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Lakhimpur Kheri News: साइटोपैथोलॉजी लैब में 326 संभावित कैंसर मरीज चिन्हित
Wed, 04 Feb 2026 12:02 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:02 AM IST
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जिला अस्पताल में बनी साइटोपैथोलॉजी लैब। संवाद
लखीमपुर खीरी। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल की साइटोपैथोलॉजी लैब ने कैंसर की शुरुआती पहचान में अहम भूमिका निभानी शुरू कर दी है। पिछले करीब दस महीनों में यहां जांच के दौरान 326 मरीजों में संभावित कैंसर के लक्षण सामने आए हैं, जिन्हें उच्च जांच और इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया।
जिला अस्पताल में 26 मई 2025 को साइटोपैथोलॉजी लैब की शुरुआत की गई थी। मई से दिसंबर तक करीब 300 मरीजों में संभावित कैंसर की पुष्टि हुई, जबकि जनवरी माह से अब तक 26 नए मामलों में कैंसर के लक्षण पाए गए हैं। समय रहते पहचान होने से मरीजों के बेहतर इलाज की संभावना बढ़ी है।
जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि पहले इस तरह की जांच के लिए मरीजों को लखनऊ जाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की परेशानी होती थी। अब जिले में ही जांच सुविधा मिलने से मरीजों को काफी राहत मिली है।
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उन्होंने बताया कि साइटोपैथोलॉजी जांच में सूई के माध्यम से गांठों की साधारण या कैंसर प्रकृति का त्वरित पता लगाया जाता है। यह जांच स्तन कैंसर, लिवर कैंसर, टीबी और अन्य गांठों में की जाने वाली प्राथमिक जांच है।
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ये हैं लक्षण
-मुंह का कम खुलना, छाले-घाव ठीक न होना।
-मुंह में सफेद, लाल धब्बे होना।
-भोजन निगलते समय दर्द होना।
-महिलाओं में स्तन में गांठ, निप्पल से स्राव।
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जिला अस्पताल में 26 मई 2025 को साइटोपैथोलॉजी लैब की शुरुआत की गई थी। मई से दिसंबर तक करीब 300 मरीजों में संभावित कैंसर की पुष्टि हुई, जबकि जनवरी माह से अब तक 26 नए मामलों में कैंसर के लक्षण पाए गए हैं। समय रहते पहचान होने से मरीजों के बेहतर इलाज की संभावना बढ़ी है।
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जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि पहले इस तरह की जांच के लिए मरीजों को लखनऊ जाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की परेशानी होती थी। अब जिले में ही जांच सुविधा मिलने से मरीजों को काफी राहत मिली है।
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उन्होंने बताया कि साइटोपैथोलॉजी जांच में सूई के माध्यम से गांठों की साधारण या कैंसर प्रकृति का त्वरित पता लगाया जाता है। यह जांच स्तन कैंसर, लिवर कैंसर, टीबी और अन्य गांठों में की जाने वाली प्राथमिक जांच है।
ये हैं लक्षण
-मुंह का कम खुलना, छाले-घाव ठीक न होना।
-मुंह में सफेद, लाल धब्बे होना।
-भोजन निगलते समय दर्द होना।
-महिलाओं में स्तन में गांठ, निप्पल से स्राव।