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नए साल में मिलेगा गैंडों को नया आशियाना
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:09 PM IST
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नए साल में गैंडा परियोजना फेज टू शुरू होने के आसार बढ़े
- दक्षिण अफ्रीका से आयात होगी ट्रैंकुलाइज करने की दवा
- केंद्रीय कृषि मंत्रालय, ड्रग कंट्रोलर जनरल ने दी मंजूरी
महबूब आलम
पलियाकलां।
दुधवा नेशनल पार्क में वर्षों से रुकी चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 का नए साल में शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। गैंडों के लिए पार्क क्षेत्र के बेलरायां रेंज स्थित छंगानाला भादी ताल में नया घर बनकर तैयार है। गैंडों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए जरूरी बेहोशी की दवा दक्षिण अफ्रीका से आयात करने की अनुमति केंद्रीय कृषि मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर जनरल से मिल चुकी है।
गैंडों को उनके पुरखों की धरती पर फिर से बसाने के लिए दुधवा नेशनल पार्क के दक्षिण सोनारीपुर रेंज के ककरहा ब्लॉक के करीब 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में गैंडा पुनर्वासन योजना 1984 में शुरू की गई थी। सबसे पहले आसाम से पांच गैंडे लाए गए, इनमें दो नर और तीन मादा थे। बाद में नेपाल से चार मादा गैंडा लाकर इनके साथ रखी गईं। परियोजना सफल हुई और 33 साल में इनकी संख्या बढ़कर करीब 34 हो गई।
गैंडा पुनर्वासन योजना को मिली सफलता के बाद गैंडों में अंत:प्रजनन से होने वाले आनुवंशिक दोषों से बचाव के लिए बेलरायां रेंज में गैंडा परियोजना फेज टू शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए बजट मिलने के बाद दूसरा पुनर्वास क्षेत्र तैयार कर लिया गया है। यह क्षेत्र गैंडों के प्राकृतिक आवास, भोजन, पानी और प्रजनन के लिए पूरी तरह अनुकूल पाया गया है।
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बेहोशी की दवा आयात करने के लिए मिली मंजूरी
गैंडों को ककरहा से नए घर में ले जाने के लिए ट्रैंकुलाइज करना जरूरी होता है। गैंडों की बेहोशी की दवा अफ्रीका से आयात की जानी है। इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से अनुमति आवश्यक थी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पहले ही इसके लिए स्वीकृति दे दी थी। हाल ही में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भी इसके लिए मंजूरी दे दी है। मंजूरी मिलते ही पार्क अधिकारियों ने इसके आयात की तैैयारियां शुरू कर दी हैं।
सौर ऊर्जा चलित बाड़ से घिरा होगा नया आशियाना
दुधवा नेशनल पार्क के भादी ताल में गैंडों का 1312 वर्ग किलोमीटर को सौर ऊर्जा चलित बाड़ से घेरकर नया घर तैयार कर लिया गया। गैंडों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए क्रेन रैंप आदि का भी प्रबंध हो गया है। इसमें आठ से दस गैंडों को रखे जाने की योजना है।
गैंडों को नए घर में शिफ्ट करने के लिए बेहोशी की दवा दक्षिण अफ्रीका से आयात करने की अनुमति मिल गई है। जल्दी ही दवा आयात कर गैंडा पुनर्वास योजना फेज-2 शुरू की जाएगी। इससे गैंडों की आबादी बढ़ाने और उन्हें आनुवंशिक दोषों से बचाने में मदद मिलेगी।
- सुनील चौधरी, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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- दक्षिण अफ्रीका से आयात होगी ट्रैंकुलाइज करने की दवा
- केंद्रीय कृषि मंत्रालय, ड्रग कंट्रोलर जनरल ने दी मंजूरी
महबूब आलम
पलियाकलां।
दुधवा नेशनल पार्क में वर्षों से रुकी चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 का नए साल में शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। गैंडों के लिए पार्क क्षेत्र के बेलरायां रेंज स्थित छंगानाला भादी ताल में नया घर बनकर तैयार है। गैंडों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए जरूरी बेहोशी की दवा दक्षिण अफ्रीका से आयात करने की अनुमति केंद्रीय कृषि मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर जनरल से मिल चुकी है।
गैंडों को उनके पुरखों की धरती पर फिर से बसाने के लिए दुधवा नेशनल पार्क के दक्षिण सोनारीपुर रेंज के ककरहा ब्लॉक के करीब 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में गैंडा पुनर्वासन योजना 1984 में शुरू की गई थी। सबसे पहले आसाम से पांच गैंडे लाए गए, इनमें दो नर और तीन मादा थे। बाद में नेपाल से चार मादा गैंडा लाकर इनके साथ रखी गईं। परियोजना सफल हुई और 33 साल में इनकी संख्या बढ़कर करीब 34 हो गई।
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गैंडा पुनर्वासन योजना को मिली सफलता के बाद गैंडों में अंत:प्रजनन से होने वाले आनुवंशिक दोषों से बचाव के लिए बेलरायां रेंज में गैंडा परियोजना फेज टू शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए बजट मिलने के बाद दूसरा पुनर्वास क्षेत्र तैयार कर लिया गया है। यह क्षेत्र गैंडों के प्राकृतिक आवास, भोजन, पानी और प्रजनन के लिए पूरी तरह अनुकूल पाया गया है।
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बेहोशी की दवा आयात करने के लिए मिली मंजूरी
गैंडों को ककरहा से नए घर में ले जाने के लिए ट्रैंकुलाइज करना जरूरी होता है। गैंडों की बेहोशी की दवा अफ्रीका से आयात की जानी है। इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से अनुमति आवश्यक थी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पहले ही इसके लिए स्वीकृति दे दी थी। हाल ही में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भी इसके लिए मंजूरी दे दी है। मंजूरी मिलते ही पार्क अधिकारियों ने इसके आयात की तैैयारियां शुरू कर दी हैं।
सौर ऊर्जा चलित बाड़ से घिरा होगा नया आशियाना
दुधवा नेशनल पार्क के भादी ताल में गैंडों का 1312 वर्ग किलोमीटर को सौर ऊर्जा चलित बाड़ से घेरकर नया घर तैयार कर लिया गया। गैंडों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए क्रेन रैंप आदि का भी प्रबंध हो गया है। इसमें आठ से दस गैंडों को रखे जाने की योजना है।
गैंडों को नए घर में शिफ्ट करने के लिए बेहोशी की दवा दक्षिण अफ्रीका से आयात करने की अनुमति मिल गई है। जल्दी ही दवा आयात कर गैंडा पुनर्वास योजना फेज-2 शुरू की जाएगी। इससे गैंडों की आबादी बढ़ाने और उन्हें आनुवंशिक दोषों से बचाने में मदद मिलेगी।
- सुनील चौधरी, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व