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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   " The impression of the state budget choice "

‘प्रदेश के बजट पर चुनाव की छाप’

Tue, 24 Feb 2015 07:47 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Tue, 24 Feb 2015 07:47 PM IST
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राजनीति के जानकार और अर्थशास्त्री मानते हैं कि यूपी सरकार का वर्ष 2015-16 के लिए पेश किया गया बजट वर्ष 2017 में होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट किसानों और महिलाओं पर केंद्र्रित है। प्रदेश सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष को किसान वर्ष घोषित किया है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट में जो प्रावधान किए हैं उससे भविष्य में अच्छे परिणाम आ सकते हैं। कृषि की उच्च शिक्षा के लिए जिले के जमनाबाद फार्म में चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के आउट कैंपस की स्थापना को 46 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह आउट कैंपस कृषि शिक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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‘बजट लोकलुभावन’
उत्तर प्रदेश के बजट में आने वाले विधानसभा चुनाव की झलक दिखाई पड़ रही है। बजट को लोकलुभावन बनाने का प्रयास किया गया है। महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। 2100 मेगावाट बिजली उत्पादन और मैट्रो आदि के जरिए आधारभूत ढंाचे को मजबूत करने का प्रयास किया गया है उससे प्रदेश को दीर्घकालिक फायदा मिलने की उम्मीद है।
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-डॉ. ज्योति पंत, प्राध्यापक अर्थशास्त्र, वाईडी कॉलेज
‘किसानों को राहत’
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015-16 के बजट में किसानों को राहत देने का प्रयास किया है, लेकिन यह तात्कालिक है इससे दीर्घकालीन फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है। इस बजट में नारी सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। अपने टारगेट वोटों को लुभाने का प्रयास भी किया गया है।
-डॉ. डीएन मालपानी, प्राध्यापक वाणिज्य विभाग
‘सिंचाई पर ध्यान’
प्रदेश सरकार का बजट किसानों पर केंद्रित है। सरकार ने आने वाले वित्तीय वर्ष को किसान वर्ष घोषित कर अपनी मंशा को साबित कर दिया है। मुफ्त सिंचाई के लिए 200 करोड़ का प्रावधान किसानों के हित में है। जिले में आउट कैंपस की स्थापना से कृषि की उच्च शिक्षा के नए आयाम स्थापित होंगे।

-डॉ. राम पाल सिंह, प्रगतिशील किसान
‘व्यापारी मायूस’
उत्तर प्रदेश सरकार ने पेश किए बजट में व्यापारियों को राहत देने संबंधी कोई कदम नहीं उठाए हैं। इंस्पेक्टर राज खत्म करने और कराधान के सरलीकरण के लिए भी कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। प्रदेश सरकार के बजट से बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन बजट आया तो कोई राहत नहीं मिली। इससे व्यापारियों में मायूसी है।
-राकेश मिश्र, व्यापारी नेता

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