई लोग तो तालाब में कूद गए, लेकिन गनीमत यह रही कि तालाब में पानी कम था, नहीं तो कई अन्य लोगों की जान जा सकती थी।
समाजसेवी संस्थाओं ने मदद को बढ़ाया हाथ
आग से हुई भारी तबाही और चार लोगों की मौत से सभी लोग आहत है। स्वंयसेवी संस्थानों ने अग्निपीड़ितों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया हैं। मंगलवार को कई लोग गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया। जिला पंचायत सदस्य सुरेश तलवार ने अग्निपीड़ितों को त्रिपाल दिए। गायत्री परिवार के लक्ष्मी नारायण वर्मा ने भोजन और वस्त्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।